“मैं विष्णु-महेश, राम कृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, ना ही उनकी पूजा करूंगा……” :
राजकुमार भाटी , समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता
उधर पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव भगवा वस्त्र पहन कर घूम रहे हैं रामलीला में..
#Hinduphobia@samajwadiparty
भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में ‘हम दो-हमारे दो’ लागू करना नितांत आवश्यक है।
जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बना तो पूरी दुनिया बर्बाद हो जाएगी।
@narendramodi@AmitShah
आज समझ आ गया के अखिलेश जी क्यूँ राम मंदिर नहीं जाते
आज सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने शपथ ले ली के
मैं ब्रह्मा,विष्णु, महेश, राम, कृष्ण,को भगवान नहीं मानूँगा
साफ़ है अखिलेश यादव पूरी सपा भगवान मानते ही नहीं
सपाई पार कर रहे बेशर्मी की पराकाष्ठा...
जो हिन्दूओं को अपना शत्रु समझते हों, वो समाजवादी पार्टी और उसके नुमाइंदे कैसे अपनी गंदी जुबान से भगवान श्रीराम और श्री कृष्ण का नाम लेते हैं। ऐसे मौकापरस्त सपाइयों से सावधान रहने की जरूरत है। सपा नेता राजकुमार भाटी का खुले मंच से हिंदू देवी-देवताओं का बहिष्कार करने का प्रण बेहद ही शर्मनाक और निंदनीय है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कहा कि :-
“मैं ब्राह्मण-विष्णु-महेश, राम कृष्ण को भगवान नहीं मानूँगा, ना ही उनकी पूजा करूंगा……”
सपा अध्यक्ष जी बताएं कि आपके राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा बोला गया क्या यही सपा का मूल चिंतन है।
आप केवल चुनाव के कारण हिन्दू होने का आचरण कर रहे हैं?
मैं हिंदू धर्म के गणपति एवं ब्रम्हा, विष्णु ,महेश एवं किसी भी देवता को नहीं मानूंगा और न ही इनकी पूजा करूंगा : राजकुमार भाटी प्रवक्ता सपा
सपा प्रवक्ता भाटी ने खोल दी सपा की पोल
समाजवादी पार्टी का चेहरा बेनकाब हुआ
2027 चुनाव के पूर्व हिंदू विरोधी असली चेहरा जनता के सामने आया।
देश जानना चाहता है कि:
कितने ड्रग कारोबारियों को फाँसी हुई?
कितने ड्रग कारोबारियों की नागरिकता खत्म हुई?
कितने ड्रग कारोबारियों की 100%संपत्ति जब्त हुई?
कितने ड्रग कारोबारियों को आजीवन कारावास हुआ?
SC-ST Act की तरह NDPS Act में 02 महीने में जांच और ट्रायल क्यों नहीं होता है?
60 हजार वेतन में 02 कोठी, 03 फ्लैट और 10 प्लॉट😳
घूसखोरों की 100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में फाँसी देने के लिए कानून कब बनेगा?
@narendramodi@AmitShah
नोएडा के दादरी डाक घर मे पिछले 4/5 दिनों से सर्वर की समस्या बताई जा रही है लोग परेशान है मे खुद सुबह से लाइन मे लगा हु पर सर्वर की समस्या के कारण काम नही हो पा रहा है। कृप्या डाक घर के सर्वर की समस्या का समाधान कराए🙏
@IndiaPostOffice
आतंकवादियों को मात्र 06 वर्ष की सजा?
ऐसे घटिया कानून से देश सुरक्षित होगा??
आतंकवादियों की 100% संपत्ति जब्त करने, नागरिकता खत्म करने और 01 वर्ष में फाँसी देने के लिए कानून क्यों नहीं बनाया जा रहा है?
@HMOIndia@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
राहुल गांधी बार-बार 'मनुस्मृति' का आधा सच बताकर हिंदुओं को निशाना बनाते हैं।
वो यह क्यों भूल जाते हैं कि इसी में 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते...' (जहां नारी का सम्मान, वहां देवता) भी लिखा है?
आखिर सनातन धर्म से ही इतनी नफरत क्यों?
हिंदुओं के सुन कर होश उड़ जाएंगे कि नोएडा के चौड़ा गांव में एक चौदह साल के हिंदू ब्राह्मण बच्चे को |
उसके मजहबी घर से बुला कर जन्मदिन की पार्टी में ले गए और उसे वहां चाकू गोद गोद कर मार दिया है |
लड़के की मां मीडिया के सामने बिलख बिलख कर कह रही है कि मेरे फूल से बच्चे को मार दिया | 😡😡
हिंदुओं से बस यही कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन पर इतना दवाब बना दो कि हत्या की साजिश करने हत्यारों का जीवन नर्क हो जाए |
और पुलिस प्रशाशन चाह कर भी इस मामले में ढील ना दे पाए क्योंकि अबकी बार शिकार मात्रा चौदह साल का बच्चा हुआ है | 😡😡
पोल खोल:
मनुस्मृति पर तो बहुत बात हुई,
तो थोड़ी बात बाइबिल पर भी हो जाए.
बात निकली है तो सबका नंबर आएगा.
राहुल गांधी की स्कूलिंग और कॉलेज दोनों दिल्ली के ईसाई संस्थाओं से हुई है, इसलिए बाइबिल को वे जानते ही होंगे और ये लाइन उन्होंने पढ़ी होगी.
“यदि कोई व्यक्ति अपनी बेटी को दासी के रूप में बेचता है, तो उसे पुरुष दासों की तरह स्वतंत्र होकर जाने की अनुमति नहीं होगी. यदि वह उस स्वामी को पसंद न आए, जिसने उसे अपने लिए चुना है, तो वह उसे छुड़ाने की अनुमति दे.”
बाइबिल, ओल्ड टेस्टामेंट, एक्सोडस, अध्याय 21, पद 7–8.
बाइबिल के अनुसार, ये वे कानून हैं जिन्हें ईश्वर ने मूसा के माध्यम से इजराइलियों के सामने रखा.
इस कानून में पिता को अपनी बेटी को दासी के रूप में बेचने का अधिकार दिया गया है.
लेकिन आज के ईसाई ऐसे धार्मिक कानूनों को स्वीकार नहीं करते. वे इन्हें सिर्फ ऐतिहासिक संदर्भ में देखते हैं. इन्हें आज के समाज पर लागू नहीं करते.
वे किताब का सम्मान करते हैं पर मानते नहीं हैं, न लागू करते हैं.
यही बात हिंदू धर्म पर भी लागू होनी चाहिए.
किसी प्राचीन ग्रंथ में लिखी हर बात को आज के हिंदुओं के आचरण का प्रमाण मानना उतना ही गलत है, जितना बाइबिल के पुराने नियम के आधार पर आज के ईसाइयों को परिभाषित करना.
अगर मनुस्मृति में लिखी किसी बात के आधार पर आज के हिंदुओं को पितृसत्तात्मक बताया जा सकता है, तो उसी कसौटी से बाइबिल के इन कानूनों पर भी सवाल होना चाहिए. और अगर आज के ईसाइयों को उनके प्राचीन ग्रंथ के आधार पर नहीं परखा जाता, तो यही उदारता हिंदुओं के लिए भी होनी चाहिए.
यही असली कसौटी है. धर्मग्रंथों के पुराने नियमों और आज के समाज के बीच फर्क करना.