तुम करो तो लीला
हम करें तो पाप
तो नहीं चलेगा मोदी जी.
आपके घटिया ओछे निजी वक्तव्यों को TV वाले तो सुनाएँगे नहीं, तो मैंने ही सुना दिया. आप भी सुनिए
और हाँ मुद्दा भटकाने की लाख कोशिश कीजिए - सवाल तो मोडानी पर होंगे - जवाब देना पड़ेगा
@INCIndia पेंशन कर्मचारियों में सुरक्षा का भाव लाता है,वृद्धावस्था में सम्मानपूर्वक जीने की गारण्टी देता है,गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करता है,भारत देश के सभी कर्मचारियों को उनका यह अधिकार मिलना ही चाहिए
@GovindDotasra इस ओर भी ध्यान दो , जो आपकी सरकार की बजट व विभिन्न परिपत्रों में एक वर्ष शिथिलन का उल्लेख था अगर नहीं था तो सार्वजनिक रूप से कह दो, कि ऐसा नहीं था तो क्यों गोली पे गोली de रहे है ऐसा छलावा, वो भी शिक्षा अधिकारियों के साथ कतई उचित नहीं ।
आज तक के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ 👇
लक्ष्मणगढ़ में पद यात्रा का समर्थन-स्वागत*
रेस्टा जिला अध्यक्ष,शिक्षकसंघ शेखावत महामंत्री,प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ जिलाअध्यक्ष,राजस्थान राज्य कर्मचारी सँयुक्त महासंघ एकीकृत जिला अध्यक्ष,पूर्व उपनिदेशक शामिल #प्रधानाचार्य_डीपीसी_2022_23_शीघ्र_हो@ashokgehlot51@RajCMO
#प्रधानाचार्य_डीपीसी_2022_23_शीघ्र_हो
रेसा प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण गोदारा के नेतृत्व में शिक्षाधिकारी अपनी ज़ायज़ डीपीसी के लिए सरकार व शिक्षा विभाग से न्याय की उम्मीद में पहले धरने पर और अब पैदल मार्च करते हुए।जो ऊर्जा शैक्षणिक उन्नयन में लगनी चाहिए थी,सड़कों पर जाया हो रही है
#प्रधानाचार्य_डीपीसी_2022_23_शीघ्र_हो
रेसा प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण गोदारा के नेतृत्व में शिक्षाधिकारी अपनी ज़ायज़ डीपीसी के लिए सरकार व शिक्षा विभाग से न्याय की उम्मीद में पहले धरने पर और अब पैदल मार्च करते हुए।जो ऊर्जा शैक्षणिक उन्नयन में लगनी चाहिए थी,सड़कों पर जाया हो रही है
#प्रधानाचार्य_डीपीसी_2022_23_शीघ्र_हो
कड़ाके की ठण्ड में निदेशालय बीकानेर में शिक्षाधिकारियों द्वारा शुरू किया गया धरना सरकार व शिक्षा विभाग के उपेक्षापूर्ण रवैये के बाद अब चिलचिलाती धूप में पैदल मार्च में तब्दील।
गांधी जी के मूल्य आज के समय में कितने प्रासंगिक हैं,वक़्त बताएगा
#प्रधानाचार्य_डीपीसी_2022_23_शीघ्र_हो
प्रधानाचार्य डीपीसी पदयात्रा बीकानेर से जयपुर 14 फ़रवरी से निरंतर!
नियमानुसार यह डीपीसी दस माह पूर्व हो जानी चाहिए थी लेकिन एक माह से अधिक समय से शिक्षाधिकारियों के निदेशालय पर धरने पर बैठने के बावजूद अब पैदल यात्रा पर निकलना पड़ा है।