ऑपरेशन सिंदूर रुका नहीं है। जारी है।
ये प्रधानमंत्री ने कहा था।
ऑपरेशन रोके जाने के बाद सरकार ने सूत्रों के हवाले से यह संदेश भी दिया कि अब भारत पर होने वाला कोई भी आतंकी हमला "Act of War" माना जाएगा और उसी के अनुरूप जवाब दिया जाएगा। बाद में रक्षा मंत्री ने भी यही बात सार्वजनिक रूप से दोहराई।
उसके बाद दिल्ली में लाल किले के सामने बम धमाका हुआ।
'Act of War' मानना तो दूर, इसके बाद आरएसएस पाकिस्तान से बातचीत करने की बातें करने लगा। खबरें ये भी आई कि राम माधव ऐसी बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं। राम माधव ने इसका खंडन जरूर किया पर राम माधव ने तो इससे पहले अमरीका में अपने बयान (जिसका वीडियो मौजूद है) पर लीपा पोती भी की थी।
फिर अनंतनाग में आतंकवादियों ने एक हेड कॉन्स्टेबल की हत्या कर दी।
अब कश्मीर में आतंकियों ने नाम पूछकर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी।
आख़िर ऑपरेशन सिंदूर आखिर कर क्या रहा है?
अगर यह जारी है, तो उसका असर कहाँ दिख रहा है? और अगर ये ख़त्म हो गया तो इससे हासिल क्या हुआ?
अगर हर आतंकी हमला अब "Act of War" है, तो इन घटनाओं पर भारत की प्रतिक्रिया क्या है?
या ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ़ भाषणों के ज़रिए उन्माद फैला कर राजनीति करना था?
या फिर रात को Instagram पर एक और पोस्ट आएगी कि पाकिस्तान को भी माफ़ किया... और आतंकवादियों को भी?
सबसे आसान होता है सरकार के साथ खड़े होना क्योंकि इससे कैरियर बनता है ।
सबसे मुश्किल होता है देश के साथ खड़े होना ।
सबसे आसान होता है अंधभक्त होना ।
सबसे मुश्किल होता है बच्चों के दर्द में उनके साथ होना क्योंकि इसमे बड़े पद नहीं मिलते, नौकरी नहीं मिलती ।
ऐसे लोगों को लानत भी नहीं भेज सकता । 1/2
ये सतपुड़ा की पहाड़ियों से घिरे छिंदवाड़ा का दृश्य है,
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 देखिए तो सही, एकलव्य आवासीय विद्यालय में अपर्याप्त और ख़राब खाने को लेकर छात्र आंदोलन पर उतर आए हैं।
@BJP4India@INCIndia
राजस्थान के कल्पवृक्ष खेजड़ी का हमारी संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण में अद्वितीय स्थान है। यदि सार्वजनिक मंच से खेजड़ी के पौधारोपण की बात कहकर पीपल का पौधा लगाया जाए, तो यह केवल एक भूल नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति खिलवाड़ किया हैं।
जो सरकार और उसके नेता संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे करते हैं, उन्हें पहले अपनी ही सांस्कृतिक धरोहर और पूजनीय वृक्षों की सही पहचान तो होनी चाहिए।
राजस्थान की जनता दिखावे और वास्तविक समझ का अंतर भली-भांति जानती है। सम्मान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि समझ, संवेदनशीलता और सही कर्मों से मिलता है।
@PMOIndia@narendramodi
यूपी में फर्जी IPS के बाद अब फर्जी इंस्पेक्टर।।
ये भाई साहब इंस्पेक्टर की वर्दी और कंधे में 1 स्टार लगाकर मिर्जापुर कलेक्ट्रेट में रौब झाड़ रहे थे।
इनकी शक्ल और हाव भाव से लोगों को शक हुआ तो इनको पकड़ा और पूछताछ की। तो ये खुद को महिला थाना में तैनात बताने लगे।
जब इनसे लोगों ने आईडी मांगी तो दे नहीं पाए। लोगों ने पकड़ कर इन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।
एक भारतीय पत्रकार ने लिखा है कि पुतिन दो दशक से अधिक समय से रूस के नेता हैं, पर वे इससे महान नहीं हो जाते हैं. यह कमेंट मैं उनके पोस्ट पर करना चाहता था, पर मिल नहीं रहा है, नाम भी ध्यान में नहीं रहा. बहरहाल, थोड़ा पुतिन की उपलब्धियों को भी देख लेना चाहिए-