Covid में जो सबकी जान बचाते रहे ,
आज उनकी जिंदगी कैसे गुज़र रही है?
क्या किसी को पता है की कोविड हेल्थ असिस्टेंट्स बेरोज़गारी से जूझ रहे हैं?
आख़िर इनका साथ कोई क्यों नहीं दे रहा ?
ना कोई संस्था ?
ना कोई मीडिया ?
ना सरकार ?
#CHA_मांगे_रोजगार@BhajanlalBjp@TimesNow@aajtak
क्या आप CHA कि व्यथा समझ सकते हैं?
जब कोविड था तब CHA ने ,
न अपने घर की चिंता की ,
न अपने परिवार की और न ही अपनी और आज जब CHA बेरोजगार हैं तब इनके साथ कोई नहीं???
#CHA_मांगे_रोज़गार@republic
"इंडिया को स्मार्ट मीटर की नहीं ❌
इंडिया को स्मार्ट स्कूल, स्मार्ट शिक्षा, स्मार्ट टीचर की जरूरत है ✅"
क्या आप राघव चड्ढा के इस बात से सहमत हैं ❓ ❓
अपनी राय जरूर बताएं और शेयर करें 👏
पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा India ✅👏
Jay हिंद 💪 #India#Raghavchadha
ये मांगें भारत में काफी समय से सोशल मीडिया और विभिन्न नागरिक मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। फिलहाल की स्थिति इस प्रकार है:🎯🎯
👇👇👇
28 बनाम 30 दिन का विवाद: TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) ने पहले ही टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे कम से कम एक ऐसा प्लान जरूर रखें जिसकी वैधता पूरे 30 दिन की हो । इसके बाद जियो, एयरटेल और वीआई ने 'महीने भर' वाले कुछ प्लान पेश किए हैं, हालांकि मुख्यधारा के ज्यादातर रिचार्ज अब भी 28 दिनों के ही हैं।
इनकमिंग फ्री की मांग: जब से कंपनियों ने इनकमिंग कॉल चालू रखने के लिए भी न्यूनतम रिचार्ज (Minimum Recharge) अनिवार्य किया है, तब से कम आय वाले उपभोक्ताओं और बुजुर्गों के लिए 'लाइफटाइम फ्री इनकमिंग' या कम से कम 1 वर्ष की फ्री इनकमिंग की मांग उठी है
अभी तक सरकार या टेलीकॉम कंपनियों ने सभी रिचार्ज प्लान्स को अनिवार्य रूप से 30 दिन करने या 1 वर्ष की इनकमिंग पूरी तरह फ्री करने का कोई नया आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है।
#MakeRecharge30Days #FreeIncomingCalls #TelecomReform #RaghavChadha #JusticeForCustomers #MobileRechargeScam #SupportRaghavChadha #ChangeTheSystem
🚨गरीब पर पेनल्टी, अमीरों पर राहत? 🫢
आज के बैंकिंग सिस्टम पर एक गंभीर सवाल खड़ा होता है—क्या यह व्यवस्था वास्तव में लोगों की मदद के लिए बनी है, या फिर कमजोर वर्ग पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए?🫢
हाल ही में सामने आए एक मामले ने इस बहस को और तेज कर दिया है। एक व्यक्ति के खाते में न्यूनतम बैलेंस के लिए जरूरी 3,000 रुपये नहीं थे। खाते में जो मात्र 500 रुपये बचे थे, बैंक ने उन्हें भी पेनल्टी के रूप में काट लिया। सवाल यह है कि जो व्यक्ति पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, उससे उसकी आखिरी बचत भी छीन लेना कितना न्यायसंगत है?
यह स्थिति तब और भी चिंताजनक लगती है, जब दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों और अमीर वर्ग के हजारों-लाखों करोड़ के लोन को या तो पुनर्गठित कर दिया जाता है या लंबे समय तक टाल दिया जाता है। आम आदमी के लिए नियम सख्त और अमीरों के लिए राहत—यह दोहरा मापदंड आखिर क्यों?
Raghav Chadha
यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि देश के लाखों छोटे खाताधारकों की हकीकत है, जो हर महीने “मिनिमम बैलेंस” के दबाव में जीते हैं। उनके लिए बैंक एक सहारा बनने के बजाय, कई बार अतिरिक्त आर्थिक सजा जैसा महसूस होता है।
इस मुद्दे पर Raghav Chadha जैसे कई जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर सवाल उठा चुके हैं कि क्या इस तरह की पेनल्टी वास्तव में जरूरी है, या इसे खत्म कर देना चाहिए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
अब असली सवाल यही है—क्या बैंकिंग सिस्टम को ज्यादा संवेदनशील और जनहितकारी बनाने की जरूरत है?
क्या मिनिमम बैलेंस पेनल्टी जैसी व्यवस्थाएं खत्म होनी चाहिए?
यह बहस सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ी हुई है।
#RaghavChadha #IndiaNews
आवाज़ उठाओ अब बदलाव जरूरी है!
नौकरी करने वाले का महीना 30 दिन का होता है,
दूध वाले का महीना भी 30 दिन का होता है
लेकिन मोबाइल रिचार्ज कराने वाले का महीना 28 दिन का क्यों?
हर बार 300-400 रुपये का रिचार्ज,
और साल में 12 नहीं बल्कि 13 बार खर्च!
क्या ये सही है? क्या आम जनता से ऐसे ही extra पैसा लिया जाएगा?
अगर आप भी चाहते हैं कि
रिचार्ज 28 दिन की जगह 30 दिन का हो
Incoming कॉल हमेशा फ्री रहे
तो अब चुप मत रहो…
अपनी आवाज उठाओ और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा रिपोस्ट करो
एकजुट होंगे तभी बदलाव आएगा!
देश की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ने प्रेमानंद महाराज जी को PhD की मानद उपाधि ऑफर किया।
इस पर पूज्य प्रेमानंद महाराज जी ने कहा
हम उपाधि मिटाने के लिए संत बने है, कोई भी उपाधि साधु को छोटा कर देती है, हम जिस उपाधि में है उससे सब छोटे है !
प्रेमानंद जी ने कहा बाहरी डिग्री ऑफर करना हमारा सम्मान नहीं बल्कि उपहास है, रही पीएचडी की बात तो
हम ने मन की PhD की है, जो साधना से मिली है !
प्रेमानंद जी महाराज का ये निश्चल और स्वार्थहीन अंदाज पूरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर वायरल है।
राघव चड्ढा ने टेलिकॉम कंपनियों की नींद उड़ा रखी है 🚨🧐👇 @raghav_chadha
अगर आप भी चाहते हैं कि यह लूट बंद हो तो आवाज बुलंद करने के लिए ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट करके बताएं👏
नेटवर्क एकदम घटिया और पैसा चाहिए बढ़िया
जय हिंद 💪 #Telecom#jio#airtel#bsnl#vi #raghavchadha
🚨आवाज़ उठाओ – अब बदलाव जरूरी है!🚨
नौकरी करने वाले का महीना 30 से 31 दिन का होता है,
दूध वाले का महीना भी 30 से 31 दिन का होता है…!
लेकिन मोबाइल रिचार्ज कराने वाले का महीना 28 दिन का क्यों?
हर बार 349 -399 रुपये का रिचार्ज,
और साल में 12 नहीं बल्कि 13 बार Sim Recharge कराना क्या ये सही है?
क्या आम जनता से ऐसे ही ज्यादा पैसा लिया जाएगा?
अगर आप भी चाहते हैं कि
✅ रिचार्ज 28 दिन की जगह 30 दिन का हो
✅ Incoming कॉल हमेशा फ्री रहे
तो अब चुप मत रहो…
अपनी आवाज उठाओ और इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा Repost करें
एकजुट होंगे तभी बदलाव आएगा! #RaghavChadha
Jio-Airtel संग 160 रुपये से भी कम में करें अनलिमिटेड बातें, पाएं 84 से 365 दिन की वैलिडिटी सांसद राघव चड्डा की एक और जीत !
आप लोगों का सपोर्ट रहा तो जल्द टेलीकॉम कंपनियों को झुकना पड़ेगा 👍💪💪
लूट बंद होनी चाहिए 🤯 कितने लोग सहमत है 👏 शेयर करें 👇👇
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Hello Jio & Airtel
लूट बन्द करो और
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रिचार्ज खत्म होने के बाद भी इनकमिंग कॉल की सुविधा जारी रखें ।
यह लूट बंद होनी चाहिए। सहमत हैं तो रिट्वीट करें 👇
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बेरोजगारी की मार झेल रहे छात्रों से करोड़ों रुपए वसूलना क्या न्याय है? राघव चड्ढा की इस मांग का मैं पूर्ण समर्थन करती हूं कि नौकरी नहीं तो फीस रिफंड होनी चाहिए।
आपकी क्या राय है?
जब एक चपरासी से लेकर IAS बनने तक के लिए परीक्षा अनिवार्य है, तो देश चलाने वाले नेताओं के लिए क्यों नहीं? 🤔
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राजनीति में 'एजुकेशनल क्वालिफिकेशन' की मांग उठाकर एक नई बहस छेड़ दी है। क्या आप सहमत हैं कि नेताओं का भी एक 'एंट्रेंस एग्जाम' होना चाहिए? 📝🇮🇳