काक: कृष्ण: पिक: कृष्ण: कोभेद: पिककाकयो:।
वसन्तकाले सम्प्राप्ते काक: काक: पिक: पिक:।।
जैसे कौआ और कोयल दोनों काले होते हैं और इनमें भेद करना बड़ा मुश्किल होता है पर वसन्त ऋतु के आते ही जब कोयल मधुर गाती है और कौआ काँय काँय करता है तो असलियत का पता चल जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
वो पुराने दिन
वो सुहाने दिन
आशिक़ाने दिन
ओस की नमी में भीगे
वो पुराने दिन
दिन गुज़र गए
हम किधर गए
पीछे मुड़ के देखा पाया
सब ठहर गए
अकेले हैं खड़े
क़दम नहीं बढ़े
चल पड़ेंगे जब भी कोई
राह चल पड़े
जाएँगे कहाँ
है कुछ पता नहीं
कह रहे हैं वो
कि उनकी है ख़ता नहीं
#पीयूषमिश्र
@Neeraj_chopra1 लेकिन आप जानते होंगे कि मुंह मे पीक भरकर कोई भी भाला नहीं फेंक सकता। हां अगर अगर मुंह से पीक मारनी हो तो बात अलग है। इस खेल में हम निर्विवादित विश्व चैम्पियन हैं।😊
कृपया, सही का चुनाव करना, बड़ी जिम्मेदारी है तुम पर
जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम।।