मुझे गहरा अफसोस है कि मैंने कल के वीडियो में मीडिया पर बोला क्योंकि उन्होंने हमें 2 कौड़ी का कहा।
आज सारे दिन सिर्फ वही बात होती रही। और ऐसा डर होने लगा कि इस मीडिया vs YouTube Teachers की बहस में कहीं पेपर लीक जैसा इतना बड़ा मुद्दा धुंधला न हो जाए।
क्योंकि सरकारें तो यही चाहती हैं कि किन्हीं दो पक्षों को लड़ाकर खुद बच जाए।
आप सबसे मेरी गुजारिश है कि अभी हमें सिस्टम ठीक करके ही सांस लेनी है। जो अति पेपर लीक की हो चुकी है, उसका अंत करने का यही सही समय है।
मैं एक बात और जोड़ना चाहूँगा कि मैंने ढाई घंटे से ज्यादा पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और सिस्टम की खामियों पर बोला था। कृपया उस तरफ भी थोड़ा ध्यान आकर्षित कीजिए।
और रही बात कोचिंग्स की, तो नीचे दिया गया वीडियो देखिए, जो उसी वीडियो का हिस्सा है जिसमें मैंने खुद कुछ कोचिंग संस्थानों के चरित्र और कमियों पर भी खुलकर बात की है। मैंने हमेशा गलत को गलत कहा है।
दूसरा यह भी जान लीजिए कि मैंने अपनी ऑफलाइन कोचिंग्स बंद किए आज 7 साल से ज्यादा हो गए हैं। और ऑनलाइन Abhinay Maths[10lakh+ users] पर इस समय जो भी कोर्स उपलब्ध हैं, वे पूरी तरह निःशुल्क हैं।
हाँ, पिछले कई वर्षों में मैंने छात्रों के हक के लिए अनेक लड़ाइयाँ अदालतों में लड़ी हैं। आप सब जानते हैं कि न्याय पाने के लिए आज बहुत बड़ा आर्थिक खर्च करना पड़ता है। उसी खर्च को वहन करने के लिए मैं कहीं और प्रतिदिन कुछ घंटे काम करता हूँ।
मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण हमेशा छात्र रहे हैं, और आगे भी रहेंगे।YouTube पर लगातार free classes पढ़ा रहा हूँ। महीने में कई करोड़ लोग उन्हें देखते हैं और comment पढ़कर मेरी teaching का आसानी से आकलन कर सकते हैं।
इसलिए मेरी आप सबसे विनम्र प्रार्थना है कि व्यक्ति, मीडिया या YouTube Teachers की बहस में उलझने के बजाय उस असली मुद्दे पर ध्यान केंद्रित रखें, जिसने लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रखा है - पेपर लीक, भर्ती व्यवस्था की खामियाँ और युवाओं के साथ हो रहा अन्याय।
लड़ाई किसी एंकर से नहीं है।लड़ाई उस व्यवस्था से है जिसे ठीक होना चाहिए।
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
इटली की PM एक महिला हैं और महिलाएँ अमूमन ज़्यादा जजमेंट की शिकार होती हैं फिर भी वो कूल हैं क्यूँकि उनके देश में इस वीडियो का तमाशा बनाने वाला इकोसिस्टम नहीं है
और यहाँ सो कॉल्ड “मोहब्बत की दुकान” वालों और उनके ग्राहकों को ये भी हज़म ना हो रहा।
गजबे है
पर तुम जैसे दलाल पत्रकार ऐसे सवाल कहां करेंगे सरकार से, तुमने तो चाटने का काम कर रखा है, तुम्हारे सवाल यही होते हैं आम काट कर खाते हो या चूसकर , पत्रकारिता के नाम पर कलंक हो तुम म****** 🤬🤬
एक मनमुताबिक सवाल ना हो तो सालों से कांग्रेस कवर करनेवाले पत्रकार को भी BJP एजेंट बता देने वाले “भईया” और जरा सा इधर उधर का पूछने वाले को लेफ्ट का एजेंट बता देने वाली “दीदी” की पूरी पार्टी और इकोसिस्टम एक विदेश पत्रकार की “नौटंकी” पर ऐसे ख़ुश हैं जैसे जंग जीत ली हो।
कुछ सौ लोगों से सवाल पूछकर दुनियाभर का दो कौड़ी का एक प्रेस फ्रीडम इंडेक्स बनाकर उसे हथियार की तरह इस्तेमाल करने से ट्विटर पर माहौल बन सकता है, पब्लिक के मन में नहीं।
विदेश मंत्रालय से जब उस पत्रकार ने पूछा कि “हम आप पर कैसे भरोसा करें” तो खखर कर बोलना चाहिए था कि “करना है तो करो वरना मत करो, हम कौन सा मरे जा रहे तुम्हारे भरोसे के लिए”
जिस देश में प्रधानमंत्री के मरने के नारे लगने से लेकर उनको माँ तक की गाली दे दी जाती हो, जहाँ पीएम को 24*7 गाली देकर ही कई यूट्यूबर्स की रोज़ी रोटी चल रही हो, वहाँ के मानवाधिकार और प्रेस फ्रीडम पर ज्ञान देने वाले लबड़धोधो को चिंदी वाले ही कंधे पर उठाये नाच सकते हैं।
गजबे है
ऐसे चुतिया पत्रकारों की वजह से ही देश तरक्की नहीं कर रहा है, सवाल करना चाहिए सरकार से महंगाई रोजगार पर और यह चुतिया दल्ला पत्रकार कलर में ही खुश हैं🤬
@SushantBSinha