निर्धन ब्राह्मण परिवार सरकारी योजनाओं से बाहर
फर्रुखाबाद जिले में एक ब्राह्मण परिवार को सरकारी राशन समेत कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा है।
तंज करते हुए लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब किसी परिवार को “क्रीमी लेयर” या संपन्न वर्ग मानकर योजनाओं से बाहर रखा जाता है, तो क्या वास्तव में उसे सरकारी राशन की जरूरत नहीं होती?
ये यूपी का एक ब्राह्मण परिवार है जो सरकार की नजरों में अरबपति है।
इस परिवार के पास जो घर है उसमें पानी आता है खाने को रोटी नहीं है रहने को घर नहीं है इसलिए ये बच्ची रो रही है।
इनको सरकार की कोई सुविधा भी नहीं मिलेगी क्योंकि ये अरबपति है।
और इनको आरक्षण नहीं मिलेगा क्योंकि आरक्षण मिलेगा उस मंत्री चिराग पासवान को क्योंकि वो बहुत गरीब है उसके पास खाने को भी कुछ नहीं है😡
5000 साल → 600 जातियां पानी नहीं पीने दिया
संविधान के 70 साल → 600 और जाती जुड़ी
इतिहास छोड़ो भाई…ये कैसा ‘रिवर्स प्रोग्रेस’ है?
अजीत ब्रो फूल फायर रोस्टिंग मोड में है 🔥😅
जालंधर की रहने वाली अनन्या ने आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय सेना की ड्रेस पहनने की जिद की. घर वाले ड्रेस खरीद लाये और पहना दी. फिर दीदी जी ने डुप्लीकेट AK-47 की मांग की. घर वालों ने वह भी दिला दी. अब दीदी जी कह रही है कि मुझे आतंकवादियों को टपकाना है, उनको लेकर आओ. अब घर वाले सुबह से आतंकियों की खोज में निकले हुए हैं। 🤣🤣
सोनिया गांधी को ‘वंदे मातरम्’ की कुछ शुरुआती पंक्तियों के बाद ही इसे लेकर असहजता होने लगी। उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत समाप्त होने के बाद तक परेशान दिखे।
यही तो कांग्रेस की पुरानी दुविधा है — गांधी परिवार को भारत की सांस्कृतिक चेतना, सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रभाव के साथ आखिर इतनी असहजता क्यों?
स्वतंत्रता दिवस पर भी गांधी परिवार की वही बेचैनी कैमरे में कैद हो गई। आप खुद देख लें। ⬇️
पूरा देश देख रहा है कि झारखंड में छात्र शांतिपूर्ण, मर्यादित और अनुशासित संघर्ष कर रहे हैं।
न गाली गलौज और न ही अभद्र भाषा और
न कोई उन्हें अज्ञात स्रोतों से पेमेंट करके महंगे भोजन की व्यवस्था करा रहा है, न पिकनिक जैसा माहौल है।
जबकि यह सिर्फ पेपरलीक का मामला नहीं, बल्कि सरकार के साथ सेटिंग कर नौकरियां बांटने का कहीं अधिक गंभीर विषय है। फिर भी राहुल गांधी को रांची के छात्रों की ‘गूंज’ सुनाई नहीं दे रही।
कोटा से प्रयागराज तक दहाड़ने और चिंघाड़ने वाले आज रांची पर मिमिया भी नहीं पा रहे हैं।
साफ है उद्देश्य छात्रहित नहीं, राजनीतिक स्वार्थ है।
सोनम वांगचुक पर बहुत पोस्ट करने वालों, झारखंड के प्रोटेस्ट में भी 'देवेंद्र नाथ महतो' भूख हड़ताल पर है।
इनकी हालात लगातार बिगड़ रही है, इन पर भी स्टोरी या पोस्ट कर दीजिए।
वह रे हिंदुओं एक मंदिर के चढ़ाई में थोड़ी सी चोरी क्या हो गई कि तुम्हारी आस्था हिल गई? हर ब्राह्मण में बुराई दिखाई देती है।
दूसरी तरफ देखो हजारों आतंकवादी पैदा करने के बाद भी उन्होंने मजहब को बदनाम नहीं होने दिया। हर मुसलमान आतंकी नहीं होता लेकिन हर आतंकी मुसलमान होता है।
दरबारी पालतुओं सुनो….
अनशन करने वाला छात्र ICU पहुंच गया है। उसका वज़न 5kg कम हुआ और उसे साँस लेने में तकलीफ़ हो रही है लेकिन तुम्हारी यहां आने की हिम्मत नहीं है।
फिर पूछते हैं, जंतर मंतर और झारखंड में क्या फ़र्क़ है।
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