आचार्य चाणक्य का एक प्रसिद्ध कथन है, "शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं।" ये बात शायद इसके साथ-साथ सत्ताधरियो को अब समझना पड़ेगा
इंस्��ेक्टर : “वर्दी पहन ले पता लग जाएगी डरते क्यों हैं ”
अभिनय सर : “मैंने पहन के उतार दी 2017 में”
इंस्पेक्टर : “मर्द होते तो पहनते”
तो क्या अब मर्द की पहचान वर्दी ही रह गई?
#SSCReforms
मतलब, कितनी अजीब बात है!
लल्लनटॉप के पत्रकार @Abhinav_Pan ने रिपोर्ट किया कि मौनी अमावस्या के दिन झूसी इलाके में एक और भगदड़ मची थी. ऑन-कैमरा एक लड़की चश्मदीद के तौर पर बता रही है कि यह घटना घटी है. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि JCB की मदद से चप्पलों और कपड़ों का ढेर हटाया जा रहा है. इस रिपोर्टिंग को कई लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर भी किया.
ऐसे में, प्रशासन की ज़िम्मेदारी थी कि यदि यह घटना सच में हुई, तो इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाती, और अगर ऐसी कोई घटना नहीं हुई, तो इसका आधिकारिक खंडन किया जाता. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के 40 घंटे बाद जब वही पत्रकार मेले के DIG, वैभव कृष्णा से इस बारे में पूछते हैं, तो उनका जवाब आता है—"हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं है, हम जांच करेंगे और sequence of events को समझने का प्रयास करेंगे."
यहां दो बातें स्पष्ट होनी चाहिए—
सबसे पहले, इस तरह की घटनाएं होनी ही नहीं चाहिए. लेकिन यदि दुर्भाग्यवश कुछ घटित होता है, तो प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है कि सही जानकारी तुरंत सार्वजनिक की जाए, ताकि अफवाहों और असमंजस की स्थिति न बने.
कुंभ जैसे आयोजनों में करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालना एक कठिन कार्य होता है.
इसमें कोई संदेह नहीं कि पुलिसकर्मी और प्रशासन के अधिकारी पूरी मेहनत कर रहे हैं ताकि लोगों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो. मगर इस तरह की घटनाओं पर समय रहते सही प्रतिक्रिया देना प्रशासनिक प्रबंधन का ही हिस्सा है.
जनता की आस्था और सुर��्षा दोनों महत्वपूर्ण हैं. प्रशासन की भूमिका सराहनीय है, लेकिन पारदर्शिता और तत्परता को और मजबूत करना ज़रूरी है, ताकि न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे, बल्कि अफवाहों को भी रोका जा सके.
प्रयागराज में आज तीसरे दिन भी छात्रों का प्रोटेस्ट जारी है। हजारों की संख्या में आंदोलनरत छात्र कैंडल मार्च निकाल रहे हैं।
कुछ लोग कह रहे ��ैं कि इस आंदोलन का राजनीतीकरण हो रहा है। राजनीतिक मंशा से कुछ लोग प्रोटेस्ट में घुस आए हैं।
सवाल यह है कि किसी को राजनीति करने का मौका ही क्यों दि��ा जा रहा है, युवाओं की जायज मांग को आयोग मान कर मामला खत्म करे।
छात्र शौकिया तो प्रोटेस्ट कर नहीं रहे होंगे।
कुछ देर में वहां के किसी छात्र से बात करके अपडेट लेने का प्रयास करूंगा।
युवा विरोधी भाजपा का छात्राओं और छात्रों पर लाठीचार्ज बेहद निंदनीय कृत्य है।
इलाहाबाद में UPPSC में धांधली को रोकने के लिए अभ्यर्थियों ने जो जब माँग बुलंद की तो भ्रष्ट भाजपा सरकार हिंसक हो उठी। हम फिर दोहराते हैं : नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।
हम युवाओं के साथ हैं।
युवा कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
UP PCS और RO/ARO कैंडिडेट्स का महा-आंदोलन
पेपर लीक, पेपर रद्द. नया नोटिफिकेशन. नई तारीख़. फिर तारीख़ पर तारीख़. और फिर एक नया नोटिफिकेशन जिसके मुताबिक़ UP PCS( प्रीलिम्स) और RO/ARO(प्रीलिम्स) की परीक्षाएं अब क्रमशः 7/8 दिसंबर और 22/23 दिसंबर को अलग-अलग शिफ्ट्स में आयोजित कराई जाएंगी.
और क्या नया है? नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस. चूंकि अलग-अलग प्रश्न पत्र होंगे, जिसमें एक प्रश्न पत्र दूसरे प्रश्न पत्र के मुक़ाबले आसान या मुश्किल हो सकता है. इस गैप को ब्रिज करने के लिए आयोग ने नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस को अपनाने की बात कही है.
दो दिनों की अलग-अलग शिफ्ट्स में परीक्षाएं आयोजित कराए जाने + नॉर्मलाइजेशन प्रोसेस को लेकर तैयारी कर रहे छात्र आक्रोशित हैं.
इसके खिलाफ 11 नवंबर से छात���र प्रयागराज में महा-आंदोलन करने जा रहे हैं.
छात्रों की मांग है कि परीक्षाएं एक ही दिन और एक ही पाली में कराई जाएं और नॉर्मलाइजेशन को हटाया जाए. जबकि आयोग का कहना है कि उपयुक्त सेंटर्स की कमी होने के कारण ऐसा कर पाना संभव नहीं है. इससे पहले अक्टूबर में भी सेंटर्स की कमी का हवाला देकर परीक्षा को आगे बढ़ाया गया था.
ये भी बता दें कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि PCS की परीक्षा को दो दिन में आयोजित कराया ज��ना प्रस्तावित है. फिलहाल, उत्तर प्रदेश के 75 ज़िलों में से 41 ज़िलों में ये परीक्षा कराई जानी है.
PCS प्रीलिम्स की जो परीक्षा मार्च 2024 में होनी थी, स्थगित होते होते दिसंबर 2024 तक पहुँच गई. इसके अलावा, फरवरी 2024 में लीक हुई RO/ARO परीक्षा पहले रद्द की गई. जिसके बाद तारीख बढ़ते- बढ़ते दिसंबर 2024 तक पहुंच गई.
ऐसे में छात्र नाराज़ हैं. अपनी मांगों को लेकर महा आंदोलन करने जा रहे हैं. वहीं, आयोग तय तारीखों पर परीक्षाएं आयोजित कराए जाने की तैय���री कर रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के एक वर्डिक्ट का भी यहां ज़िक्र करना ज़रूरी है. इसके मुताबिक़, सरकारी नौकरियों के लिए यदि एक बार भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाए तो रूल्स में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता.
इस बीच सवाल उठते हैं कि क्या आयोग के लिए एक दिन और एक ही पाली में परीक्षाएं करवा पाना संभव नहीं है? क्या नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी तरह से एरर-प्रूफ है? ये प्रोसेस कितनी ट्रांसपेरेंट और निष्पक्ष होगी? प्रश्न पत्रों में ग़लत सवाल आने की स्थिति में क्या होगा? और, क्या इस विवाद के कारण परीक्षा की डेट को फिर से आगे बढ़ाया जाएगा?
#UPPCS_ROARO_ONESHIFT
#UPPSC_No_Normalisation
5 नवंबर को UPPSC ने PCS प्रीलिम्स और RO/ARO प्रीलिम्स परीक्षा क��� डेट जारी की है. इसके बाद से कई छात्र परीक्षा के शेड्यूल को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. दोनों परीक्षाओं को लेकर आपकी क्या आपत्ति है, हमें ई-मेल पर विस्तार से बताएं.
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