डियर प्रधानमंत्र�� जी,
आपके लोग इन दिनों लोगों को ढूँढ़-ढूँढ़कर माफ़ी मंगवा रहे हैं। ज़रा इन्हें यह काम भी दे दीजिए। क्योंकि लगता है, पुलिस को तो यह अब तक नहीं मिल पाया।
और हाँ, इसका कसूर क्या है, वह आप यह वीडियो देखकर ख़ुद ही समझ जाएँगे।
उप���र सरकार को बधाई हो उप्र में ‘गांजागंज’ की शूटिंग शुरू हो गई…
सवाल फिर भी यही है कि आता कहाँ से है, इस बात से ज़्यादा बड़ी बात ये है कि ‘जाता’ कहाँ हैं?
अपराधियों के हौसले तो देखिए देश के प्रधान संसदीय क्षेत्र में ये सब हो रहा है।
पन्ना में सभी खेतों में धान की रोपाई हो गई थी और खेत में जगह कम पड़ने लगी तो अनाज की बोरियों में बोआई चालू कर दी गई है
कुछ मूर्ख कहेंगे की अनाज सड़ रहा है।
इस देश में मुसलमान होना गुनाह है क्या ? जामिया इलाके में मुस्लिम स्टूडेंट को क्यों डिटेन किया गया ?
आओ फिर जंतर -मंतर के पास हजारों बच्चों -छात्र बैठे हैं . सबको डिटेन कर लो . या कि देखकर ही डिटेन कर रहे हो ? ��ार्मिक पहचान के आधार पर ?
कहा जाता था कि यह UPA नहीं, NDA सरकार है - यहाँ त्यागपत्र नहीं होते।
लेकिन आज देश के युवाओं ने लोकतांत्रिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख दिया। लाखों छात्र-छात्राओं ने अपने भविष्य, शिक्षा और जवाबदेही के सवाल पर जिस तरह एकजुट होकर आवाज़ उठाई, उसने साबित कर दिया कि लोकतंत्र में संगठित जनआवाज़ को हमेशा दबाया नहीं जा सकता।
यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति या एक पद का नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मसम्मान, अधिकार और भविष्य का है। अब लड़ाई ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है, जहाँ मेहनत का सम्मान हो, परीक्षाओं पर भरोसा हो और हर युवा का भविष्य सुरक्षित हो।
संघर्षरत हर युवा को सलाम।
युवाओं को सलाम।
और मोदी सरकार तैयार रहे, क्योंकि देश का युवा अब जाग चुका है। यह पीढ़ी सवाल भी पूछेगी, जवाब भी माँगेगी और लोकतांत्रिक तरीके से हर जवाबदेही तय करके रहेगी।
मोदी जी, करोड़ों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने के बाद अब आधी रात की Reel से उनका वक़्त बर्बाद मत कीजिए।
प्रधान बर्ख़ास्त��� दोषियों पर कार्रवाई। छात्रों से माफ़ी।
इससे कम कुछ भी मंज़ूर नहीं।
शिक्षा मंत्री ने दिया इस्तीफ़ा, झुक गई मोदी सरकार. अहंकार हार गया लोकतंत्र में. बधाई.
युवाओं के आंदोलन की दूसरी बड़ी जीत है,
क्योंकि पहली जीत ���ो डर ख़त्म कर सड़क पर उतर जाना था.
मगर अभी बहुत कुछ होना बाक़ी है. बहुत से फ़ैसले और होने चाहिए अभी. तभी नस्लों की बर्बादी रुकेगी.
तानाशाह सरकार डर कर काँप रही है।
पहले शिक्षा व्यवस्था को बरबाद किया,
करोड़ों बच्चों का भविष्य बिगाड़ा,
150 से ज़्यादा पेपर लीक करवाए,
25 बच्चों की जान चली गई ,
जब छात्र न्याय माँगने सड़कों पर उतरे,
तो उनपर ल��ठीचार्ज किया, डंडे बरसाए !
संसद के गेट बंद करवाकर, सांसदों को क़ैद किया,
Debate के लिए साझा विपक्ष की बात नहीं मानी,
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त नहीं किया,
मोदी जी छात्रों पर अत्याचार पर मौन रहे,
गृह मंत्री जिनका दिल्ली पुलिस पर नियंत्रण है,
हमारी माँग करने के बावजूद उनका कोई बयान नहीं आया !!
अब जब कांग्रेस और विपक्ष के सांसद प्रधानमंत्री निवास के आगे धरना दे रहे हैं तो हमारे सा��सदों को घसीट-घसीट कर ले गए है।
नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi को बलपूर्वक ले जाया गया है।
ये कौन सा लोकतंत्र है?
गिरफ़्तार करो, जेल में डालो, फर्क नहीं पड़ता - मोदी सरकार की सत्ता की ताकत से ज़्यादा बड़ी हमारे सत्याग्रह की शक्ति है।
हमारे बच्चों के साथ हुए ��त्याचार का हिसाब तो देना ही होगा।
दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना ब��ा देता है।
स्कूलों में टीचर से कहा जाता है कि आप बच्चों पर छड़ी नहीं चला सकते। उन्हीं बच्चों पर पुलिस लाठी चला रही थी। शहर देख रहा था। बच्चों के माँ बाप और उनके व्हाट्स एप अंकिल चुपचाप देख रहे थे। पेपर लीक करने वाले आज पार्टी मना रहे होंगे। मनाओ तुम लोग। अभी धर्म का मुद्दा खोजा जा रहा होगा ताकी गोदी ऐंकर धर्म रक्षक बन कर चिल्लाने �� जाएँ। जनता को पता है गोदी मालिक, गोदी ऐंकर, गोदी संपादक अपने पेशे के धर्म की रक्षा कभी कर ही नहीं सकते।अख़बारों की हेडलाइन कैसे मैनेज होगी? लिख कर दे दिया गया है या ख़ुद से लिख लेंगे?