सरकारों कक एक नया तरीका है गलती मानो ही मत और सब कुछ जानकर अनजान बनो #SSCGD में #प्रयागराज#कानपुर#लखनऊ#गोरखपुर से आ रही तस्वीरे इस भ्रष्टाचार का उदाहरण है ऐसे लोगो को जिम्मेदारी क्यो दी जाती है जो समर्थ न हो
क्यो नही किसी मंत्री का इस्तीफा लिया जाता?
सरकार चुप क्यों है??
हर मामले को वोट से जोड़ कर देखना सरकार का काम हो गया है . जब बात युवाओं के हक और हित की आती है तो सरकारे कुम्भकरणी निद्रा में क्यो सोती है...
@PMOIndia@EduMinOfIndia@AmitShah जी लगातार हो रहे पेपर आउट #neetleak#SSCGD
में हो रही धाधली न जाने बच्चों के मनोबल को तोड़ती है
DG, #CRPF, Shri @gpsinghips pinned the stars on three CO rank officers elevated to the rank of DIG:
✨ Shri Sumant Kumar Jha
✨ Dr. Nisheet Kumar
✨ Shri Pramod Kumar Singh
Joined by families and senior leadership, this ceremony marks a new chapter of command. Congratulations!
#NationFirst
#Vandematram150
ब्रिटेन में एक कानून था लिव इन रिलेशनशिप* बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना। जब साथ में रहते थे तो शारीरिक संबंध भी बन जाते थे, तो इस प्रक्रिया के अनुसार संतान भी पैदा हो जाती थी तो उन संतानों को किसी चर्च में छोड़ दिया जाता था।
अब ब्रिटेन की सरकार के सामने यह गम्भीर समस्या हुई कि इन बच्चों का क्या किया जाए तब वहाँ की सरकार ने काँन्वेंट खोले अर्थात् जो बच्चे अनाथ होने के साथ-साथ नाजायज हैं उनके लिए काँन्वेंट बने।
उन अनाथ और नाजायज बच्चों को रिश्तों का एहसास कराने के लिए उन्होंने अनाथालयों में एक फादर एक मदर एक सिस्टर की नियुक्ति कर दी क्योंकि ना तो उन बच्चों का कोई जायज बाप है ना ही माँ है। तो काँन्वेन्ट बना नाजायज बच्चों के लिए जायज।
इंग्लैंड में पहला काँन्वेंट स्कूल सन् 1609 के आसपास एक चर्च में खोला गया था जिसके ऐतिहासिक तथ्य भी मौजूद हैं और भारत में पहला काँन्वेंट स्कूल कलकत्ता में सन् 1842 में खोला गया था। परंतु तब हम गुलाम थे और आज तो लाखों की संख्या में काँन्वेंट स्कूल चल रहे हैं।
जब कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था,
मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है।उसमें वो लिखता है कि:
“इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे। इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपनी परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा।इनको अपने मुहावरे नहीं मालुम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है
साभार.
अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे.....भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।
सेक्युलर और वामपंथियों के लिए मुर्गी लाने वाला मोमेंट
भारतीय क्रिकेट की महिला टीम कप जीतने के बाद प्रेमानंद जी महाराज का आशीर्वाद लेने उनके पास पहुंची
ये है सनातन की ताकत
#SP_SITAPUR द्वारा निरीक्षक श्री राकेश सिंह व निरीक्षक श्री तेज प्रकाश सिंह को पुलिस उपाधीक्षक पद पर पदोन्नती के अवसर पर स्टार लगाकर उनके नवीन दायित्वों के प्रति उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गई। #Sitapurpolice#UPPolice@Igrangelucknow