भाजपा का कहना है कि आरक्षण की सीमा कोई ऐसी सीमा नहीं कि उसे तोड़ा न जा सके। मराठा समाज को तीन बार आरक्षण देने और तीनों बार कोर्ट से रोकने के बाद पुनः भाजपा कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
मध्यप्रदेश (73%), महाराष्ट्र (72%), बिहार (75%), छत्तीसगढ़ (68%) या राजस्थान (64%), भाजपा सरकार हर राज्य में 50% से आगे जा चुकी है और हर कोर्ट में उसे डिफेंड कर रही है।
अतः, जब आपको चटआ गिरोह कहे कि राहुल गाँधी आरक्षण बढ़ा देगा, उसके मुँह पर तथ्य मारिए। भाजपा शीघ्र ही निजी क्षेत्र के चतुर्थ श्रेणी से प्राइवेट में आरक्षण आरंभ करेगी। चटुए उसे भी मास्टरस्ट्रोक कहेंगे।
नीलेन्द्र जी अपने पीआर की जूस का एक-एक बूँद निचोड़ लेना चाहते हैं। जब आशीर्वाद का दीया, बाइक यात्रा, सेवा सप्ताह आदि चलते ही फ्लॉप हो गया तो सोचे कि मंदिर में चला जाता हूँ, हिन्दू नाचने लगेगा।
हिन्दू ने कहा कि बंद करो ये नौटंकी। फिर सोचे कि आडवाणी जी का तो आज भी जलवा है, पुष्पगुच्छ दे आता हूँ, फोटो देख कर राष्ट्रवादी जनता पगला जाएगी। नहीं पगलाया कोई। आडवाणी जी भी सोच रहे होंगे कि न तो कोई बर्थ डे है उनका, फिर महामानव उनके द्वार क्यों?
नीलेन्द्र जी अपने पीआर के निम्नतम स्तर पर हैं। पिछले दस महीनों में तीन बार वायरल हुए हैं, जिसमें एक बार झालमूढ़ी है, एक बार असम की चाय बगान और एक बार तो चटुआ गिरोह ‘हैलो फ्रेन्स’ की L क्रिंज को W मान कर नाच उठा।
ऐसे में ये सब करना होता है कि जन्मदिन का माह बनाया जाए। पब्लिक फंड से दीये जलाए जाएँ, पूरे सरकारी तंत्र को घुसा कर रंगारंग कार्यक्रम बना कर, ‘नया राम’ बनाया जाए कि अब दीपावली ऐसे मनेगी।
फिर भी, नीतियों में सुधार नहीं। दस महीनों से समाज का एक बड़ा हिस्सा बिलबिला रहा है मोदी एक्ट से, UGC से, आरक्षण पर चर्चा की अनुपस्थिति से, पर महामानव भगवा बंडी और खंजरी निकाल कर स्वयं को कृष्ण और सवर्णों को गोपियाँ बनाने पर तुला हुआ है।
लोग अब बंडी के भीतर के व्यक्ति को पहचान चुके हैं, जिसकी चमड़ी नीली है।
"The most important asset you have in life is your own time. You can earn more money, you can buy more businesses, and you can build bigger portfolios, but you cannot buy a single additional hour of time.
That realization completely changes how you structure your daily life. I spend almost all of my working day doing what I love, reading and thinking, surrounded by people I respect and enjoy.
I don't waste time in tedious meetings, I don't engage in corporate politics, and I don't spend time with people whose integrity I doubt.
If you can get to a point in life where you own your schedule and spend your time doing meaningful work with people you love, you have achieved true wealth, regardless of how many dollars you have in the bank."
- Warren Buffett
The main things to learn from this sort of tragedy are three:
1: Never let go of your rational mind and thought process lest you fall prey to this sort of situation.
2: The so called spirit guiding Lalit and producing the trances was not some ‘good’ being but a malevolent spirit which has got 11 more victims (Akal Mrtyu).
3: Never become greedy.
Individual sadhanas of Kavach and Shareer bandhana would have helped I feel.
Social Media पर अपने दुख के बारे में रोने से कोई समाधान नहीं मिलता। सच तो यह है कि ज़्यादातर लोगों को फर्क नहीं पड़ता। और कुछ लोग आपकी परेशानी देखकर खुश भी हो सकते हैं।
इसलिए सहानुभूति की आशा में अपना दुखड़ा मत रोइए।उसे समझिए, स्वीकारिए और उससे बाहर निकलने का रास्ता खोजिए।
एक ही दिल है मोदी जी! पत्नी केस करे मोदी एक्ट का, पति गवाही दे दे, दलाल बात करे और प्रति केस ₹2.5 लाख की कमाई!
ओ हो हो हो, ओ हो हो हो, ओ हो हो, हो हो
इक्स तेरा तड़पाबे…
देश की वैज्ञानिक क्षमता को बर्बाद करने के लिए 2022 में मोदी ने साइंटिफिक और तकनीकी क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था बनाई। किसी से पूछा नहीं, चुपके से लागू किया जैसा कि इस समाजविभाजक प्रधानमंत्री ने अपने भीम प्रेम में पहले भी किया है।
यह व्यक्ति यही कार्य प्राइवेट क्षेत्रों में भी आरक्षण के लिए 2028 के बजट सत्र में या उससे पूर्व ग्रुप डी से आरंभ करेगा। जबकि सत्य यह है कि जिसके लिए यह इतना झुक रहा है, वो इसे कहीं नहीं वोट करते।
@narendramodi इसी कारण 2047 का लक्ष्य रखा है कि तब किसको याद रहेगा?
Xiaomi’s dark factory where AI runs the entire production line, producing a smartphone every second. No workers on the shop floor. No lights. No breaks. AI even monitors, optimises and helps repair the machines.
So much for us to learn from China!
एक बुजुर्ग भगवाधारी हैं!
फोन करके बोलते थे मुझे प्रोमोट कर दो। हम सबकी बात उठाएंगे!
UGC टाइम में पता चला पार्टियों से पैसे खाये हैं तो हमने दूरी बना ली! ऐसे लोगो से दूरी अच्छी!
एक भाईसाहब हैं, ग्रुप में बोले GC शब्द use मत करो! फिर बोले हमी लीडर बनेंगे! फिर हमारे ग्रुप के चैट लीक किये, IT cell के साथ मिले, और GC activists खासकर महिलाओं को टारगेट किया! फिर आज GC activist बनके GC movement चलाने लगे, दिनरात खुद को GC नेता बताने लगे हैं!
एक भाईसाहब हैं, हमेशा हमारे साथ थे लेकिन ragebaiting करके रीच खाते थे! फिर उनको समझ आया कि दूसरे साइड ज़्यादा पैसा है! तो सोचे पैसा ज़्यादा कमाया जाए, तो रातोंरात पलट गए! अब दूसरी साइड में अम्बेडकवादी बन गए और GC activist को टारगेट करके वीडियो बनाने लगे!
एक मोहतरमा हैं, पता नहीं कौन हैं, नकली नाम के साथ अर्धरात्रि को स्पेस लगाकर लडकों का दिल बहलाती हैं, फिर दर्दभरी कहानियां सुनाकर कहती है जी असली GC एक्टविस्ट तो मैं ही हूँ, सब तो मैंने ही किया है!
एक और भाईसाहब हैं, जिनको कोई जानता भी नहीं, और जल्दी फेमस होना है तो सोचा चलो जो फेमस है उसको टारगेट कर लिया जाए!
अब ये सारे लोग झुंड बनाकर खुद को GC का शुभचिंतक बताकर, उस संस्था को टारगेट करने लगे हैं जो 20 सालों से हर कोर्ट में आरक्षण के खिलाफ केस लड़ी है!
क्यों?
क्योंकि यही तरीका है, जल्दी लोगों की नज़र में आने का और खुन्नस निकालने का की हमको लोग क्यों नहीं पूछते!
इनलोगों ने आजतक एक केस खुद नहीं किया, ना ही कोई GC के लिए काम किया! बस सबको चेहरा चमकाना है, जल्दी प्रसिद्धि पानी है ताकि कोई पार्टी खरीद ले और ज़्यादा माल बने!
बाकी जिसको इनलोगों के साथ चलना है, चलें!
बस हमें अपनी गंदी राजनीति से बाहर रखें!
धन्यवाद🙏
.@BJP4India और @narendramodi जी के सपनों का भारत! हमारे यज्ञ-हवन में दलित विघ्न डालेंगे और ब्राह्मणों को लात मारा जाएगा। इसको अरेस्ट नहीं किया जाएगा क्योंकि मोदी जी के लाडले हैं।
हर दिन यह घृणा निर्बाध चालू है। सत्ता पक्ष चुप है क्योंकि उसे आनंद आ रहा है यह सुनने में कि अब वो दलितों की पार्टी बन चुकी है। पर कोई बात नहीं, वोट भी वही देंगे।
हम किस लेवल का समाज बन रहे है समझ से बाहर है।
मेरा एक फ्रेंड है वो बैंगलोर में जॉब करता है लगभग 35 लाख पैकेज है, लेकिन उसकी वाइफ उसके पेरेंट्स को साथ नही रहने देती है।
इवन उसकी सैलरी से एक रुपया भी उसके मां पापा को नही देने देती, वो थोड़ा फ्रीलांसिंग वर्क करता है जिसका पैसा वो मुझे भेजता है कभी कभी मम्मी पापा को देने के लिए, कभी कभी खुद उनके अकाउंट में डलवा देता है।
जब मैं बोलता हूं कि इस toxicity से आजाद हो जा तो बोलता है कि दोनो बच्चो को उम्र भर एक पैरेंट के बिना रहना पड़ेगा, घर की ईएमआई है एलुमनी केसे दूंगा, मां बाप भी हेल्पलेस है बोलते है कि हमारी तो उम्र हो गई , कुछ साल बचे है वो ही उम्र भर तेरा ध्यान रखेगी।
मतलब इंसान को जिसने इस काबिल बनाया कि 30- 40 लाख कमाकर इज्जत से जी सके अपनी मर्जी की लाइफ, वो उस लाइफ को देने वाले मां बाप से ही दूर हो गया।
इस तरह के टॉक्सिक रिश्ते डिप्रेशन की बड़ी वजह बन रही है।