इस देश के नेता ही सबसे बड़े गद्दार है ,
इनके परिवार व बच्चे विदेशों मे पढ़ते है,
और ये यहाँ हिंदू, मुस्लिम, वा जातियों कि राजनीति कर पद मे बने रहना चाहते हैं|
हेलो @myogiadityanath ji आपके राज में हर दिन कोई न कोई SCST भगवन राम, कृष्ण और महादेव का अपमान कर रहा है और आपकी @Uppolice@dgpup कोई कार्यवाही नहीं कर रही, सभी भगवान हमारे आराध्य हैं और उनका अपमान होने के बाद क्या जनता आपको वोट देगी आने वाले चुनावो में? ज़रा सोचिये
मेरे 32 हजार फॉलोअर्स हैं. आधे से अधिक जनरल क्लास वाले तो होंगे. अगर मुझे कमेंट में सिर्फ गाली दे और मैं उनके ऊपर SC-ST एक्ट का मुकाबला लगा दूं, सरकार से सैकड़ों हजारों करोड़ वसूली करने के बाद फिर केस वापस ले लूं. बाद में आराम से पैसे का बंदरबांट कर लूं. क्या मस्त आइडिया है! सबको करोड़पति बना देगी कंचन! "खरबूजा कटेगा सब में बटेगा"
(*बम्पर ऑफर सिर्फ जनरल क्लास के लिए)
#ModiAct_लगाओ_पैसा_कमाओ
दुनिया की सबसे मुश्किल नौकरी: BJP IT Cell में होना।
हर गलत चेहरे को बचाओ, हर सवाल का जवाब गढ़ो अब इस पर क्या बोलोगे, भाई?😂
हमें हिंदू बनने का ज्ञान देते हो, जबकि तुम्हारे मंत्री और CM की पत्नी तक ‘मुल्ला’ बनाने में लगे हैं।
सवर्णों जागना ही होगा -
अपने बच्चों के लिये साथ देना ही होगा
आइये 13 सितंबर से 13 अक्टूबर
जागो सवर्णों भारत बचाओ यात्रा में यह यात्रा आपके लियॆ है।
अपनी एकता का परिचय दे - हमारे लिये संगठन से अधिक समाज और सामाजिक उद्देश्य है। जो आन्दोलन का शुरू से हिस्सा बनना चाहे सबका स्वागत है।
#ugc_काला_कानून_वापस_लो #ugcrollback #पंकजधवरैय्या #pankajdhavraiyya
राजस्थान के आम नागरिकों के तरह तरह के वीडियो सामने आ रहे हैं। लोग वोट मांगने आए प्रत्याशियों से UGC पर अच्छे से प्रश्न करते दिख रहे हैं।
ये झलक है मंडल जी और पूरी पार्टी से कि एक बंदा अपने रूम में बैठकर और हमारे जैसे अन्य बंदे अपने-अपने घरों में बैठकर क्या कर सकते हैं।
कुछ गलत नहीं कर रहे, कोई आग नहीं लगाई, कोई पत्थर नहीं मारा। हमने यह विचार लोगों को दिया था कि भाई, आप लोग जहाँ पर भी हो, फोन है जेब में, जो प्रत्याशी वोट मांगने आए, फोन निकाल के पूछो, भाई UGC पर क्या विचार है, आरक्षण पर क्या विचार है, EWS पर क्या विचार है, SC/ST एक्ट पर क्या विचार है। बस वो जो हिंदी अंग्रेजी जो बोलें, न बोलें, भाग जाएँ, रिकॉर्ड खाली कर लो और उसको सोशल मीडिया पर डाल दो।
अब बताओ, मंडल साहब, संलग्न वीडियो राजस्थान के दौसा से है। इससे पहले भी राजस्थान का पार्षद चुनाव हमने देखा और एक भाई कह रहे हैं कि अब वोट का टाइम आया है इसलिए बोल रहा है। हम पहले से ही थे। हो सकता है सेंट्रल गवर्नमेंट बोला हो कि आपकी बुराई करके राजस्थान निकाय चुनाव जीत जाते हैं, बाद में देखेंगे आगे के क्या कर…
हालांकि निकाय चुनाव से बहुत कुछ होता नहीं है। निकाय में पहले इतना सीरियसली नहीं होता था और पार्टी के झंडे और ये सब तो उतना ज्यादा किया नहीं जाता था पहले। अब जो है, अब ये UGC के कारण इस तरह के विषय लोगों से पूछा जा रहा है।
तो देख लो भाई, हमारा इम्पैक्ट है या नहीं। ये रैंडम एक लोकल जगह है, जहाँ मैं आज तक गया नहीं और संभवतः सौभाग्य मिले तो कभी जाऊँगा।
परंतु वहाँ पर भी देखो कि जो लोग लिख और बोल रहे हैं सोशल मीडिया से, और आज तो देखिए कि दिलीप मंडल, मतलब तुम्हारा जो नया बाप है और तुम्हारी जो नई अम्मा है, 'पार्टी', उस पार्टी को मेजॉरिटी जो पहली बार 2014 में मिली, उसमें इसी सोशल मीडिया का ही हाथ था।
और आज तुम्हें लग रहा है कि विज्ञापन है, निचोड़ लेंगे, व्यूज मिल रहे हैं। वाह बेटे, कैसे व्यूज निचोड़ रहे हैं?
ये (वीडियो वाले) भाई साहब भी व्यूज निचोड़ रहे थे और एक भी अनइन्फॉर्मड क्वेश्चन नहीं है यहाँ पर। सीधा बोला जा रहा है और जब ये काउंटर सामने से आ रहा है कि नहीं नहीं, उस पर सुप्रीम कोर्ट हो गया, जब वो है ही नहीं तो उस पर बात क्यों?
तो आदमी सामने से पूछता है, उसकी आवश्यकता क्या थी? सुप्रीम कोर्ट गया ही क्यों?
और आगे जो भी लोग देखते सुनते हैं, अभी 11 सितम्बर को चुनाव है ना, आप पूछिएगा इन लोगों से।
जहाँ भी उत्तर प्रदेश के लोग आएँगे आपसे मिलने के लिए, जहाँ पर भी निकाय चुनाव है, जहाँ पर भी अभी हो, अगले साल हो, जब भी हो, आप इन लोगों से पूछिएगा कि भाई सात-सात महीने में डेट क्यों ले रहे हो? गवर्नमेंट सीधा क्यों नहीं इसको निरस्त कर दे रही है? क्यों नहीं बोल रहे इस पर सामने आकर?
बोलेंगे, वो पॉलिटिकल सुसाइड है। कैसे हो जाए सुसाइड? कोई समझा, कोई लॉजिक है इसमें? आपको ये कहना है कि यूनिवर्सिटी कैंपसेज में अन्य जातियों के लिए लिखित और मौखिक घृणा जो है, बाँटी जा रही है। ऐसे समय में हम उन्हीं जाति समूहों को बाहर नहीं रख सकते हैं। या तो ये पूरा का पूरा हर व्यक्ति पर होगा, नहीं तो हम ये फ्लाइंग स्क्वाड फलाँ, हम इसकी समीक्षा करेंगे।
आप इतना बोल दो और कोर्ट को बोलो कि मामला खत्म करो। सरकार बोलेगी, हम इसकी समीक्षा करेंगे और सारे स्टेकहोल्डर्स को बिठाकर इस पर चर्चा करेंगे। ये एक पैन इंडिया इश्यू बन चुका है। आप ये कह सकते हो, लेकिन वो आपका होगा नहीं। आप खेलते रहेंगे, क्योंकि आपको ब्लैकमेल करना है।
आप नहीं चाहते कि वो लोग जो आपको कभी वोट नहीं देंगे। कल प्रदीप सिंह जी, वो तो भाई तुम्हारी तरफ के हैं ना? वो तो बीजेपी विरोधी नहीं हो गए हैं? वो तो आपके यहाँ के हैं, आपके लिए अच्छी बातें ही बोलते रहे। वो भी अब आपको बोल रहे हैं कि भाई, एक धंधा बन गया SC/ST Act, UGC, उस पर आपको बोलना चाहिए।
आप ये ब्लैकमेल नहीं कर सकते हैं लंबे समय तक। इस पर आपको कुछ न कुछ रास्ता निकालना पड़ेगा।
और उन्होंने सबसे अच्छी बात ये बताई कि जाटव तो तुम्हें पहले वोट नहीं देता था और बाकी लोगों के लिए जो तुमने 2018 में कर दिया, वो तो और नहीं देंगे।
उनको लग रहा है, अरे हमारे हाथ में तो हथियार है, हम तो किसी पार्टी के नहीं सुनने वाले, हमको जो मन में आएगा हम वो करेंगे।
आरक्षण है ही, SC/ST Act है ही, अराजक प्रवृत्ति यदि जिन भी लोगों में है, उनको एक बड़ा बढ़िया प्रोटेक्शन दे देता है।
अपराध करेंगे, गैंगरेप तक करेंगे लड़की का (दरभंगा में किया ना अभी), और उसको बोल रहे थे कि तुम्हारे पूरे परिवार को SC/ST Act में फँसा देंगे। तो अपराध कर रहे हैं, लूट रहे हैं, कब्जा कर रहे हैं जमीन का और जब कोई उसको हटाने आता है तो बोलता है, SC/ST Act लगा देंगे।
आदमी को और चाहिए क्या? बाकी लाखों करोड़ों का बजट मोदी जी ने दे रखा है इनको। हर साल वो बजट जो है, हजारों करोड़ से बढ़ता ही है। उनको काम करना नहीं है, अपराध वो जो करना चाहते हैं वो कर सकते हैं, पढ़ना लिखना है नहीं उनको। तो भाई, वो तुम्हें वोट देगा क्यों? क्या फायदा है उसको तुमको वोट देने से?
भीड़ तंत्र का तमाशा देखिए कि शिवम् नाम के सवर्ण लड़के को 2 वर्ष पुराने रैंडम वीडियो के कारण @bihar_police ने एक मुस्लिम अधिकारी को दिल्ली भेज दिया अरेस्ट करने को। यही बिहार पुलिस जातिवादी DJ गीत, वीडियो, पोस्ट आदि में टैग करने के बाद भी देखती रहती है कि क्या करें।
स्वतंत्र के साथ जो हुआ, वह भीड़ द्वारा प्रशासनिक प्रक्रिया को भयाक्रांत करने का उत्तम उदाहरण है। शिवम ने स्वतंत्र के समर्थन में पोस्टर उठाया, तो पुराना वीडियो निकाल कर अब इसका उदाहरण बनाना चाह रही है सरकार।
मुझे लगता है ये साले पगला गए हैं। इनको समझ में नहीं आ रहा कि एक और भीड़ भी है। यह वही भीड़ है जो तुम्हारे चूतड़ों से सर तक अपने कंधे लगा कर तुम्हें खड़ा रखे हुए है। या भीड़ जिस दिन वहाँ से हट कर दूसरी भीड़ का सामना करने के लिए उतरेगी, तुम पीठ के बल धराशायी हो जाओगे।
हमारे साथ के लोगों ने यह तय किया है कि अब हमारे बच्चों, युवाओं, बहनों या नेताओं पर जो भी केस होगा, दिल्ली में हम 500 वकीलों और 2000 समर्थकों के साथ हम हमेशा तैयार रहेंगे। @BhaiPreetSingh जैसे लोग अपना सर्वस्व त्याग कर इसमें लगे हुए हैं।
मैं इन सारे ही लोगों को समर्थन देता रहूँगा। आने वाला समय भयभीत हो कर छुपने के नहीं है। अपनी माँ के नाम की गाली सुन कर उसे भी अपनी राजनीति के लिए प्रयोग करने वाले लोग हमारे लिया घंटा खड़े होंगे। हमें अपनी रक्षा स्वयं ही करनी होगी। तैयार रहिए, उचित समय पर आप सबकी आवश्यकता पड़ेगी।
आरक्षण, UGC, मोदी एक्ट, सब पर सरकार को बात करनी होगी, नहीं करेंगे तो उचित मार्ग हमें पता है।
जय परशुराम!
हिंदू समाज की एकता को SC/ST एक्ट के दुरुपयोग से जितना नुकसान हुआ है, उतना शायद ही किसी और चीज़ से हुआ हो।
कानून सुरक्षा के लिए था, निर्दोषों को प्रताड़ित करने के लिए नहीं।
दुरुपयोग के सवाल वर्षों से उठ रहे हैं, लेकिन सुधार के नाम पर अब तक कुछ नहीं।
फिर भी सारा ज्ञान सिर्फ़ सामान्य वर्ग के लिए - “बटोगे तो कटोगे।”
Sc/st मे अब मुआवजा मिलेगा वह अधिकतम 12 लाख होगा, पेंशन भी मिलेगी, हमे केवल यह जानना है कि यह पैसा प्रधानमंत्री जी के पिताजी देंगे या भाजपा के पार्टी फंड से आएगा ...
मोदी हटाओ, स्वर्ण बचाओ
@narendramodi@AmitShah#SCSTएक्ट#ugc_rollback#reservation
सरकारी छात्रावास में किसी ने राधे राधे की आरती लगा दी, मोदी जी के "मेरे अपने मेरे प्यारे" अंबेडकरवादियों ने इस पर हंगामा खड़ा कर दिया और कह दिया यहां राधे राधे नहीं चलेगा, भगवान से इतनी चिढ़?
अगर इतनी ही चिढ़ है तो सरकारी छात्रावास खाली कर दो क्योंकि सरकार मंदिरों के पैसे से चलती है और हम टैक्स पेयर्स के पैसे से चलती है, जो कमाते समय भी भगवान का नाम लेते हैं और टैक्स देते समय भी, यानी हमारे पैसे में भगवान का नाम जुड़ा हुआ है जो तुम्हे पसंद नहीं, तो मत करो ऐसे पैसे का इस्तेमाल, आपकी भावना आहट नहीं होगी
वैसे जब सब हराम में मिलता है तो ऐसे ही नखरे आते हैं, गजब अन्धेर है
SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग के प्रतिदिन नए उदाहरण;
कुछ ऐसी स्टोरीज़ भी सामने हैं, जहाँ SC/ST Act के मामले में पूरे परिवार के ऊपर केस लगा दिया गया। परिवार का कहना है कि उनके पास सेटलमेंट के लिए पैसा नहीं है और स्थिति ऐसी हो गई है कि वे आत्महत्या तक की बात कर रहे हैं।
जौनपुर के मछलीशहर में एक यादव परिवार के पूरे परिवार पर SC/ST Act का मुकदमा लगा है। परिवार का आरोप है कि उनके घर में लोग घुसते थे, लड़कियों से छेड़छाड़ करते थे और जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनके खिलाफ SC/ST Act लगा दिया गया।
परिवार के लोग आज रो रहे हैं, बेचारे परेशान हैं। और कर भी क्या सकते हैं!
अखिलेश यादव का इस मामले पर कोई बयान नहीं आया है। मेरा सवाल है कि अगर OBC समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में इस तरह के मामलों से प्रभावित हो रहे हैं, तो उनके राजनीतिक प्रतिनिधि इस पर आवाज़ क्यों नहीं उठाते?
इसी तरह, पिछले कुछ दिनों में दलित लड़कियों के साथ बलात्कार की घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। ऐसे मामलों पर भी दलित राजनीति करने वाले नेताओं की चुप्पी सवाल खड़े करती है। अगर राजनीति जाति के नाम पर होती है, तो पीड़ित की जाति और आरोपी की पहचान देखकर आवाज़ क्यों बदल जाती है?
यादव समुदाय को भी UGC, RHA और SC/ST Act के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अगर आँकड़ों में किसी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में प्रभावित हो रहे हैं, तो उन्हें इस मुद्दे पर खुलकर आवाज़ उठानी चाहिए।
यादवों को अब आगे आना चाहिए।
एक और मामला सामने आया है कि एक सहायक अध्यापिका ने इंचार्ज प्रधान अध्यापिका को गैरहाज़िर करने पर SC/ST Act में फँसा देने की धमकी दी। इससे परेशान होकर इंचार्ज प्रधान अध्यापिका निशि श्रीवास्तव ने CM, DM, SP और BSA से शिकायत की और मामले की जाँच कर कार्रवाई की माँग की।
उनका आरोप है कि उनके साथ गाली-गलौज भी की गई। उन्होंने कहा कि अगर मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके लिए नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
प्रश्न यही है, कानून जिन लोगों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, क्या उसके दुरुपयोग की शिकायतों पर भी उतनी ही गंभीरता से विचार नहीं होना चाहिए?
@NijiSachiv सार्वजनिक धन का हर रुपया समानता की नींव मजबूत करने के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, पारदर्शिता और कड़े ऑडिट के बिना जनकल्याण का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है।
मेरे केस में जो गालियाँ थीं, उस पर कोई SC/ST एक्ट नहीं बना। किस बात को उन्होंने आधार बनाया? कि मैंने ये क्यों कहा कि चंद्रशेखर रावण को स्वयं को योग्य बनाना होगा कि कोई भी व्यक्ति जो है, अपनी बेटी का ब्याह उसके साथ करे।
तो ये कहने का मतलब ऐसा हुआ कि आप योग्य बनने की जो बात कर रहे हो, वो आपके हाई कास्ट और सेंस ऑफ प्योरिटी से आता है। जबकि योग्य का मतलब है, आपके अंदर वो गुण हैं या नहीं, आपकी शिक्षा क्या है, आपका स्टेटस क्या है।
कोर्ट ने इस मामले में अभी ये नहीं कहा है कि मैं दोषी हूँ या निर्दोष। कोर्ट ने सिर्फ़ ये कहा है कि इस स्टेज पर, सेक्शन 18 की वजह से anticipatory bail नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने ये भी कहा कि ट्रायल कोर्ट मेरे guilt या innocence और merits से प्रभावित नहीं होगा।
मैंने पूरी वीडियो दी है, उसका पूरा context दिया है। जो transcript था, वो भी investigating agency को दिया गया है। पुलिस ने भी कोर्ट में कहा कि सिर्फ़ केस दर्ज होने का मतलब ये नहीं है कि गिरफ्तारी होगी। उसी वीडियो में उस कमेंट से पहले मैंने दलितों के अधिकारों की बात भी की थी, देखा तो वो भी जाना चाहिए।
और सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में कहा है कि सिर्फ़ किसी व्यक्ति को गाली देना अपने आप में SC/ST Act के तहत जातिसूचक अपमान नहीं हो जाता, context देखना ज़रूरी है।
My case can be defended without a lawyer. जज वो वीडियो देख लेंगे, that should be it;
यहाँ Argument flawed नहीं है। मोदी एक्ट flawed है।
मोदी एक्ट, जो मोदी कानून है, उसके बारे में भी discussion होना चाहिए।
यदि वो चाहेंगे कि अगर मेरा ही केस देश के लिए वो उदाहरण बने, जिसके कारण इस पर चर्चा हो, so that लोग इस पर चर्चा करें।
तो मैं उसके लिए भी prepared हूँ। & I know they can very well do it;
I have been critic of the whole judicial processes & अभी कुछ दिन पहले 4 वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ और मार दिया गया। जो उसका rapist था वो murderer था, उस बच्ची के केस में बोल दिया गया कि life is precious, इसलिए हम रेपिस्ट को फाँसी नहीं दे सकते! उस बच्ची की लाइफ भी तो प्रेशियस थी।
अब क्या argument देंगे आप इस बच्ची के केस में!
ये है कोर्ट का ऑर्डर कि यदि इस पर मोदी एक्ट न लगता तो तुरंत बेल हो जाती क्योंकि इसमें कोई गंभीर बात है ही नहीं। पर मोदी एक्ट लग गया है तो अब उन्हें मेरे द्वारा ‘योग्य बनना होगा’ पर आपत्ति हो गई कि ये बात मैंने जातिवाद से ग्रसित हो कर कहा है कि रावण को किसी भी लड़की के योग्य बनना होगा।
यानी, योग्यता आर्थिक नहीं, रूप-गुण की नहीं, शिक्षा की नहीं, बल्कि कुछ और ही हो गई।
हर नेता और प्रत्याशी को ऐसे ही वीडियो पर बोलने को विवश करो चाहे वह मोदी एक्ट हो, यूजीसी हो या आरक्षण। ये बोलेंगे और फँसेंगे। रिकॉर्ड करो और सोशल मीडिया पर डालो।
इन गद्दारों और ब्लैकमैलरों को खींच-खींच कर निकालना है।