जिसके इतने बेटे रण झेल चुके हैं,
शूली, किरीच, शोलों से खेल चुके हैं,
उस वीर जाति को बन्दी कौन करेगा ?
विकराल आग मुट्ठी में कौन धरेगा ?
रामधारी सिंह `दिनकर’
आज मैंने सूर्य से बस ज़रा सा यूँ कहा
‘‘आपके साम्राज्य में इतना अँधेरा क्यूँ रहा ?’’
तमतमा कर वह दहाड़ा—‘‘मैं अकेला क्या करूँ ?
तुम निकम्मों के लिए मैं ही भला कब तक मरूँ ?
संग्राम यह घनघोर है, कुछ मैं लड़ूँ कुछ तुम लड़ो।’’
~ बालकवि बैरागी
#सुहानी_भोर 🌄
#लेखनी ✍️
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स्याह-सफ़ेद
स्याह-सफ़ेद डालकर साए
मेरा रंग पूछने आए!
मैं अपने में कोरा सादा
मेरा कोई नहीं इरादा
ठोकर मार-मारकर तुमने
बंजर उर में शूल उगाए
स्याह-सफ़ेद डालकर साए
मेरा रंग पूछने आए
- जानकी वल्लभ शास्त्री
@AarTee33@pareeknc7
ज़िंदगी की कहानी रही अनकही !
दिन गुज़रते रहे, साँस चलती रही !
अर्थ क्या ? शब्द ही अनमने रह गए,
कोष से जो खिंचे तो तने रह गए,
वेदना अश्रु-पानी बनी, बह गई,
धूप ढलती रही, छाँह छलती रही !
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