Aadhaar का ये ऐप बंद हो चुका है, UIDAI का ऐलान, नए आधार ऐप से घर बैठे होगा नंबर-एड्रेस चेंज
mAadhaar ऐप को UIDAI ने बंद कर दिया है. नया आधार ऐप ऐप स्टोर और प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. बता दें कि mAadhaar ऐप काफी समय से ऐक्टिव है, लेकिन अब इसे बंद करने का फैसला किया गया है. इस वीडियो में नए ऐप के फीचर के बारें बताते हैं. इस ऐप के जरिए यूजर्स वन टैप में बायोमेट्रिक लॉक करा सकते हैं और आधार डिटेल्स चेंज कर सकते हैं. ज़्यादा जानकारी के लिए देखिए ये वीडियो
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श्री राकेश रोशन का ये संदेश कैंसर
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आवश्यक जानकारी :
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अगर आपका मोबाइल चोरी या गुम हो गया हो तो भारत सरकार के संचार मन्त्रालय द्वारा संचालित CEIR पोर्टल https://t.co/RQ4IBHURRF पर विजिट करके अपने लॉक/ अनलॉक गुम अथवा चोरी हो गये मोबाइल फोन की शिकायत करें।
कल मध्य प्रदेश लोकसभा आयोग ने MP PCS का रिज़ल्ट जारी किया है।
इस परीक्षा में MP के रीवा की आयशा अंसारी ने अच्छे अंकों के साथ बढ़िया रैंक प्राप्त की है, आयशा अंसारी डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुई हैं,
आयशा अंसारी के पिता "ऑटो ड्राइवर" हैं, एक ग़रीब परिवार की बेटी का डिप्टी कलेक्टर बनना हर किसी के लिए हर्ष की बात है।
जिसके सपनों में जान होती है उसे ग़रीबी और मजबूरियां भी नहीं रोक पाती हैं।
बहराइच में पकड़ा गया भेड़िया सच में कितना डरावना है। इसका मुंह देखिए। इतना पड़ा कि बच्चों की पूरी गर्दन अपने मुंह में भर लेता था।
वन विभाग के मुताबिक अभी एक भेड़िया पकड़ा जाना बाकी है। वो लंगड़ा है। कहते हैं कि वही इन सबका सरदार है।
आवश्यक जानकारी :~
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अगर UPI या इंटरनेट बैंकिंग से पेमेंट करते समय आपका पैसा गलती से किसी दूसरे के अकाउंट में चला जाए तो आरबीआई द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार आप तुरंत टोल फ्री नंबर 18001201740 पर शिकायत दर्ज कराए। आपका पैसा वापस आपके अकाउंट में आ जाएगा।
ध्यान रहे कि यूपीआई और नेट बैंकिंग से गलत खाता नंबर पर पेमेंट हो जाए तो सबसे पहले उपरोक्त नंबर पर इसकी शिकायत दर्ज कारें एवं इसके बाद संबंधित बैंक जाएं और फार्म भरकर इसकी जानकारी दें। अगर बैंक मदद करने से आनाकानी करे या मदद करने से मना करे तो उपरोक्त बैंक के खिलाफ https://t.co/75V16M1xL8 पर शिकायत करें।
विदित हो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार, ऑनलाइन पेमेंट के दौरान गलती से किसी ग्राहक के खाते की रकम किसी और के पास चली जाती है तो बैंक की जिम्मेदारी है कि वह शिकायत पर गौर करके 48 घंटे के भीतर रिफंड करे। याद रखें हमेशा यूपीआई और नेट बैंकिंग से पेमेंट करने के बाद फोन पर मिलने वाले मैसेज को डिलीट नहीं करें। इस मैसेज में PPBL नंबर होता है, जिसकी शिकायत के समय जरूरत पड़ती है। गलत ऑनलाइन पेमेंट होने पर बैंक में कॉल कर सारी जानकारी के साथ PPBL नंबर दर्ज करवा कर 3 दिन के अंदर बैंक में जाएं और वहां अपनी लिखित शिकायत दर्ज करें। बैंक को दिए जाने वाला फार्म में ट्रांजेक्शन रेफरेंस नंबर, तारीख, रकम और जिस गलत खाते में पैसे गए उसकी जानकारी अवश्य दें।
दुनिया में फिलॉसफी का सबसे शानदार दौर ईसा के 400 साल पहले का है।
तब फिलॉसफी में ग्रीस विश्वगुरु बनकर उभरा। सुकरात, प्लेटो, अरस्तू, थेल्स, डायोनिसिस, हेरोकलिट्स, पाइथागोरस इस दौर में हुए।
ये कुछ सौ साल, विचारकों के स्वर्णयुग थे। इनके विचार, बहस का हिस्सा बने। काटे, जोड़े, इम्प्रूव किये गए, औऱ प्राचीन ग्रीस का दर्शन, आज पश्चिमी फिलॉसफी का बेडरॉक है।
इसी समय, भारत मे भी दर्शन आये। सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, पूर्व- उत्तर मीमांसा को वैदिक दर्शन माना गया। इसके साथ जैन, बौद्ध और चार्वाक दर्शन आये।
हम इन्हें आस्तिक और नास्तिक दर्शनों के रूप में विभाजित करते हैं। इतने दर्शन इसी दौर में क्यों बने। इसके बाद क्यो न आये।
क्या समाज की बुद्धि थम गई??
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इसका कारण, धर्म की सत्ता, मजबूत होने से मिलता है। पंथ तब छोटे थे, बहुतेरे थे, पुजारियों पण्डो का एकाधिकार न था। सवाल और जवाब का अविष्कार होता।
दर्शन का अर्थ है-देखना। आप विश्व को देखते कैसे हैं, दृष्टिकोण क्या है, कैसे आप घटनाओं, रिश्तों, समाज और व्यक्ति के जीवन का अर्थ समझते है। यह दर्शन हुआ।
फिलोसोफी का मलतब और गहरा है। फीलो याने प्रेम, सॉफी याने -ज्ञान !! तो मोहब्बत को समझना फिलोसफी है। जो मोहब्बत को खोज रहा हो, फिलॉसफर है। नजरिये, और मोहब्बत की खोज तब तक चली जब तक धर्म ने बन्दिशें न लगा दी।
भारत में दर्शन को सीधे सीधे धर्म से जोड़ लिया गया। हिन्दू दर्शन, जैन दर्शन, बौद्ध दर्शन.. ये सारे दर्शन, जो आजाद मनुष्य के विचार थे, एक एक पंथ के "कैप्टिव दर्शन" हो गए।
दरअसल भारत में धर्म और दर्शन ऐसे लट्ट-पट्ट हैं कि आधे से ज्यादा पाठकों को यह समझना कठिन है, कि धर्म व दर्शन अलहदा कैसे हो सकते हैं। यहाँ हिन्दू धर्म, वैदिक दर्शन है, और बौद्ध धर्म ही बौद्ध दर्शन..
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पश्चिम में कुछ अलग हुआ। वहाँ धर्म औऱ दर्शन अलग अलग रहे।चर्च ने अपना नजरिया लिखा- बाइबल। सारे सवालो के जवाब लिख दिए। अब बाकी सारे दर्शन खारिज।
कोई सवाल नही, अलग नजरिया नही। बाइबल के जवाबों पर शुब्हा न किया जाए। किया तो आप पापी, धर्मद्रोही, शैतान हो। न मानने पर चर्च जिंदा जलवा सकता था।
तो पहली सदी के बाद ही सोच पर पहरे, बुद्धि पर ताला लगा दिया गया। तो दर्शन का विकास खत्म। इंसानी समाज मे प्यार की खोज, याने फिलॉसफी का स्पेस खत्म।
विज्डम जो थमा,
तो डेढ़ हजार साल थमा रहा।
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सोलहवीं सदी तक अंधकार युग के बाद जो हुआ, उसे पुनर्जागरण कहते हैं। मार्टिन लूथर ने शुरआत की। बाइबिल की धारणाओं पर सवाल किए।
कोपरनिकस और गैलीलियो ने किए। बताया धरती गोल है, चांद सितारे बेजान हैं। उन्होंने इसकी सज़ा भुगती। लेकिन धर्म के प्रति अंध श्रद्धा का दौर जा रहा था।
नवयुग आ रहा था। बाइबिल की जेनेसिस को ऑर्गेनिक इवोल्यूशन ने झुठलाया। धरती चांद सितारे, ईश्वर की मर्जी से नही, न्यूटन और आइंस्टीन के सिद्धातों पर चलने लगे। डार्विन ने बन्दर को मनुष्य का पूर्वज बना डाला।
हर चीज पर सवाल करना, डाउट करना, उसके कारण को खोजना- एक अभियान हो गया।
विज्ञान हो गया।
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जब यूरोप ने धर्म की जकड़न को तोड़ा, तो विज्ञान का विकास हुआ। तब जाकर पिछले 300 सालों में वे अविष्कार हुए, जो 1500 साल में हो जाने चाहिए थे।
दैनिक जीवन मे विज्ञान आया, दवाइयां बनी, संचार आसान हुआ, कार बनी, विमान बने, टीवी रेडियो, बिजली... आधुनिक संसार का निर्माण हुआ।
पर भारत धर्म की जकड़न से आज तक नही निकला।
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क्या ही विडंबना है कि आजादी का पहला ग़दर, इस डर से हुआ कि कारतूसों की चर्बी हमारा धर्म भ्रस्ट हो जायेगा??
हम भले कहें, कि विमान से लेकर सर्जरी, एटॉमिक स्ट्रक्चर से लेकर परमाणु बम, हम वैदिक काल मे हासिल कर चुके थे। ये सिवाय आत्मप्रवंचना के कुछ नही। आप वेद पढ़कर बल्ब नही बना सकते। वेंटिलेटर, या एक्सरे मशीन नही बना सकते।
आप सिर्फ, मानव के, अपने खुद के समाज के बौद्धिक विकास पर ताला लगा सकते हैं। दुनिया से अलहदा राह पर, दौड़ सकते हैं, जहां पत्ता ईश्वर की मर्जी से खड़कता है। जहां ब्राह्मण मुख और शूद्र, ब्रह्मा के पैरों से पैदा होता है।
देश की लीडरशिप, समाज औऱ राजनीति, जब पंथ की स्थापना का बीड़ा उठाती है, तो उसी अंधकार युग मे ले जाती है, जिससे मुश्किल से हाथ पांव मारकर हम निकलकर आये थे।
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2000 साल बाद तो समाज ऐसा बने, जो नए नजरिये को स्पेस दे। पुरानी धारणाओं को चैलेंज करने दे, शुब्हा करने दे, नए जवाब खोजने की आजादी दे।
हम जिस दोराहे पर हैं, वहां जरूरत यही है, कि जिस प्रेम और विज्डम को खोजकर इंसान फिलॉसफर कहलाता है, उस मार्ग के कांटे हटाये जायें। पंथ को,मन्दिर, मस्जिद, चर्च को भले ही प्रणाम किया जाये,पर यात्रा वहां जाकर खत्म न जाये।
वहां से शुरू की जाये।
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