पंजाब यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी और बाकी स्टूडेंट इलेक्शन में चुन-चुनकर NSUI के जिताऊ दावेदारों की टिकट काटकर, बार-बार पार्टी की हार का बंदोबस्त करने वाला ये बंदा आपको शायद ही कभी किसी BJP विरोधी प्रोटेस्ट में दिखेगा।
सिर्फ़ एक नहीं, दर्जनभर चुनावों में ये बंदा NSUI के साथ खेल करके ABVP की जीत का रास्ता साफ कर चुका है। जबकि हरेक इलेक्शन में NSUI के पास कन्फर्म विनिंग कैंडिडेट थे। लेकिन कन्हैया ने उनको टिकट ही नहीं दी।
इसने जिन-जिन दावेदारों की टिकट काटी, वो या तो निर्दलीय चुनाव जीते या फिर दूसरे-तीसरे नंबर पर रहे। ये बार-बार हुआ।
2 राज्यों की बात बताता हूं ! एक स्टूडेंट लीडर, जिसकी ये टिकट नहीं कटवा पाया, वो NSUI से जीता, और दूसरा स्टूडेंट लीडर, जो निर्दलीय जीतकर कांग्रेस में शामिल हुआ, उन दोनों नेताओं से कन्हैया ने ज़बरदस्त रार पाले रखी, आज भी है।
कांग्रेस लीडरशिप को स्टूडेंट लीडर्स से बात करके इसके बारे में पूरी डिटेल लेनी चाहिए, आंखें खोलने वाले ख़ुलासे होंगे।
#महेंद्र_सिंह
🚨Our North Zone volunteer Mohan Yadav’s SCREAMS.
Let entire India listen to this and the screams of his little kids being thrashed by the @DelhiPolice.
He hasn’t broken a single law till date. His only “crime” is being a volunteer for a youth movement!
State of Emergency in India!
@Cockroachisback
हुड्डा-वाड्रा
लगभग एक दशक तक पूरे देश को बताया गया कि हुड्डा ने तो सारा हरियाणा वाड्रा को दे दिया... 2014 चुनाव का सबसे बड़ा प्रॉमिस था कि जैसे ही मोदी सत्ता में आया तो गांधी-वाड्रा फ़ैमिली फ़िनिश... पूरा देश और ख़ासकर हरियाणा इस उम्मीद में सबसे ज़्यादा बहा...
ऑलमोस्ट मैं भी !!
लेकिन क्या हुआ? ये रही हुड्डा और वाड्रा फ़ैमिली। हाथरस से लेकर लखीमपुर खीरी और जंतर-मंतर तक, हर जगह साथ मिलेगी, पुलिस की धक्का-मुक्की सहती और हिरासत में जाती।
12 साल हो गए बीजेपी को सत्ता में, आज तक एक आरोप सही साबित नहीं कर पाई... जबकि ये मामला कोई ब्लाइंड म*र्डर का नहीं था, ज़मीन के लेन-देन का था...
एक तहसीलदार कागज़ देखकर 12 मिनट में बता सकता है कि लेन-देन सही है या ग़लत। लेकिन 12 साल से निगम, राज्य और केंद्र में स्थापित बीजेपी की सरकार, उसके दर्जनों विभाग, हज़ारों अधिकारी, लाखों कर्मचारी, सारे मिलकर कुछ साबित नहीं कर पाए...
लेकिन हैरानी की बात ये है कि एक झूठ का पर्दाफाश होने के बाद भी, बहुत सारे लोग आज भी उस झूठ को जी रहे हैं।
इस बीमारी को साइकॉलजी में कहते हैं- Self-deception, Motivated reasoning, Cognitive dissonance, Belief perseverance, Willful ignorance...
Get Well Soon !!
#महेंद्र_सिंह