अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस आदि पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी गहरायेगा, जिससे करोड़ों भारतवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है तथा जिसके जारी रहने की भी गंभीर आशंका है।
अर्थात् ऐसे समय में जबकि कोरोनाकाल की ज़बरदस्त मार के बाद रोज़ी-रोटी तक के संकट का जीवन झेल रही देश की लगभग सौ करोड़ जनता के पास और अधिक संयमित होने व खोने को कुछ ख़ास नहीं बचा है, तो ऐसी स्थिति में केन्द्र एवं राज्य सरकारें उन ग़रीब व मेहनतकश परिवारों को थोड़ी राहत देकर उनका सहारा बनने के लिये ख़ुद ही कुछ बेहतर करने का उपाय ज़रूर करें तो यह जन व देशहित में उचित होगा, ऐसी आम जन भावना।