चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है।
सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं ख़रीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो ‘लखनऊ से लेकर गोरखपुर’ तक पता कर लीजिए या ‘अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी’ तक।
वैसे सारी पाबंदियाँ चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हज़ारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फ़ोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाज़ार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफ़रातफ़री फैलाना नहीं।
अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत ‘गुट निरपेक्षता’ की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ ख़ास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका ख़ामियाज़ा देश की जनता को महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फ़ेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।
भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफ़रत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी।
देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
अगर आप अखिलेश यादव से सहमत है तो रीट्वीट करे तुरंत
हमारी माँग है कि सुप्रीम कोर्ट तत्काल संज्ञान लें और बंगाल की मतगणना की CCTV पूरे देश के सामने लाइव उपलब्ध कराई जाए,
अखिलेश यादव से सहमत वाले हजारी लगाओ आज . ये बात खाली विपक्ष की नहीं है पूरे देश की है बाकी आप लोगो की मर्जी है
गुजरात के भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस की हमारी महिला सांसद गेनीबेन ठाकोर जी पर अभद्र टिप्पणी की है।
“नारी वंदन” का मुखौटा उतर गया।
यह सिर्फ़ शर्मनाक नहीं - यह BJP की मनुवादी, महिला-विरोधी विचारधारा का असली चेहरा है।
ये है BJP का “नारी वंदन”?
ये करेंगे महिलाओं का सशक्तिकरण?
ये देंगे अधिकार?
सत्ता को चुनौती देने वाली महिलाएं इन्हें बर्दाश्त नहीं - एक ही पल में इनकी विकृत मानसिकता सामने आ जाती है।
और प्रधानमंत्री तो, कांग्रेस की महिला सांसदों के सवालों से घबराकर, संसद छोड़कर पहले ही भाग चुके हैं।
मोदी जी ख़ुद कहते हैं, “नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।” - मगर BJP खुद ये भूल गई।
महिला-विरोधी BJP ये याद रखे - गुजरात के साथ पूरे हिंदुस्तान की महिलाएं हर अपमान का मुंहतोड़ जवाब देंगी।
सिलेंडर महंगा नहीं होता, रोटी-थाली महंगी होती है। ये बात वही जानता है जो ख़ुद ख़रीदकर खाता है, वो नहीं जो दूसरों के यहाँ जाकर खाता है या दूसरों की थाली से चुराता है।
सिलेंडर महंगा करना था तो सीधे 1000 रूपये महंगा कर देते। 1000 में 7 रुपये कम करके ये भाजपावाले किस पर एहसान कर रहे हैं?
भाजपा ‘महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी व मंदी’ पर निंदा प्रस्ताव कब लाएगी?
प. बंगाल में भाजपा ने ऑब्जवर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किये हुए अपने एजेंट भेजे हैं लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं। दीदी हैं, दीदी रहेंगी!
सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे ‘एजेंडों के एजेंटों’ की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जाँच होगी और बेहद सख़्त दंडात्मक कार्रवाई भी। ये सब अधिकारी के रूप में अनरजिस्टर्ड लोगों के अनरजिस्टर्ड अंडरग्राउंड सदस्य हैं। हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे। ये खोज के लाए जाएंगे, खोद के लाए जाएंगे और अपने कुकृत्यों के लिए क़ानूनी सज़ा भी पाएंगे।
लोकतंत्र के अपराधी बख़्शे नहीं जाएंगे!
#भाजपाई_एजेंडे_के_एजेंट
चुनावी राहत खत्म, महंगाई की गर्मी तैयार!
29th April के बाद देखिए - पेट्रोल, डीज़ल, सब महंगे होंगे।
जब तेल सस्ता था, मोदी सरकार ने अपना मुनाफ़ा रखा। अब महंगा है, तो बोझ आप पर डालेगी।
सस्ते की लूट मचाती सरकार - जनता को बस महंगाई की मार।
एक बार फिर से दूर-दूर से लोगों को जुटाया जाएगा
“एक नहीं बार-बार झूठ बोलो” पाठ पढ़ाया जाएगा
झूठ के महा दरवाज़े से झूठ का झंडा उठाया जाएगा
अपनी करतूतों की काली सड़कों पर चलाया जाएगा
अब सामान्य ज्ञान का स्तर देखकर-सुनकर समझ में आया कि ये प्रतियोगी परीक्षाओं के विरोधी क्यों हैं?
उत्तर प्रदेश के युवा याद रखें ये वही हैं जिन्होंने बेरोज़गारों की बेरोज़गारी का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा था कि कमी नौकरी की नहीं है बल्कि युवाओं में योग्यता की कमी है।
अपने नाम रूप जो काम होना चाहिए, उस तक में तो ये लड़खड़ाते हैं और दूसरों पर अयोग्यता का आरोप लगाते हैं।
अगर इतना सामान्य ज्ञान नहीं है तो भला प्रदेश क्या चलाएंगे और ‘ज्ञान’ है पर किसी वजह से ‘ध्यान’ नहीं है तो ये और भी गलत बात है। कम-से-कम बाहर जाने पर तो संयम बरता जाए।
इससे संपूर्ण विश्व में उत्तर प्रदेश की छवि को गहरी ठेस पहुँची है, दुनिया कह रही है ऐसे लोगों के हाथ में अगर उप्र की बागडोर है तो फिर क्या ही उम्मीद करना।
वैसे इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि इनके गुट के लोग तो स्वतंत्रता आंदोलन में थे नहीं, इसीलिए स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास ये भूमिगत भूमिका निभाने वाले लोग क्या जानें। ये ज्ञान नहीं एक कान से दूसरे कान तक बात पहुँचानेवाले लोग रहे हैं।
यह महिला आरक्षण बिल नहीं है - इसका महिलाओं से कोई संबंध नहीं।
यह बिल OBC विरोधी है,
यह बिल SC-ST विरोधी है,
यह बिल Anti National है - दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के खिलाफ है।
हम भारत जोड़ने वाले न किसी का हक़ छिनने देंगे, न देश को बंटने देंगे।
मोदी जी ने कहा था - LPG Gas Crisis को COVID की तरह हैंडल करेंगे।
और सच में वही किया।
बिल्कुल COVID के जैसे ही - नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर।
₹500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा - शहर छोड़ो, गाँव भागो।
जो मज़दूर textile mills और factories की रीढ़ हैं - आज वही टूट रहे हैं।
Textile sector पहले से ICU में है। Manufacturing दम तोड़ रही है। और यह संकट आया कहाँ से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती।
जब अहंकार नीति बन जाए - अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।
सवाल एक ही है - हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।
Rupee: ₹95 → ₹100
Stocks: Crashing
Economy: Collapsed
Jobs: Gone
Income: Falling
Savings: Wiped out
Cylinders: Unavailable
Why?
PM = Compromised
He is desperate to protect himself and his financial structure. But 140 crore Indians know - PM Modi has surrendered India’s future.
ईरान के खिलाफ जंग अमेरिका को भारी पड़ गई है,
इजराइल ने ट्रम्प का चूतिया काट दिया,
एप्सटीन फ़ाइल से ब्लैकमेल होकर नेतनयाहू के उकसावे में ट्रम्प ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में झोंक दिया,
अमेरिका को लगा था कि
मामला चार दिन में खामनेई के मरते ही सेटल हो जाएगा,
लेकिन ईरान आउट ऑफ़ सिलेबस निकला,
Gulf कंट्रीज का मारकर भूत बना दिया,
दुबई, कतर, ओमान जल रहे हैँ,
NATO देश ट्रम्प का साथ देने से इनकार कर रहे हैँ,
दुनिया भर में ऊर्जा संकट है,
अमेरिका में ही ट्रम्प का विरोध तेज हो गया है,
मोदी जी भी अबकी बार ट्रम्प सरकार नहीं बोल रहे हैँ,
कुल मिलाकर MY Dear Friend दोलांड ट्रम्प के घोड़े लग गए हैँ,