RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) कितना खतरनाक है ये समझना हो तो @INCIndia की राष्ट्रीय प्रवक्ता @AnumaVidisha जी की ये बात जरूर सुनिएगा।
ये भी ये गजब का संयोग ही है कि मेरी 10वीं के बाद कि पढ़ाई आरएसएस के विद्यालय में हुई और अनुमा जी भी आरएसएस के शिशु भारती और विद्या भारती के स्कूल में ही अध्यनरत रही हैं।
#RSS
साठ-सत्तर साल पहले से ही अपने स्कूलों के ज़रिये संघ एक ‘अफवाहबाज़ संस्था’ के रूप में पनपने लगा था. 15 पैसे वाले पोस्टकार्ड में आपका पता लिखकर, लेकिन भेजने वाले के पते के बिना, यह लिखा हुआ आता था कि - ‘सुभाष चंद्र बोस अभी भी रूस में हैं और ज़िंदा हैं’, या ‘लाल बहादुर शास्त्री जी को ज़हर दिया गया है’.
ये पोस्टकार्ड जब आते थे, तो धीरे-धीरे एक ‘टाइम बम’ का रूप लेते चले गए. कई सालों बाद, जब व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी खुली, तो इन पुराने पोस्टकार्डों को नई टेक्नॉलॉजी के साथ जोड़कर BJP की अफवाहें और भी तेज़ी से बढ़ती चली गईं.
संघ एक अफवाहबाज़ संस्था है, और इसने देश पर, आइडिया ऑफ इंडिया पर प्रहार करके, अलग-अलग शातिर साज़िशों के जरिए देश को टुकड़ों-टुकड़ों में बाँटने का काम किया है.
ख़ुद ही स्वीकार कर लिया है अब हम समाजवादी कुछ नही कर सकते हैं अब जो होगा प्रभु श्री राम जी के द्वारा होगा।
और अगर नही हुआ तो समझो प्रभु श्री राम कमजोर है बीजेपी आरएसएस के सामने।
बड़ी खबर—
राम मंदिर SIT की रिपोर्ट संजय प्रसाद को सौंपकर बाहर निकले विजय विश्वास पंत को सुनिए।
कह रहे हैं कि सब कुछ गोपनीय है। अभी कुछ बता नहीं सकते।
मगर जो गोपनीय नहीं है और पूरी तरह सार्वजनिक है, वो मैं बताए देता हूँ।
पहला-
इस SIT को जिस राम मंदिर ट्रस्ट की जाँच करनी है,
उसी ट्रस्ट की सिफारिश पर ये गठित की गई है।
दूसरा-
जो अधिकारी बतौर अपर मुख्य सचिव गृह ख़ुद राम मंदिर ट्रस्ट का हिस्सा है और इस लिहाज़ से ख़ुद जांच के दायरे में है,
उसी को ये रिपोर्ट सौंपी गई है।
इसी से आप समझ सकते हैं कि इस SIT का अंजाम क्या होने जा रहा है?
अब इसके आगे सुदर्शन फाखिर का ये शेर पढ़िए-
“मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है
क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा!”
@PMOIndia@HMOIndia@CMOfficeUP
जब तर्क खत्म हो जाते हैं, तब अहंकार बोलने लगता है।
सवाल का जवाब नहीं मिला, लेकिन सवाल पूछने वाले पर ही हमला कर दिया गया। RSS की दलित-विरोधी मानसिकता एक बार फिर देश ने देख ली।
हम सब प@PriyankKharge जी के साथ हैं।
जबरा मारे और रोवे भी ना देवे।
इस क्लिप को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा डिलीट करवा दिया गया है, कुछ हिस्सा म्यूट करवा दिया गया था, फिर जब फजीहत हुई तो पूरी तरह से डिलीट करवा दिया गया था।
इस क्लिप में पीड़ित परिवार के लोग मुख्यमंत्री से कह रहे हैं कि हम भाजपा को वोट देते आए है, भाजपा सपोर्टर हैं।
लेकिन जब मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही की बात इस पीड़ित परिवार ने बोली तो मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को झिड़क दिया, बुरी तरह से डांट दिया और कहा भाषणबाजी मत करो।
सोचिए जरा।
किस कदर बेरहम प्रशासन, सरकार और मुख्यमंत्री हैं।
बिल्कुल जाइये @shubhankrmishra जी परिवार को कम से कम एक करोड़ की मदद भी कीजिए साथ ही एक एड्रेस मै भी बता देता हूँ पिछले चार साल से सिस्टम का मारा हुआ इंसान जिसने जिंदगी दाँव पे लगा कर देश के गद्दारो का खुलासा किया एक सच्चा देशभक्त #इसरो_वैज्ञानिक#प्रवीण_मौर्य हैँ उनके यहाँ भी चले जाइये उनका भी न्यूज़ बना दीजिए दो शब्द बोल दीजिए...
. @PTI_News
ने वीडियो को mute किया.यानी साफ़ है , अब गोदी मीडिया ही नहीं बल्कि news agencies जो सोर्स होती हैं ख़बरों का वहाँ भी आम इंसान की आवाज़ दफ्न हो जाये . और CM का ये कहना के भाषण काफी है ( फिर mute हो जाता है) दिखाता है के सत्ता में बैठे लोग अब आम इंसान की गुहार भी नहीं सुनना चाहते . ये दयनीय है
Hello @PTI_News, You first upload a video of Uttar Pradesh CM speaking to Victims family. As soon as the victims family said, "We are Pro-BJP supporters....."
CM Yogi responds with "Bhashan kaafi hai... Samvidhna....." Soon after you muted the video.
फ़ायर बिग्रेड समय से न पहुँच पाने की वजह से लखनऊ में 15 बच्चों की मौत हो गई
सरकार की नाकामी से कुम्भ में सैकड़ों हिंदुओं की जान चली गई, सरकार ने मरने वालों के आँकड़े छिपा लिए
हाथरस भगदड़ में सरकार की नाकामी से करीब 120 हिंदुओं की जान चली गई
हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल भ्रष्टाचार की वजह से गिर गया जिसमे दबकर कई मज़दूर मर गए
इतने निर्दोष नागरिकों के मरने के बावजूद किसी का इस्तीफ़ा नहीं हुआ
इस सरकार में आम आदमी के जीवन का कोई मतलब नहीं है ।
दुनियाभर के सिंधी समाज ने 200 KG चांदी की ईंटें जनवरी–2021 में राम मंदिर पहुंचकर चंपत राय बंसल को सौंपी थीं। ये ईंटें कहां हैं, आज तक कुछ नहीं पता। सिंधी समाज को इसकी रसीद तक नहीं दी गई। चंदा चोरी के बाद सिंधी समाज भी जानना चाहता है कि चांदी की ईंटें कहां गईं?
NEET लीक के चक्कर में एक महीने में लगभग 20-22 बच्चे आत्महत्या से मारे गये,
सरकार चाहे तो कह सकती है कि, "तो कौन सी बड़ी बात है?"
और सही भी है, जहाँ एक दिन में लखनऊ में एक लाइब्रेरी में आग लगती हो और 15 बच्चे जल कर ख़ाक हो जाते हैं, वहाँ महीने भर में 20-22 बच्चे मर गए हों तो कौन सी बड़ी बात है?
मुझे तो समझ नहीं आता कि इस देश में आख़िर बड़ी बात है क्या? कुछ है भी या नहीं?
❗प्रो राम पुनियानी ने RSS के धागे खोल दिए।
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पंजीयन इसलिए नहीं ताकि अपराधियों, देश विरोधियों से हाथ झटक सके।
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संघ संविधान को तो मानता ही नहीं है इसके दिल में मनु स्मृति है।
विस्तृत चर्चा की लिंक कमेंट बॉक्स में।
@rpuni