❤️।। सर्वेश्वर कृष्ण ।।❤️
यदुनंदन बोले अर्जुन से,
धैर्य को तनिक पुकारो तो,
अनकथ अब तुम्हें बताता हूं,
सत्य को पार्थ संभालो तो.
जिनकी कथाएं कहकर तू,
मुझको मर्याद सिखाता है,
त्रेता का वो राम हूं मैं,
जो परमपुरुष कहलाता है.
ब्रम्हा ने मेरी क्रीड़ा-हित,
जगत रचा नव प्रति निमेष,
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लफ़्ज़ लिखना तो बस एक बहाना था
हाल-ए-दिल तुझे जो सुनाना था
अब नहीं संभलेगा बिखरा हुआ मेरा दिल
समझाना ही था, तो पहले समझाना था
लबों को लग गई है लत तेरा नाम गुनगुनाने की
वरना सूखी वीरान ज़िंदगी में कहाँ कोई तराना था
क्यों बर्बाद करते पैसे और ज़िंदगी
जानते अगर मेरी आँख ही मयखाना था
कुछ वाक़ये हुए हैं शायर के दिल के साथ
ये दिल पैदाइशी थोड़ी शायराना था 💕
#ForeverAddicted💕
सबसे सुंदर नज़्म वो है
जो सुनाई पड़ती है तब
जब तेरे सीने पर मेरे
सिर को विराम मिलता है
हां ये नज़्म किसी मशहूर शायर की नहीं
न ही इसमें किसी संगीतकार की धुन है
ये तो प्राकृतिक ही इतनी मधुर है
जैसे माधव की बंसी की तान..❤️
आदमी कितना भी निराश हो जाए..
और उस निराशा को दूर करने के चाहे कितने ही प्रयास कर ले..
पर अंततः आराम ध्यान और हरि नाम से ही मिलता है.. वृंदावन प्यारो वृन्दावन
रंग सफ़ेद
मुझे पसंद है बहुत
इसमें बनावट नहीं होती
ये होता है निर्मल
इसकी काया भले मैली हो जाए
पर अपनी सादगी को
अपने चरित्र को
ये कभी मैला नहीं होने देता।
🤍🤍🤍