#𝗠𝗮𝗸𝗶𝗻𝗴 𝗼𝗳 “��𝗼𝘃𝗲-𝗮𝗹𝗹”
𝟮𝟱 दिन : 𝟮𝟱 क़िस्से
बस कुछ ही दिन बाक़ी हैं और 25 अगस्त को “Love-All” आपके सामने होगी. आप फिल्म देख रहे होगें...और मैं आपको देखते हुए देखूँगा. यह कैसा अनुभव होगा- मुझे कैसा लगेगा -आज कहना मुश्किल है !!
लेकिन आज मन में ��्या है – वह ज़रूर आपसे कहना चाहता हूँ – इस ‘फिल्म का बनना’ आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ. ये ‘कहानी कहाँ से आयी’ से लेकर ‘कैसे फिल्म बनी’ तक की कहानी– ‘हर दिन: एक हिस्सा- हर दिन : एक क़िस्सा’ आपसे कहूंगा. और हम पहुँच जायेंगें वहां जहां हमें फिल्म मिलेगी !
𝟮𝟱 दिन : 𝟮𝟱 क़िस्से
#1
जैसे होता है प्यार ..
𝗠𝗮𝗸𝗶𝗻𝗴 𝗼𝗳 #𝗟𝗼𝘃𝗲𝗮𝗹𝗹
1 अगस्त 23
पूछता है कोई - ये कहानी कैसे आई ....कहाँ से आई...क्या ये कहानी तुम्हारी है और मैं सोचने लगता हूँ ..खुद से पूछने लगता हूँ ...
हाँ, मैं भी कभी खेलता था. खेल की दुनिया खिलाड़ी दोस्तों की साझा होती थी. ख़ुशी आती थी...आनन्द आता था.. पीड़ा भी आती थी ..मन टूटता भी था...लेकिन खिलाड़ी नहीं !लेकिन मैदान के बाहर भी जि़न्दगी के खेल चलते हैं ...वह नज़दीक से देखा मैंने !
खेल छूट गया और मैं काम काज की दुनिया में डूब गया. लेकिन जब -जब मैदान में पसीना बहाते, भागते, एक्सरसाइज करते खिलाड़ीयों को देखता था -काँधे पर किट बैग लादे, धूल- मिट्टी, धूप को सहते -भटकते खिलाड़ीयों को – और जब- कभी उनसे आँख मिल जाती थी तो वो सपने दिख जाते थे ! और ‘वो सपने’ -मेरे सपने में ‘कहानी; बन के आते थे और मुझे जगाते थे !!
‘वो कहानी’ मैं अक्सर दोस्तों को सुनाता था, बार-बार सुनाता था. और उन्हें सुनाते हुए खुद को सुनता था. इसी तरह अपने आप ‘ये कहानी’ आयी – वैसे ही जैसे आता है प्यार !
ये कहानी है उस लड़के की जो एक खिलाड़ी था-
खेल को जीता – खेल पर मरता था !
ये कहानी है उस लड़की की जो-
उस लड़के के प्यार में चिड़िया जैसे उड़ती थी !!
और ये कहानी है उस नन्हे बच्चे की-
जिसकी आँखों में छुप छुपकर खेल के सपने जगते थे !
आज कोई पूछता है – ‘क्या ये कहानी ‘सच्ची’ है?’
मैं कहता हूँ ....
ये ‘कहानी’ है जो सच के जैसी है !!
ये ‘सच’ है जो कहानी जैसा है !
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