कोई माने या न माने,
लेकिन 17 सितंबर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ‘दीया जलाने’ का आह्वान एक तरह से जनता की मौजूदा मनोदशा को परखने की कसौटी था।
और तस्वीर उम्मीद के मुताबिक नहीं रही...
सबसे बड़ा बदलाव शायद यही है कि मोदी जी की लोकप्रियता और भाजपा के प्रति लोगों की वै��ारिक प्रतिबद्धता अब एक ही चीज नहीं रह गई है।
एक दौर था जब मोदी का नाम ही समर्थकों में ऊर्जा भर देता था। उनका हर आह्वान अभियान बन जाता था, हर नारा जनता का अपना नारा बन जाता था।
नोटबंदी से लेकर तमाम कठिन फैसलों तक...
लोगों ने असुविधाएं सहीं, आलोचनाएं झेलीं, रिश्तों तक में बहस की, लेकिन व्यक्तिगत निष्ठा कमजोर नहीं पड़ी।
आज वही तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है।
भाजपा के साथ खड़े रहने वाले लोगों की संख्या और मोदी के प्रति पहले जैसी भावनात्मक निष्ठा, इन दोनों को अब एक ही तराजू में तौलना शायद सही नहीं होगा।
और इसे केवल किसी एक जाति या वर्ग की नाराजगी कहकर खारिज करना भी आसान रास्ता होगा। अगर मामला सिर्फ एक वर्ग तक सीमित होता, तो बाकी समाज में उस आह्वान का वैसा ही उत्साह दिखाई देता, जैसा पहले देखने को मिलता था।
सवाल सिर्फ एक दिन दीया जला या नहीं जला, इसका नहीं है। सवाल उस भावनात्मक जुड़ाव का है, जो कभी मोदी जी और जनता के बीच दिखाई देता था।
भाजपा नेतृत्व के लिए शायद अब समय आ गया है कि वह केवल संगठन की मजबूती नहीं, बल्कि जनता के बदलते मनोविज्ञान को भी गंभीरता से पढ़े और भविष्य के नेतृत्व को लेकर समय रहते व्यापक मंथन करे।
क्योंकि राजनीति में सबसे बड़ा खतरा विरोधी की आवाज नहीं होती, सबसे बड़ा संकेत तब मिलता है, जब अपने ही लोग चुप हो जाएं।
आप मेरी बातों से सहमत हैं या असहमत कमेंट में बताइए 🙏
मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की घटना इस बात का एक बड़ा उदाहरण है कि भारत से बाहर सफल करियर बना चुके लोगों को किसी भी राजनेता की राष्ट्रवाद, देशभक्ति, देशप्रेम या मातृभूमि के नाम पर की गई भावनात्मक अपील से प्रभावित होकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
एक झूठा या मनगढ़ंत मामला आपके वर्षों की मेहनत से बनाए ग�� शानदार करियर को पल भर में तबाह कर सकता है। उस समय कोई राजनेता आपके पक्ष में सहानुभूति जताने नहीं आएगा, जबकि आपके खिलाफ झूठा आरोप लगाने वाले व्यक्ति से मिलने और उसके समर्थन में खड़े होने में शायद कोई देर भी न लगे।
भारतीय राजनीति में अक्सर नैतिक सरोकारों से अधिक राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जाती है। इसकी कीमत समाज चुकाता है, लेकिन राजनीति उसी कीमत को हर पाँच साल में अपने लाभ के लिए भुनाती रह��ी है।
@neha_laldas @ajeetbharti @talk2anuradha @rajputr_itihas
बेटा चीटिंग करते पकड़ा गया, शिक्षक ने समझाया कि मत करो, सस्पेंड हो सकते हो। लज्जा से आत्महत्या कर ली। बाप की चिंता यह है कि मोदी एक्ट लगवा कर तुरंत कंपनसेशन मिल जाए।
मोदी जी की सबसे सफल स्टार्ट-अप योजना मोदी एक्ट ही है। किसी को बेटी ब्याहनी है, दो सवर्णों पर मोदी एक्ट लगवाओ, फिर उन्हें कहो कि २ लाख दो तो वो पीछे ले लेंगे केस, सरकार भी पैसा देगी। कोई किडनी की पथरी का इलाज करवा रहा है।
ऐसे में मोदी जी कैसे हटा देंगे यार! IIT के प्रोफेसर का क्या है, कोई और आ जाएगा।
साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
BRICS समिट से बौखलाया पश्चिमी मीडिया, साइकिल की तस्वीर से भारत को नीचा दिख���ने का हो रहा है प्रयास
क्या ब्रिक्स को ख़ुद के लिए खतरा मानकर चल रहा है अमेरिका? पश्चिमी मीडिया क्यों चला रहा है प्रोपेगेंडा?
@Anurragmishra से जानिए विदेशी मीडिया की भारत विरोधी मानसिकता
SC ST act has become so big now that every community is being targeted by it. Large sum of money is collected just by filling and before even investigation is started.
Abhishek, who runs @Randomsena_in, is giving Ajeet a run for his money in sarcasm. Jokes aside, listen to him on how the game is played. Hindus are emotional fools and get played by a well-organised Left, Bhimtas and Jihadis every time for the same reason.
देश का प्रधानमंत्री कम,और सवर्णो का दुश्मन ज्यादा लग रहा है ?
पहला PM जो सनातनियों ने अपने दिल से बनाया और खंजर उसी सनातनियों के पीठ में मारा जातिवादी नीले प्रधानमंत्री ने 😡
इसको अब गुजरात भेजो वरना सवर्णो का सर्वनाश करके मानेगा नीला अंङा
90% झूठे केस वाले एक्ट पर नीले मोदी एक्ट ��े की 100% मेहनत।
#SCSTAct #UGCRollBack #dirtypolitics #trendingnow
धन्यवाद नेहा जी। दुर्भाग्य यही है - और मैंने वीडियो के अंतिम हिस्से में भी यही बात कही है - कि धर्मपाल जी जैसे लोगों के शोध का इस्तेमाल करने वालों ने भी शाय�� ही कभी उनका नाम लेना ज़रूरी समझा। इस किस्म की चोरी-चकारी और टप्पेबाज़ी हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं थी; मुग़लिया दौर में हमने चोरी-चकारी सीखी और ब्रिटिश काल में उस पर गर्व करना। शायद यही वजह रही कि धर्मपाल जी जैसे लोग अपना काम पूरी निष्ठा से करके भी हमेशा अनसंग ही रह गए।
Asli charcha yahan ho rahi hai Mitro.
Indepth discussion on BJP's mindset and core thinktank's cluelessness on recent CJP protest and handling of FIRs against ri*ters.
Another issue of BJP's core voters who seem miffed with strict UGC's rule which makes youth's vulnerable in college campuses. A must watch. @KARAN_author & @Sanjay_Dixit
यादव जी की तीन भैस चोरी हो गई, ��िसके बाद यादव जी ने चोरों पर केस दर्ज किया!
फिर क्या चोरों ने उल्टा यादव जी पर ही SC ST Act अर्थात (मोदी एक्ट) और छेड़कानी का मुकदमा दर्ज करा दिया।
यादव जी केस वापस लेने के लिए मजबूर हो गए ..
भाजपा नहीं आयी तो सोच लेना सवर्णों कॉंग्रेस आ जाएगी 🤡
ME -- आजाने दो तुम भी प्रताडित करते हो वो भी करेंगे पीठ पीछे वाले दुश्मन से लाख गुना अच्छा सामने वाला दुश्मन होता
चिंता तुम अपनी करो भाजपाइयों कॉंग्रेस आएगी तो तुम्हारा क्या होगा 😂
लोग चीखते रहे कि नेहा सिंह राठौर देशविरोधी बयान दे रही हैं, गिरफ्तार करो। भाजपा की केंद्र सहित लगभग 20 राज्यों में सरकार है, लेकिन आज तक गिरफ्तार नहीं हुईं।
अमित यादव आए दिन ब्राह्मणों और देवी-देवताओं को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ करता है और खुलकर चुनौती देता है। हर रोज गिरफ्तारी की मांग होती है, लेकिन आज तक गिरफ्तार नहीं हुआ।
ऐसे अनेक भीमवादी, सूरज बौद्ध, रवि परमार, लखन मीणा सहित अनेक लोग हैं, जिनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की मांग होती रही, लेकिन सरकार इनके अकाउंट तक प्रतिबंधित नहीं कर सकी।
लेकिन नूपुर शर्मा, मोनू मानेसर, दक्ष चौधरी सहित तमाम लोगों को भाजपा ने विरोधियों के दबाव में जेल भेज दिया। जिनका अपराध केवल हिंदूहित में बयान देना या किसी के गलत बयान का प्रतिकार करना था।
यही स्वतंत्र भारद्वाज के साथ हुआ। मैं उसके बयान या कृत्य का समर्थन नहीं करता, लेकिन सवाल यह है कि एक ही अपराध दो लोगों ने किया तो एक जेल चला गया और दूसरा बाहर घूम रहा है। जानते हैं क्यों?
क्योंकि यह देश अब कानून से नहीं, भीड़ देखकर निर्णय ले रहा है। भाजपा आंबेडकरवाद और वामपंथियों के दबाव में फंसती जा रही है।
पहले तिलचट्टों के आगे सरेंडर किया और अब इन गुंडे-बदमाशों ने थाना घेर लिया तो तीन महीने पुराने मामले में संगीन धाराएँ जोड़ते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।
यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं है।
यह आने वाली भयानक स्थिति का पूर्व संकेत है।