जौनपुर
➡जौनपुर के रोहित यादव ने नीरज चोपड़ा को पछाड़ा
➡रोहित बने दुनिया के नंबर दो भाला फेंक खिलाड़ी
➡25 साल उम्र, देश में नंबर एक-दुनिया में नंबर दो
➡नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मिली कामयाबी
➡चैंपियनशिप के अंतिम दिन 87.05 मीटर भाला फेंका
➡जापान में होने वाले एशियन गेम्स में भी क्वालिफाई
➡14 साल की उम्र में बांस के डंडे से करते थे अभ्यास
➡वर्ल्ड रैंकिंग में श्रीलंका के थरंगा पाथिरागे पहले पर
➡नीरज चोपड़ा 85.69 मीटर के साथ चौथे स्थान पर
➡जिले के गांव अदारी डभिया के रहने हैं रोहित
#Jaunpur #NeerajChopra #SportsNews
पता तो इंडिया टुडे ग्रुप को भी है कि भाजपा डाकुओं का गिरोह है और अमित शाह गब्बर।
बस लिखने से डरते हैं। आख़िर ये भी पचास कोस के अंदर ही रहते हैं।
पता नहीं कैसे इस बार दिल की बात ज़ुबान पर आ गई।
गब्बर कहीं अपने नमक खाने वालों को गोली ना मार दे इस वीडियो के बाहर आने के बाद।
सौरभ भारद्वाज ने कहा, सीएम रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में खूब भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने कहा, यह भ्रष्टाचार का अविश्वसनीय स्तर है।
@Editor_SanjayS@Iam_SimranKhan
जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई @yadavakhilesh जी।
PDA की हिस्सेदारी से सामाजिक न्याय का संकल्प हम मिल कर पूरा करेंगे। अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए शुभकामनाएं।
जिस योग केंद्र से मिली थी नकदी, वहीं मिला रहस्यमय बक्सा... आखिर किसका?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार तेज हो रही है। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ल जिस योग केंद्र में रहता था, वहां 'राम राज्य कोश' नाम का एक रहस्यमयी दान बक्सा मिला, जिस पर Paytm QR कोड भी लगा हुआ था। QR स्कैन करने पर 'राम राज्य कोश' में भुगतान का विकल्प दिखाई दिया, जिससे कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस पहले ही इस योग केंद्र से छापेमारी के दौरान करीब ₹5 लाख नकद बरामद कर चुकी है। घटना के बाद योग केंद्र ने अविनाश और उसके भाई अभिषेक को परिसर से बाहर कर दिया। पुलिस अब इस दान बक्से और बरामद नकदी के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। देखिए, अयोध्या से हमारे संवाददाता @isamarths की ये खास रिपोर्ट।
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बुलंदशहर : भारत समाचार की खबर का बड़ा असर
➡खबर का DM कुमार हर्ष ने लिया संज्ञान
➡सिकंदराबाद तहसील में भ्रष्टाचार मामला
➡भ्रष्टाचार मामले पर की बड़ी कार्रवाई
➡सिकंदराबाद SDM दीपक पाल पर गिरी गाज
➡उप जिलाधिकारी न्यायिक सदर बनाया गया
➡दिनेश चंद्र बने उप जिलाधिकारी सिकंदराबाद
➡सिकंदराबाद विधायक ने जताई थी नाराजगी
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अयोध्या : राम धन गबन की जांच में बड़ा खुलासा
➡️आरोपी अविनाश शुक्ला के घर छापेमारी
➡️छापेमारी में चौंकाने वाली बरामदगी हुई
➡️रामराज्य कोष लिखा संदूक बरामद हुआ
➡️संदूक पर Paytm का QR कोड चिपका मिला
➡️राम भक्तों से धन वसूली की आशंका
➡️ऑर्गेनाइज्ड गैंग की भूमिका पर गहरा शक
➡️जेल में बंद आरोपी है आरोपी अविनाश शुक्ला
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13 साल की बच्ची, 32 आरोपी और गैंगरेप... जिन-जिन होटलों में मासूम से हुई दरिंदगी, उन पर चला बुलडोजर
राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 साल की बच्ची से गैंगरेप के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. जिन होटलों में बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न हुआ था, उन पर देर रात बुलडोजर चला दिया गया. पुलिस अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि मामले की जांच जारी है.
पूरी ख़बर- https://t.co/YxcYQevjgE
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जब दौर अँधेरों का हो, तब नाम उम्मीद का होता है।
सियासत में जब कामयाबी की पहली शर्त क्रूरता, निर्ममता, अवसरवाद और नैतिक समझौते बन जाएँ; तब भी कोई अपनी सहृदयता, सौम्यता, वैचारिक प्रतिबद्धता और मानवीय संवेदनाओं से राजनीति के नए प्रतिमान गढ़ दे, तो वही असल जननायक होता है। जिस दौर में अधिकांश सियासतदाँ या तो बिक रहे हों, या झुक रहे हों, या डर रहे हों; उस दौर में जो संविधान, सामाजिक न्याय और समाजवाद के पक्ष में तनकर खड़ा रहे, वही समय की सबसे बड़ी उम्मीद बनता है।
हर दौर एक उम्मीद चुनता है।
निजी तौर पर मुझे बीते कुछ वर्षों में अखिलेश यादव जी को थोड़ा क़रीब से देखने और समझने का अवसर मिला। आज जब उनके नेतृत्व की चर्चा हर ओर है, तब यह याद रखना चाहिए कि एक समय ऐसा भी था जब उनके राजनीतिक भविष्य पर संदेह किया जाता था और उनकी वैचारिक दिशा पर भ्रम फैलाया जाता था। मगर भीतर ही भीतर एक नये अखिलेश तैयार हो रहे थे। वे किताबें पढ़ रहे थे, समाज के दुःख-दर्द को आत्मसात कर रहे थे, विपक्ष में रहते हुए हर दिन कुछ नया सीख रहे थे और सामाजिक न्याय की विचारधारा को अपने राजनीतिक व्यक्तित्व का स्थायी आधार बना रहे थे। ऐसे निहायत विपरीत हालात में हर दिन जननायक अखिलेश बन रहे थे।
जो संघर्ष से निकला हो, वही भरोसा बनता है।
हमने देखा कि भारतीय राजनीति के सबसे कठिन और विषम दौर में भी उन्होंने न अपना धैर्य खोया और न अपना विचार। अपमान का उत्तर कटुता से नहीं, बल्कि अपने काम और दृष्टि से दिया। गालियों का जवाब मुस्कुराहट, ह्यूमर और शालीनता से दिया। साथ छोड़ देने वालों के बीच भी उन्होंने संयम नहीं छोड़ा। निहायत विपरीत हालातों की तपिश में तपकर जो व्यक्तित्व आकार लेता है, वही लंबे समय तक समाज का विश्वास अर्जित करता है। आज जो अखिलेश हमारे सामने हैं, उन्होंने ऐसे ही ख़ुद को नया गढ़ा है।
सत्ता बदलने से बड़ा है, राजनीति का चरित्र बदलना।
इसीलिए PDA को केवल चुनावी समीकरणों से उपजा राजनीतिक नारा मानना उसकी वैचारिक शक्ति को कम करके आँकना होगा। PDA कोई समीकरण नहीं, समाज का स्वाभाविक विस्तार है। यह उन करोड़ों वंचित, पिछड़े, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और मेहनतकश लोगों की आकांक्षाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति है, जो प्रतिनिधित्व, सम्मान, साझेदारी और संवैधानिक अधिकारों के साथ अपना भविष्य देखना चाहते हैं। यह केवल चुनाव जीतने की रणनीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की राजनीति को नए समय की भाषा देने का प्रयास है।
जो पीछे छूट गए थे, अब वही इतिहास लिखेंगे।
आज जब भारतीय राजनीति अनेक स्याह रास्तों से गुजर रही है, तब यदि कहीं लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और भाईचारे की नई रोशनी दिखाई देती है, तो वह अखिलेश यादव के नेतृत्व में दिखाई देती है। बाबा साहब डॉ. आंबेडकर से लेकर डॉ. राममनोहर लोहिया, महात्मा फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, कर्पूरी ठाकुर, जगदेव प्रसाद, गाडगे बाबा, मान्यवर कांशीराम, मंडल आंदोलन, अवंतीबाई लोदी, ऊदा देवी पासी और फूलन देवी जैसी परिवर्तनकारी परंपराओं से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने वाला यह नेतृत्व नई पीढ़ी के लिए केवल एक राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि एक वैचारिक विश्वास बन चुका है।
आगामी 2027 का चुनाव केवल सरकार बनाने का चुनाव नहीं होगा। यह संविधान, लोकतंत्र और भारत की राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक मोड़ भी होगा। ऐसे समय में यदि करोड़ों लोगों की उम्मीद किसी नेतृत्व पर जाकर ठहरती दिखाई देती है, तो इसलिए कि इतिहास अंततः उन्हीं का साथ देता है, जो कठिन समय में भी अपने विचार से समझौता नहीं करते।
जन के तमग़े से सुसज्जित 'जननायक' @yadavakhilesh जी को जन्मदिन की क्रांतिकारी शुभकामनाएँ। आपका संघर्ष, आपका धैर्य और आपकी वैचारिक प्रतिबद्धता सामाजिक न्याय, संविधान और लोकतंत्र की इस यात्रा को और अधिक मज़बूती दे - इसी मंगलकामना के साथ।
रामधन लूट में ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल गैंग का बड़ा सुराग! अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच जेल में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला के घर छापेमारी में चौंकाने वाली बरामदगी हुई है। पुलिस को वहां से ‘रामराज्य कोष’ लिखा एक संदूक मिला, जिस पर Paytm का QR कोड भी चिपका था। इससे आशंका और गहरी हो गई है कि भक्तों से रामधन की वसूली और लूट का एक ऑर्गेनाइज्ड क्रिमिनल गैंग सक्रिय था।
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बाथरूम में छिपाते थे पैसे, निकालने की ये थी ट्रिक... चढ़ावा चोरों ने पूछताछ में सब कबूला
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पूछताछ के दौरान कई नए दावे सामने आए हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी कैमरों की लोकेशन जानकर कैश निकालते थे और पहले उसे बाथरूम में छिपाकर बाद में बाहर ले जाते थे. जांच अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों, आय-व्यय, गणना कक्ष के कर्मचारियों और पूरे दान प्रबंधन सिस्टम तक पहुंच गई है. पुलिस मामले के हर पहलू की पड़ताल कर रही है.
पूरी खबर : https://t.co/GmEWje1LON
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चढ़ावा गिनने वाले करोड़पति हो गए, चढ़ावा चढ़ाने वालों के बच्चे बेरोजगार रह गए. बेचारे दुःखी होकर मंदिर लुटते देख रहे हैं.
सभी जानते हैं कि चंदाचोरों का असली बॉस कौन है, लेकिन नाम लेने में डर रहे हैं. क्या यही दिन दिखाने के लिए वोट माँगे गए थे?😕
नितिन गडकरी जी, आपकी इथेनॉल नीति आम जनता की जेब पर भारी पड़ रही है! 3.5 साल पुरानी Skoda Slavia का फ्यूल पंप इस नए ईंधन के कारण खराब हो गया। सर्विस स्टेशन पर रोज़ ऐसे 6-7 मामले आ रहे हैं। क्या बिना किसी रिसर्च के आम कार मालिकों को 'गिनी पिग' बनाकर यह नीति थोप दी गई? इस आर्थिक नुकसान का ज़िम्मेदार कौन है @nitin_gadkari जी??