15 नवम्बर 1948 को प्रो. के. टी. शाह ने जी संशोधन प्रस्तुत किया उसमें समाजवाद एवं सेक्यूलर दोनों थे।
पर इसे डा. भीमराव अम्बेडकर जी और संविधान निर्मात्री सदस्य के किसी भी सदस्य ने स्वीकार नहीं किया।
डा. अम्बेडकर आने वाली पीढ़ी को आर्थिक विचारधारा में नहीं बाँधना चाहते थे