आज मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा क्षेत्र-22 से हमारे प्रत्याशी, राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य भाई दामोदर यादव जी के समर्थन में आयोजित विशाल जनसभा में उमड़े जनसैलाब को संबोधित किया। दतिया की सम्मानित जनता से अपील की कि वे "केतली" चुनाव चिन्ह के सामने वाला बटन दबाकर भाई दामोदर यादव जी को भारी मतों से विजयी बनाएं।
मुझे केवल आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि दतिया की सम्मानित जनता अपना अमूल्य मत और आशीर्वाद देकर भाई दामोदर यादव जी को प्रचंड बहुमत से विजय दिलाएगी।
जनसभा में उपस्थित सम्मानित नागरिकों, पार्टी के समर्पित पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सभी समर्थकों का हृदय से आभार।
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आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के इटावा जिला उपाध्यक्ष छोटे भाई सुधीर आजाद के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है।
मन स्तब्ध है। एक समर्पित, कर्मठ और ऊर्जावान साथी के असामयिक निधन से बहुजन समाज और संगठन को अपूरणीय क्षति हुई है।
शोकाकुल परिवार एवं सभी मित्रों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं। प्रकृति उन्हें और हम सभी को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
बलिया जनपद के रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट लाल टोला निवासी आदिवासी समाज के कामजी गोड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद और चिंताजनक है।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान की गई पिटाई से उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
शोकाकुल परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं। प्रकृति उन्हें यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कोड़ा में किसान मोतीलाल कुशवाहा जी पर गोली चलाने की घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है।
पीड़ित किसान के अनुसार, कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग और उसके साथियों द्वारा गरीब किसानों की जमीनें हथियाने की शिकायत को लेकर ज्ञापन देने पर उन पर गोली चलाई गई। यह घटना कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51, शालिग्राम गर्ग का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। कुछ समय पूर्व एक दलित परिवार की शादी में उत्पात मचाने और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटना प्रमुख हैं। उस मामले की जांच अभी भी जारी है। यदि उस मामले में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता था।
हम @MP_MyGov से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराई जाए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध उसकी सामाजिक, धार्मिक या राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
किसी भी किसान को भय, हिंसा या दबाव के बल पर अपनी जमीन छोड़ने के लिए विवश करना अस्वीकार्य है।
हम घायल किसान मोतीलाल कुशवाहा जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं और आशा करते हैं कि उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।
बरेली के थाना भमोरा क्षेत्र में भीम आर्मी के ब्लॉक अध्यक्ष, प्रेम शंकर दिवाकर पर हुआ जानलेवा हमला कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
पीड़ित के अनुसार, 11 जुलाई से ही उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं। इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
12 जुलाई की शाम जब प्रेम शंकर ने धमकी का कारण पूछने का प्रयास किया, तो आरोपी ने उनके साथ गाली-गलौज की। इसके बाद आरोपी अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और प्रेम शंकर पर हमला कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी ने उनका गला दबाकर हत्या का प्रयास किया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन केवल समझाने-बुझाने की बात कहकर चली गई।
13 जुलाई की सुबह पीड़ित पक्ष पुलिस चौकी पहुंचा, जहां उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया गया। लेकिन चौकी से लौटते समय आरोपी अपने एक अन्य साथी के साथ चाकू और तमंचा लेकर पहुंचा तथा प्रेम शंकर पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में उनके हाथ, सीने, नाक और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं तथा गोली मारने का भी प्रयास किया गया। किसी तरह उन्होंने अपनी जान बचाई। वर्तमान में प्रेम शंकर जिला अस्पताल में भर्ती हैं और उनका उपचार जारी है।
पीड़ित का आरोप है कि पहले से शिकायत दिए जाने के बावजूद पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण यह गंभीर घटना हुई। साथ ही उनका कहना है कि अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे पीड़ित एवं उनके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए, सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, पीड़ित एवं पीड़ित एवं उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए तथा यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी से आज मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। साथ ही आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया तथा उनके लोकतांत्रिक संघर्ष के प्रति अपना समर्थन एवं एकजुटता व्यक्त की। आंदोलन में पहुँचे भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सभी साथियों का आभार।
केन–बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी पिछले कई वर्षों से उचित मुआवज़े, सम्मानजनक पुनर्वास और अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस वर्ष अप्रैल में भी प्रभावित परिवारों ने आंदोलन किया था। तब प्रशासन द्वारा समझा-बुझाकर आंदोलन समाप्त करा दिया गया था, लेकिन मांगें पूरी न होने के कारण अबकी बार वे आखिरी तक लड़ने के जज़्बे के साथ आंदोलन के 14वें दिन भी चिता सत्याग्रह, जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह तथा प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह के माध्यम से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ उठाने पर उन्हें शासन-प्रशासन द्वारा तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है।
आंदोलनकारी आदिवासियों का आरोप है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के घरों को बिना पर्याप्त पूर्व सूचना ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही मुआवज़े के निर्धारण और वितरण में अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए हैं।
उनका यह भी कहना है कि उन्हें दिया जा रहा मुआवज़ा वास्तविक नुकसान की तुलना में बेहद अपर्याप्त है। इस राशि से न कहीं और सम्मानजनक ढंग से बसना संभव है, न रहने के लिए घर की समुचित व्यवस्था हो सकती है, न आजीविका का स्थायी साधन जुटाया जा सकता है और न ही बच्चों की शिक्षा एवं परिवार के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि जिन स्थानों पर उनका पुनर्वास किया गया है, वहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने अपने अस्तित्व और भविष्य का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
यदि विकास के नाम पर लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन, घर, आजीविका और सामाजिक जीवन से विस्थापित किया जाता है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को न्यायपूर्ण एवं पर्याप्त मुआवज़ा, सम्मानजनक पुनर्वास, मूलभूत सुविधाओं से युक्त पुनर्वास स्थल, वैकल्पिक आजीविका तथा कानून के अनुरूप सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाएँ।
मैं शीघ्र ही अपने इन परिवारों से मिलने उनके बीच जाऊँगा। मेरा वादा है कि उनकी आवाज़ बनकर इस पूरे मामले को लोकसभा में पूरी मजबूती के साथ उठाऊँगा।
@MP_MyGov को आंदोलनरत आदिवासी परिवारों के साथ संवेदनशीलता और गंभीरता से संवाद कर उनकी जायज़ मांगों का शीघ्र समाधान करना चाहिए। विकास तभी सार्थक है, जब वह न्यायपूर्ण, पारदर्शी, सहभागी और मानवीय हो; न कि आदिवासियों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की कीमत पर।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में समर्थ पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी के कारण मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ हुआ अन्याय अत्यंत निंदनीय और अस्वीकार्य है।
बेहतर रैंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को निजी कॉलेज और कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को सरकारी कॉलेज आवंटित होना पूरी प्रवेश प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यदि छात्रों की मेहनत और योग्यता का सम्मान नहीं होगा, तो शिक्षा व्यवस्था पर से युवाओं का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, युवाओं के भविष्य को भाजपा की विफल प्रयोगशाला के प्रयोगों की भेंट मत चढ़ाइए।
@UPGovt इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय करे। जिन विद्यार्थियों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें उनकी मेरिट और वरीयता के अनुसार तत्काल कॉलेज आवंटित किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र का शैक्षणिक भविष्य तकनीकी लापरवाही की भेंट न चढ़े।
जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई का आदेश मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सांप्रदायिक राजनीति की पराकाष्ठा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की 'बुलडोजर कार्रवाई' पर कई बार फटकार के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार इस तरह की कार्रवाइयों से बाज नहीं आ रही है।
जौहर विश्वविद्यालय के मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रशासनिक स्तर पर यह आदेश पारित किया गया है। प्रशासनिक आदेश न्यायालय के अंतिम निर्णय का विकल्प नहीं हो सकता। यदि विश्वविद्यालय इस आदेश से असहमत है, तो उसे सक्षम न्यायालय में अपनी बात रखने और न्याय प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। ऐसे में अंतिम न्यायिक निर्णय से पहले किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना होगी।
विडंबना यह है कि यूजीसी द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, प्रयागराज, गौतम बुद्ध नगर और राजधानी लखनऊ तक के संस्थान शामिल हैं, लेकिन उन पर कठोर कार्रवाई के बजाय एक स्थापित विश्वविद्यालय को बुलडोजर के निशाने पर खड़ा किया जा रहा है। यह सरकार की मंशा और दोहरे मापदंडों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
@UPGovt से हमारी मांग है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, विश्वविद्यालय को सभी वैधानिक एवं न्यायिक उपाय अपनाने का पूरा अवसर दिया जाए तथा न्यायालय के अंतिम निर्णय का सम्मान किया जाए।
लखनऊ के अम्बेडकर नगर, मवैया में दशकों से निवासरत परिवारों के मकानों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तत्काल रोकने एवं मानवीय आधार पर न्यायोचित समाधान सुनिश्चित किए जाने के संबंध में माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी को पत्र लिखा।
@RailMinIndia
रंगभेद, नस्लभेद व साम्राज्यवाद के खिलाफ आजीवन संघर्षरत रहे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित भारत रत्न नेल्सन मंडेला जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
#NelsonMandelaDay
लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को सादा कपड़ों में पहुँचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों के साथ भी यही हुआ। देश का गौरव बढ़ाने वाली महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया। अब सोनम वांगचुक जी के सत्याग्रह के साथ भी वही व्यवहार किया जा रहा है।क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया?
हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सोनम वांगचुक जी को उत्तम स्वास्थ्य, शक्ति और दीर्घायु प्रदान करे।
#SonamWangchuk
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह नगीना लोकसभा वाला जिला बिजनौर है। यहाँ आते ही उन्हें भी परम पूज्य बाबा साहेब न केवल याद आ जाते हैं बल्कि पूजनीय भी लगने लगते हैं, जिनके वैचारिक पूर्वजों ने उनके जीते-जी उनकी शव यात्रा निकाली थी।
योगी आदित्यनाथ जी, आप उसी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं जहाँ दलितों पर अत्याचार के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज होते हैं और यह मैं नहीं, NCRB का डेटा कहता है। एक उपलब्धि आपकी जरूर है कि अब पीड़ितों से मिलने जाने और उनका दुख बाँटने पर भी आपने रोक लगा दी है।
आपके ही राज में हाथरस की बेटी को उसकी मृत्यु के बाद आधी रात को आपकी पुलिस द्वारा टायरों के बीच जला दिया गया और आज तक भी उसके परिवार को न्याय नहीं मिला। जो वादे आपने किए थे, वे तो उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी आज तक पूरे नहीं हुए।
आपने उन चार मेडिकल कॉलेजों (जालौन, सहारनपुर, उन्नाव और अंबेडकरनगर) में दलितों के कल्याण के लिए स्पेशल कंपोनेंट के तहत आरक्षित 70% सीटों को SC/ST समाज के विद्यार्थियों के लिए आज तक पुनः शुरू नहीं किया। परिणामस्वरूप, इस वर्ष भी SC/ST समाज के अनेक बच्चे इस व्यवस्था से वंचित रह गए।
69,000 शिक्षक भर्ती में हुए पिछड़ा वर्ग आरक्षण घोटाले के पीड़ित, जिनसे आपने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वयं न्याय का वादा किया था, आज 2027 आने को है, फिर भी न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
SC/ST और पिछड़ा वर्ग के बैकलॉग पदों पर भर्ती सालों से अटकी पड़ी है, लेकिन आपकी सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है।
परम पूज्य बाबा साहेब ने शिक्षा को शेरनी का दूध बताया था, लेकिन विडंबना यह है कि आपके शासनकाल में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक सरकारी विद्यालय बंद किए गए। क्या यही परम पूज्य बाबा साहेब के शिक्षा संबंधी विचारों का सम्मान है?
आए दिन प्रदेश के किसी न किसी हिस्से में सफाईकर्मियों को मात्र 8,500 रुपये मानदेय भी कई-कई महीनों तक नहीं मिलने के कारण आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ता है।
सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सफाईकर्मियों की मौतों के मामलों में भी उत्तर प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है, फिर भी आज तक उन्हें सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जा सका।
जनवरी में जारी होने वाली आवास योजना की दूसरी किस्त आज तक जारी नहीं की गई। बारिश का मौसम आ चुका है, लेकिन दलित, वंचित और गरीब परिवार आज भी अधूरे मकानों में रहने और बारिश से बचने के लिए एक सुरक्षित छत की तलाश करने को मजबूर हैं।
आपकी सरकार में दलितों को पूर्ववर्ती सरकारों में मिले जमीन के पट्टों पर भी भू-माफियाओं ने सरकारी तंत्र की मिलीभगत से कब्जा कर लिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी आपने SC/ST कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ आज तक नहीं दिया।
देश और प्रदेश की जनता सब देख रही है कि आपकी सरकार परम पूज्य बाबा साहेब के विचारों का सम्मान करती है या केवल उनके नाम का राजनीतिक उपयोग।
और हाँ... जय भीम! जय-जय जय-जय जय भीम!!
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए झूठ बोलने की भी एक सीमा होती है। सच्चाई यह है कि 12 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ मैंने खुलकर आवाज़ उठाई थी और भारत सरकार से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन आपकी पार्टी की केंद्र सरकार तब भी चुप्पी साधे बैठी रही।
इसके बाद 20 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के युवक दीपू चंद्र दास की लिंचिंग और निर्मम हत्या के खिलाफ भी मैंने आवाज़ उठाई तथा भारत सरकार से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की अपील की।
इतना ही नहीं, 31 दिसंबर 2025 को मैंने माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi जी को पत्र लिखकर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ती हिंसा के मुद्दे पर विशेष संसदीय सत्र बुलाने की मांग भी की।
इसके बावजूद फ़रवरी 2026 में जब माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए, तब भी वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें दलित समुदाय के लोग भी शामिल हैं, पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे पर कोई टिप्पणी तक नहीं की। केंद्र सरकार की इस चुप्पी पर आपकी ओर से भी कभी कोई सवाल नहीं उठा, लेकिन आरोप मुझ पर लगाए जा रहे हैं। खैर, जब राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों पर भी आपकी सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी, तो बांग्लादेश में हिंदुओं और विशेषकर दलितों पर हुए अत्याचार के मुद्दे पर आपसे क्या ही उम्मीद की जा सकती हैं।
10, विधानसभा मार्ग, लखनऊ स्थित बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर महासभा एवं अस्थि कलश स्थल को हटाने की बार-बार साजिश रचने वालों को मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं कि अन्याय के खिलाफ कौन खड़ा होता है। मेरा स्पष्ट सिद्धांत है — अत्याचार किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के व्यक्ति पर हो, मैं हर हाल में उसके खिलाफ आवाज़ उठाऊँगा।
केन–बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी समुदाय पिछले कई वर्षों से उचित मुआवज़े, सम्मानजनक पुनर्वास तथा अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है। इसी वर्ष अप्रैल में भी प्रभावित परिवारों ने आंदोलन किया था। उस समय प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार और समाधान का आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करा दिया था, लेकिन वादे पूरे नहीं किए गए।
इसी कारण प्रभावित परिवार इस बार अंतिम दम तक लड़ने के संकल्प के साथ आंदोलनरत हैं। आंदोलन के 17वें दिन भी वे चिता सत्याग्रह, जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह तथा प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। उनकी न्यायोचित मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करने के बजाय प्रशासन द्वारा आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त करने का प्रयास भाजपा सरकार की बहुजन और आदिवासी समाज के अधिकारों के प्रति असंवेदनशील सोच को दर्शाता है।
शांतिपूर्ण जनआंदोलन को पुलिस बल के सहारे दबाने का प्रयास लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास स्थित समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आईएएस-पीसीएस प्री एग्जामिनेशन सेंटर छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों को अवैध बताकर जबरन छात्रावास खाली कराना, कमरों के ताले तोड़ना तथा बिजली-पानी काटना एनडीए सरकार की बहुजन विरोधी मानसिकता का एक और उदाहरण है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2024 में प्रवेश लिया था तथा 13 सितंबर 2024 को उन्हें छात्रावास आवंटित किया गया। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय ने छात्रावास में नए प्रवेश की प्रक्रिया ही नहीं कराई और न ही नए आवेदन आमंत्रित किए। ऐसे में छात्रों का कहना है कि उनका आवंटन सितंबर 2026 तक वैध है।
बांग्लादेश में दलितों की दिखावटी चिंता करने वाले मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, क्या इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी छात्रों के साथ हो रही ज्यादती आपको दिखाई नहीं देती?
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि छात्रों का उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए, छात्रावास की बिजली-पानी की व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए, वर्ष 2025 से लंबित छात्रावास प्रवेश प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
दलित, आदिवासी और पिछड़े समाज के छात्रों की शिक्षा और सम्मान पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
@UoA_Official
मैं देश के हर युवा साथी को भरोसा दिलाता हूँ कि न यह मुद्दा खत्म हुआ है और न ही यह आंदोलन।
आपका भाई हर कीमत पर आपके साथ खड़ा है। संसद से लेकर सड़क तक, इस लड़ाई को पूरी जिम्मेदारी, पूरी मजबूती और पूरी प्रतिबद्धता के साथ पहले भी लड़ी है और आगे भी पूरी ताकत के साथ लड़ूँगा। मैं केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि आपका भाई हूँ। आपके अधिकार, सम्मान और भविष्य की इस लड़ाई में आख़िरी दम तक आपके साथ रहूँगा।
साथ ही मैं दिल्ली पुलिस से भी अपील करता हूँ कि इन मासूम, पढ़ने-लिखने वाले युवाओं पर लाठियाँ चलाकर अपनी वर्दी को दागदार न करें। ये बच्चे भी इसी देश के भविष्य हैं और किसी न किसी पुलिसकर्मी, किसान, मजदूर या आम परिवार के घर से ही निकले हैं। स्थिति को संवेदनशीलता, धैर्य और कानून के दायरे में रहकर संभालिए। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
वार्ता के बजाय दमन का रास्ता अपनाने से बात बनती नहीं, बल्कि बिगड़ती है।
मैं सभी युवा साथियों से भी अपील करता हूँ कि हर परिस्थिति में शांति, संयम और अनुशासन बनाए रखें। किसी भी उकसावे या अफवाह में न आएँ। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता, हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष और संविधान पर हमारा विश्वास है।
हम लड़ेंगे, डटकर लड़ेंगे, लेकिन संविधान और लोकतंत्र के रास्ते पर चलकर अपने अधिकार लेकर रहेंगे।
जय भीम! जय संविधान!