आजादी जिंदाबाद...
स्वघोषित, स्वयंभू टाइप समाज में वैमनस्य और नफरत पैदा करने वाले लोग आपसे उम्मीद करेंगे कि आप उनके मन-मुताबिक चलो। जैसी उनकी सोच, जो उनको पसंद है वो ही बात करो। वो दिन को अगर रात कहें तो आप भी रात कहो। फिर यह तो चुनाव का टाइम है। मीडिया में स्वतंत्र रूप से काम करने वालों को टारगेट किया जा रहा है। मित्रो, बड़ा मुश्किल समय है। आपको आपके एक ही ट्वीट से जज कर लिया जाएगा और लोग अपना लठ्ठ लेकर आपके पीछे दौड़ पड़ेंगे। ऐसे खुद को सामाजिक तत्व बताने वाले असामाजिक तत्व आपको हर खेमे में मिलेंगे लेकिन इनसे घबराकर अपनी राह थोड़े ही छोड़ी जाती है। सच की राह सदैव ही कठिन रही है, आज भी कठिन ही है और कठिन ही रहेगी। ये ताकतें पहले सिर्फ जमीन पर काम करती थीं, अब सोशल मीडिया पर हावी हैं। मैं इस मंच से किसी के भी मन-मुताबिक चलने से साफ इनकार करता हूं। आजादी मेरे लिए सर्वोपरि है और सर्वोपरि ही रहेगी। आजादी की कीमत चुकानी पड़ती है और मैं इसके लिए हमेशा तैयार हूं।
इस राह के हर राही का स्वागत, अभिनंदन
ओल्ड इज़ गोल्ड
पुराने जमाने में घर के बाहर बैठे बड़े-बुजुर्ग मार्ग से गुजरने वाले अजनबी/अनजान लोगों से पूछते थे/टोकते थे कि कोडा को छ (कहाँ का है) कुण को छ ( किसका है यानि परिवार के बारे में), कोड जा रह्यो छ ( कहाँ जा रहा है), कांई काम सूँ जा रह्यो छ ( किस काम से आया है) । इससे संदिग्ध प्रवृत्ति, अपराधी किस्म के लोगों की गतिविधियों पर रोकथाम रहती थी। उसे फिर से पुनर्जीवित कीजिए।
-रवि शर्मा, सीओ निवाई
ऐसी लापरवाही तो किसी की हत्या करने के बराबर है
डॉक्टर को धरती पर भगवान माना गया है, और इस तरह की लापरवाही की किसी भी डॉक्टर से उम्मीद नहीं की जा सकती
ये तो महापाप की श्रेणी में आएगा
ये बहन जी क्या ही समझा पाएंगी भैरा राम को
भैराराम को राजनीति विज्ञान के साथ साथ भूगोल का भी पूरा ज्ञान है
ज्ञान के देवता इनसे ही ज्ञान प्राप्त करते हैं
फिर पूरी दुनिया को ज्ञान बांटते हैं
प्रिय गोलू , @JATbera1
किसी विषय का ज्ञान रखना और उसका प्रसारण अलग बात है जबकि प्रतिभागी होना वर्जित है जो संधारित नियम और नियमावली के अधीन वैविध्य रखता हो।
क्रिमिनोलॉजी पठनीय तो है लेकिन क़ानून के इतर या आदर्श आचार संहिता से परे उसकी प्रक्रियाओं में भाग लेना विधि विशेषज्ञता नहीं अपराध की श्रेणी में गिना जाता है।
Sexology पठनीय होने के साथ साथ जागरूकता का अंश लिए हुए है लेकिन क़ानून के इतर ना सामग्री प्रसारण की अनुमति है और न उसकी प्रक्रियाओं में भाग लेने की निर्बाधता !
आदर्श आचार संहिता नागरिकों के साथ साथ लोक सेवकों को इसलिए प्रदान की गई ताकि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन उन्हें प्रदत्त दायित्वों के अधीन रहकर कार्यपालिका की मशीनरी को लोक कल्याणकारी राज्य की दिशा में काम करते हुए दिखा सकें।
राजनीतिक विज्ञान विषय के अध्यापक को क़ानून सम्मत आदर्श आचार संहिता जो लोक सेवा पुस्तिका में दर्ज है यह क़तई अधिकार नहीं देती कि वह कार्यपालिका के आदेशों के अलावा राजनीतिक गतिविधियों में व्यक्तिगत हितों का हिमायती बने।
पत्रकारों की तुलना शिक्षक से किया जाना ही बेमानी है वे किसी भी सरकार की किसी आचार संहिता से बँधे हुए लोक सेवक नहीं है ना ही किसी
सरकारी पारितोषिक के कानूनन भागी हैं।
लेकिन फिर भी मैं तुम्हारी हर उस मूर्खता और अल्पज्ञता की हिमायती हूँ जिसे तुम लपक कर हर तीसरे दिन छू लेते हो क्योंकि मैं जानती हूँ तुम हमेशा से ऐसे ही थे बिल्कुल मौलिक,गोलू और भोले।
तुमने समय समय पर यह साबित किया है बताया कि व्यक्ति को अपनी मौलिकता नहीं खोनी चाहिए भले ही हम किसी ओहदे पर हों और उम्र के किसी भी पड़ाव में हों।
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जयपुर के जाने-माने डॉक्टर जितेंद्र सिंह मक्कड़ साहब ने एक बार कहा था, “प्रेम में घायल दिल का इलाज मैं नहीं कर सकता, बाकी हर तरह के दिल का कर सकता हूं।”
ये खबर पढ़कर लगा, टूटे दिल का इलाज आज भी मुश्किल है... लेकिन मेडिकल साइंस अब बाकी टूटी और कटी चीजें जोड़ने में काफी आगे निकल चुका है।
प्रेमिका के मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए हैं
जज साहब लोग विद्वान होते हैं
उनके फैसलों/कथनों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। ऐसा हमें बताया गया है।
हालांकि माथा पीटने, सिर धुनने, छठी मंजिल की छत पर जाकर कूदने की इच्छा व्यक्त करने, खुद को कोसने, निर्जीव चीजों को लात मारने आदि पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
कोई इस खालीपन को नहीं भर पाएगा
आदरणीय केसी मालू जी ने वीणा कैसेट्स के माध्यम से राजस्थानी लोक संगीत को जो ऊंचाइयां प्रदान की, वैसा दूसरा कोई नहीं कर पाया। जितने राजस्थानी कलाकारों, गीतकारों, संगीतकारों को उन्होंने मौके दिए, उतने कोई सरकारी योजना नहीं दे पाई। राजस्थानी संस्कृति और संगीत में उनके योगदान का समुचित मूल्यांकन हुआ भी नहीं है और ठीक से कर पाना भी संभव नहीं है।
राजस्थान का कला जगत, संगीत प्रेमी उनके सदैव ऋणी रहेंगे।
विनम्र श्रद्धांजलि
शत शत नमन
श्री के. सी. मालू जी के निधन का समाचार मन को गहरे तक उदास कर गया।
राजस्थानी संगीत की अमूल्य धरोहर को सहेजने और उसे जन-जन तक पहुँचाने में उनका योगदान अतुलनीय है। वीणा म्यूज़िक @Veena_Music के माध्यम से उन्होंने न केवल राजस्थानी लोक-संगीत के संरक्षण और संवर्धन का महत्त्वपूर्ण कार्य किया, बल्कि इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का भी उल्लेखनीय दायित्व निभाया।
इस दुःख की घड़ी में मेरी हार्दिक संवेदनाएँ उनके परिवार, मित्रों और असंख्य प्रशंसकों के साथ हैं। प्रभु से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
ॐ शान्तिः।
यह चित्र उस अवसर की स्मृति है, जब मुझे उनके साथ @JaipurLitFest में एक परिचर्चा में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उनकी सौम्यता, आत्मीयता और संगीत के प्रति उनका अटूट समर्पण सदैव स्मृतियों में जीवित रहेगा।
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