प्रिय @DrSatishPoonia
आप बारंबार जनता द्वारा नकारे जनप्रतिनिधि हैं जो कभी भी राजस्थान में मुद्दा गत राजनीति के लिए नहीं जाने गये।
अभी उच्च सदन और वृद्धों की आरामगाह राज्यसभा के लिए आपको नामित किया गया है जिसके तहत आपके द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है जहाँ आप बुके गुलदस्ते आदि इत्यादि लेने देने जैसा PR कर रहे हैं।
कुछ सवाल हैं मन में जो हमेशा आपको लेकर खटकते हैं ———-
💵क्या मानेसर प्रकरण आपकी नज़रों में एक जेंटलमैन समझौता था क्योंकि उसमें यह किसी से छिपा हुआ नहीं है उस समय आप और गजेन्द्र सिंह शेखावत लीडिंग रोल में थे ?
💵 क्या आप जिस दिखावे को अभी प्रदर्शित कर रहे हैं हाल ही आप अपने ख़ुद के बड़े नेताओं से मिलते वक़्त बड़े महँगी गुलदस्तों का आयोजन नहीं करके आए हैं ?
💵 डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा प्रकरण में सरकार के स्टैंड से क्या आप सहमति रखते हैं ?
💵 Neet पेपर लीक प्रकरण में आपकी चुप्पी क्या जेंटलमैन स्टेटमेंट है ?
💵 #si_भर्ती_2021 के चयनित और अचयनितों का वक़्त आपकी सरकार के अनिर्णय की भेंट चढ़ा उस पर मौन रहना क्या गुलदस्तों पर बोलने से ज़्यादा ठीक लगा ?
💵 क्या डीज़ल की क़ीमतों से त्रस्त आपका ख़ुद का किसान वर्ग अपने खेतों में ट्रेक्टर चलाने को मोहताज हो गया है उस पर आपका क्या स्टैंड है और किसे ज़िम्मेदार मानते ?
💵 इसलिए जिस चीज़ में आप ख़ुद ही लिप्त हैं उसका प्रसार करना बेहद सस्ती लोकप्रियता पाने और उसको महिमा मंडित करने जैसा पाप है।
💵 आप कभी भी मुद्दा गत राजनीति के पैरोकार या उसको बलशाली करने जैसी संस्थाओं के हिमायती नहीं रहे हैं उन पर आपकी राय ना सदन में कभी प्रकट हुई ना सड़कों पर।
💵 नोट - हो सकता है मैं ग़लत हूँ लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि आप जैसे और वर्तमान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जैसे लोगों का सक्रिय राजनीति में रहना लोकतंत्र को कमज़ोर करने जैसा है ?
क्योंकि लोकतंत्र की जो बुनियादी नींव है वह जनभावनाओं , लोक कल्याण से प्रेरित निर्णयों और किसान जवान पीड़ित के मर्म को समझने का ही तो खेल है जो आप जैसे लोग कभी खेले ही नहीं।
💵 ये बुके लेनदेन तो पैसों के लेनदेन से बहुत बेहतर है।
@BJP4Rajasthan@INCRajasthan@dineshdangi84@Khalbaali@GovindDotasra@hanumanbeniwal@shekharcanada@itsrealritu@Imdineshpurohit@hemantkumarnews
तथ्य !
सचिन पायलेट हरियाणा पुलिस के पहरे में कांग्रेस के विधायक लेके बैठे थे !
ऑडियो टेप खुला लेन देन कौन कर रहा था ?
अमित शाह के हाथों की कठपुतली बन कांग्रेस मुक्त भारत का सपना सचिन पायलेट न केवल देख रहे बल्कि उसके भागीदार भी थे।
राजस्थान की जनता ने अभी तक mp महाराष्ट्र जैसा विश्वासघात यहां स्वीकार नहीं किया है।
अगर कोई उतर प्रदेश जैसी राजनीति का चरित्र ओढ कर राजस्थान की राजनीति में स्थापित होना चाहता है तो यह उसकी भूल है क्योंकि यहां की जनता अभी भी विचारधारा की चादर ओढे है।
कांग्रेस सचिन पायलेट की जातीय भीड में कहीं पंजाब जैसा हाल ना कर बैठे !
@AadeshRawal जैसे पायलेट पालित चाटुकार प्रदेश में वैसे भी गहराई से आका को जातीय नेता का चोला उढ़ा ही चुके हैं जो दिन रात कांग्रेस के खिलाफ प्लांटेड बतकही करते रहते हैं।
@INCIndia@RahulGandhi@priyankagandhi@INCRajasthan
आला कमान और पार्टी से अलग जो जो नेता अपनी व्यक्तिगत छवि चमकाने में लगे हुए थे वह बाद में पता चला डैमेज कंट्रोल की तैयारी थी।
अदिति सिंह ,
ज्योतिरादित्य सिंधिया ,
कुलदीप विश्नोई,
रॉव इंद्रजीत
राघव चढ्ढा
संदीप पाठक
सयोनी घोष
RPN सिंह……………………………………………………..
अरविंद चोटिया को मिला काम !!!!!
कुछ दिन मीणा समाज के पक्ष विप़क्ष को कोट कर सामाजिक वैमनस्य के हवन में देते रहेंगे आहुति !!!
दोनों में से जो कमजोर हो मजबूत तो ….वाद ही होगा।।।।।।
@NareshMeena__@HansrajMeena@VoiceOfTribals_@AvPakad
आदेश रावल सचिन पायलेट की हवा बनाते और PR के उबाऊ काम से थक गये हैं और उन्होंने सचिन पायलेट के AC प्रेम को बयां कर ही दिया।
अब तो @AadeshRawal तक मानने लग गये सचिन पायलेट संघर्षविहीन राजनेता हैं जो केवल मुख्यमंत्री पद थाली में सजा चाहते हैं बिना सडकों का तापमान नापे।
हर आंदोलन में न्याय ही प्रमुख मुद्दा होता है पुनर्जन्म तो कभी किरोडी लाल मीणा भी नहीं करा पाये थे।
संवेदनशील मुद्दों पर कम से कम संवेदनशील रहा जा सकता है।
पाँचना-विवाद
लोकतंत्र में जल और वायु निर्वाद रूप से बहती हुई प्राकृतिक सम्पदा हैं जो अब केवल संघीय सूची के विषय हैं जिन पर न्याय संगत उपबंध ही कारगर होते हैं।
प्राकृतिक न्याय की बात करें तो प्रकृति और उसके उत्पादों के प्रथम अधिकारी और उपभोक्ता आदिवासी हैं और इन पर उनका अधिकार इसलिए भी सभी से पहले सिद्ध है क्योंकि इन्हें बचाने और संजोने में उन्होंने पीढ़ियां ख़र्च की हैं।
राजस्थान में पाँचना बाँध को लेकर जिस तरह सचिन पायलट का समाज हठधर्मिता और लठैत वाद का पर्याय बन कर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुँचाने पर उतारू है वह सीधा सीधा आदिवासियों की हकों और अधिकारों का अतिक्रमण है।
मीणा समाज अपनी प्राकृतिक पह्चान एवं जल जंगल ज़मीन के प्रहरी रुप में शताब्दियों से जाना जाता रहा है आज उसे जल जैसी मूलभूत और मौलिक प्राकृतिक सम्पदा के उपयोग के लिए सड़कों पर बैठना पड़ रहा है यह भाजपा सरकार कि आदिवासी विरोधी मानसिकता का द्योतक है।
लट्ठ के दम पर सचिन पायलट का समाज जिस तरह प्राकृतिक संपदा के उपयोग को बाधित कर रहा है वह लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है।
अगर अलग अलग समाज इस तरह प्राकृतिक संपदाओं एवं सरकारी संपदाओं पर अधिकार सिद्ध करने पर उतारू हो गए तो राजतंत्र जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
१ इस तरह दो अधिग्रहण की गई ज़मीन पर रेलवे की पटरियां किसी के अधिकार क्षेत्र का विषय हो जाएंगी।
२ क्या एक्सप्रेस वे और सड़कों का जाल अधिग्रहित की हुई ज़मीनों के कारण किसी समाज और धर्म के आग़ोश में आकर यातायात के निर्विवाद प्रवाह को सुचारु रख पाएंगे ?
३ क्या PSUs और औधोगिक ढांचे को समर्पित राष्ट्रीय संपत्तियां इस दृष्टिकोण से किसी वर्ग विशेष और जाति विशेष को ही लाभकारी हो जायेंगी ?
@HC_meenaMP@Ramkeshmeenainc@NareshMeena__@HansrajMeena@AvPakad@VoiceOfTribals_
क्या डॉ किरोडी लाल की किसी के इशारे पर इस सब का हिस्सा बना राजनीतिक छवि को मटियामेट किया जा रहा है ?
सवाल फिर भी यही है कौन ?
सरकार में बैठा कौन ऐसा मास्टरमांइड है ?
अगर डॉ किरोड़ी मीणा सही हैं तो क्या सरकार नहीं चाहती थी कि बीज माफियाओं पर कार्यवाही हो ?
कोई एक तो गलत है देखना है राजनीतिक ऊँट किस करवट बैठता है ?
@DrKirodilalBJP
अजी यह सब ही तो आप जैसे संघीयों को जीवित रखता है।
किसान आन्दोलन ,
पहलवान आन्दोलन ,
महंगाई से लेकर मानेसर तक ही तो आपकी सीढीयां हैं
वरना लोकतंत्र तो आप को और आप उसे कम ही रास आयें हैं !!!!!!!
क्या BJP डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा की लोकप्रियता से इतनी असहज हो गई है कि अपने ही मंत्री के ख़िलाफ़ षड्यंत्र किए जा रहे हैं ?
क्या यह #si_भर्ती_2021 परीक्षा मैं अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री पर बार बार हमलावर होने का दुष्परिणाम है ?
@DrKirodilalBJP
कांग्रेस के नेताओं की यह भाषा याद कीजिये कब कब निकली और वे कहाँ हैं ?
यह एकदम सटीक लाइन अमित शाह और उनकी एजेंसियों ने टाइप करवा के भिजवा रखी है।
@SachinPilot@RahulGandhi
नेहरू चचा ने पाकिस्तान को ये गिफ़्ट दिया था…!!
स्कर्दू की हसीन वादियाँ…!!!
काश कोई मज़बूत रीढ़ वाला प्रधानमंत्री होता…
तो आज हम लद्दाख से आगे स्कर्दू घूमने जाते…!!!
अशोक गहलोत के मुताबिक़ सरकार बचाने वाले विधायक सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं देखना चाहते थे और अप्रत्यक्ष रूप से आला कमान की मंशा भी यही थी।
इसी के चलते आला कमान ने उन्हें उस घटना के बाद भी मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार किया।
राजस्थान कांग्रेस …..,,,,,,,किसकी बग़ावत कौन ग़द्दार ??
हर कोई कप्तान !
मिर्जापुर में गुड्डू भैया कहे थे —- मैटर इंटर्नल है इंटर्नल ही सुलट जायेगा,,,,,अब चाहे सांप घर में आके दोस्ती कर ले रहता तो जहरीला ही है ना !!!!!!!
राजस्थान की सियासत के काले अध्याय मानेसर कांड के बाद उपजे हालातों में बगावत किसे गिना जाये ??????
१ मोदी जी के कांग्रेस मुक्त अभियान का हिस्सा बनने वाले सचिन पायलेट के धोखे को जो उन्होंने कांग्रेस के वोटर और उनकी विचारधारा के खून पसीने से मिले जनाधार को बेचने का काम किया !!!
२ तथाकथित अशोक गहलोत प्रायोजित या फिर उन विधायकों की मंशा को जो कांग्रेस सरकार बचाने में विचारधारा के साथ खड़े रहे जिन्होने सचिन पायलट को गद्दार मानकर मुख्यमंत्री बनने के मंसूबे को पर्यवेक्षकों के सामने ध्वस्त कर दिया ,,,!!!!!
३ सचिन पायलट की बग़ावत कांग्रेस से कांग्रेस की उस सरकार से जो भाजपा की नीतियों के विरोध एवं आला कमान की अथक मेहनत के दम पर बनी थी उसके ख़िलाफ़ थी वे उस ख़रीद फ़रोख़्त में हिस्सा ले रहे थे जहाँ आला कमान के विश्वास और कांग्रेस की विचारधारा की बोली लगायी जा रही थी,,,,!!!!!!
४ अशोक गहलोत और उनके प्रायोजित दल की बग़ावत उन नारों और मंसूबों के ख़िलाफ़ थी जो BJP की हरियाणा सरकार के घेरे में बैठकर अमित शाह के इशारे पर सचिन पायलट और उनके बिके हुए समर्थक होटल मानेसर में बैठकर लगा रहे थे।
५ सचिन पायलट की बग़ावत को कांग्रेस का आला कमान और कांग्रेस विचारधारा का वोटर आज ही ग़द्दारी मानता है और मैं उनके प्रति अविश्वास से भरा हुआ है क्योंकि वह BJP की गोद में जा बैठे !!!
६ अशोक गहलोत की बग़ावत आज भी कांग्रेस के कार्यकर्ता को विचलित नहीं करती बल्कि उन्हें मानेसर कांड को ध्वस्त करने के लिए एक नायक के तौर पर याद करती है आला कमान जब पूरे देश में ऑपरेशन लोटस से आतंकित था तब अशोक गहलोत ने पूरे भारत में कांग्रेस समर्थकों को यह विश्वास दिलाया कि अमित शाह है जैसे लोग उनके यहाँ ट्यूशन लेते हैं!!!!!!
नोट - अशोक गहलोत समर्थक कांग्रेस के अनुसार रहे सचिन पायलट के ख़िलाफ़ है जबकि सचिन पायलेट BJP के साथ हेमंत विश्व शर्मा एकनाथ शिंदे और ज्योतिरादित्य सिंधिया वाला खेल खेल कर आए हैं अब कांग्रेस आलाकमान और उनकी विचारधारा पोषित लोग तय करें जिसकी बगावत कौन ग़द्दार ,,,,?
@INCIndia@RahulGandhi@ashokgehlot51@SachinPilot@iRishabhKSharma@GovindDotasra@AadeshRawal@TheTribhuvan@Khalbaali@INCRajasthan