आज हरियाणा के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के साथ पर्यावरण संरक्षण की अमर प्रतीक, वीरांगना माँ अमृता देवी बिश्नोई जी की प्रतिमा के अनावरण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
माँ अमृता देवी का जीवन त्याग, साहस, नारी शक्ति और प्रकृति के प्रति अटूट समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। अपने प्राणों की आहुति देकर उन्होंने यह संदेश दिया कि वृक्ष, वन्यजीव और प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और भविष्य की अमूल्य धरोहर हैं।
यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी कि पर्यावरण की रक्षा केवल हमारा दायित्व नहीं, बल्कि आने वाले कल के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
मैं हरियाणा सरकार तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने माँ अमृता देवी बिश्नोई जी के अद्वितीय बलिदान को सम्मानित करते हुए पर्यावरण संरक्षण की इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सराहनीय और ऐतिहासिक कार्य किया।
माँ अमृता देवी का त्याग हम सभी के लिए प्रेरणा है और सदैव रहेगा।
“सिर सांटे रुख रहे, तो भी सस्तो जाण” — यह अमर संदेश आज भी हमें प्रकृति की रक्षा के लिए समर्पण और बलिदान की प्रेरणा देता है।
आज मुझे इस विश्वविद्यालय में आकर अपने पूज्य पिताजी, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, युगपुरुष, बिश्नोई रत्न स्वर्गीय चौधरी भजन लाल जी की बहुत याद आई।
उन्होंने इस विश्वविद्यालय की स्थापना केवल ईंट, पत्थर और भवनों का परिसर बनाने के लिए नहीं की थी। उनका सपना था कि यहाँ से निकलने वाला हर विद्यार्थी केवल डिग्री लेकर न जाए, बल्कि ज्ञान, संस्कार, सेवा, संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेकर निकले। उनका विश्वास था कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज का उत्थान है।
उन्होंने राजनीति को कभी सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि जनसेवा का सबसे बड़ा दायित्व समझा। उनके दरवाज़े पर आने वाला कोई भी व्यक्ति स्वयं को आम नागरिक नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य महसूस करता था। हर वर्ग, हर समाज, हर क्षेत्र और हर व्यक्ति के सुख-दुःख में खड़े रहना ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय भी उनकी उसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उनका मानना था कि किसी प्रदेश का वास्तविक विकास केवल सड़कों, पुलों और इमारतों से नहीं होता, बल्कि शिक्षा, संस्कार, शोध और जागरूक युवाओं से होता है। इसी सोच के साथ उन्होंने हरियाणा के युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की।
वे अक्सर कहा करते थे—“जनता का विश्वास ही सबसे बड़ा पद होता है।” यही वाक्य आज भी मेरे सार्वजनिक जीवन का सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।
आज मेरे लिए यह क्षण इसलिए भी अत्यंत भावुक है कि उसी विश्वविद्यालय की धरती पर, जिसकी कल्पना मेरे पिताजी ने की थी, आज पर्यावरण संरक्षण की अमर प्रतीक, वीरांगना माँ अमृता देवी बिश्नोई जी की प्रतिमा का अनावरण हमारे लोकप्रिय एवं यशस्वी मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP जी के कर-कमलों द्वारा की गई।
यह केवल एक प्रतिमा का अनावरण नहीं है, बल्कि दो महान विचारधाराओं का संगम है(स्वर्गीय चौ भजन लाल जी एवं माता अमृता देवी जी) एक, जिसने शिक्षा के माध्यम से भविष्य गढ़ने का संकल्प लिया और दूसरी, जिसने प्रकृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर मानवता को अमर संदेश दिया।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि यदि आज मेरे पिताजी हमारे बीच होते, तो वे इस पल को अपने जीवन के सबसे संतोषजनक और गौरवपूर्ण क्षणों में से एक मानते।
गुरु महाराज की जय
माँ अमृता देवी अमर रहे
चौ भजन लाल जी अमर रहे।
30 साल सत्ता से दूर रहे, फिर भी जन-जन के दिलों पर राज है,
ये भीड़ नहीं, @bishnoikuldeep जी के संघर्ष और विश्वास की आवाज़ है।
वक़्त ने बहुत आज़माया, मगर मिटा न सका भजनलाल परिवार का असर,
हरियाणा की सियासत में फिर लौट रहा है कुलदीप बिश्नोई का दौर।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, माननीय रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आपके कुशल नेतृत्व में देश की रक्षा प्रणाली पहले से कंही सुदृढ़ हुई है और हमारे विरोधियों को मुंह तोड़ जवाब मिला है।
आपके उत्तम स्वास्थ्य और दिर्घायु की कामना करता हूँ।
संघर्ष जिनकी पहचान हो, सेवा जिनका संकल्प हो और जनता जिनकी ताक़त हो,
उन्हें कोई भी चुनौती अधिक देर तक रोक नहीं सकती।
आदरणीय कुलदीप जी का सफ़र इस बात का प्रमाण है कि
जनविश्वास से बड़ा कोई जनादेश नहीं होता, और सच्ची नीयत से बड़ा कोई नेतृत्व नहीं होता।
कारवाँ चलता रहा है, चलता रहेगा।
आदरणीय कुलदीप जी के प्रति लोगों का विश्वास, स्नेह और सम्मान आज भी पहले की तरह अडिग है।
@bishnoikuldeep@bbhavyabishnoi@bbishnoimukesh_@mohit_hissar
उचाना हलके से हमारे कर्मठ, मेहनती साथी साथी अज़ीज़ सुनील दिल्लुवाला को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके उत्तम स्वास्थ्य और दिर्घायु की कामना करता हूँ।
वक्त बदल सकता है, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं,
लेकिन जनता के दिलों में जो जगह बन जाती है, वह कभी नहीं बदलती।
सिरसा और पानीपत की ऐतिहासिक भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आदरणीय @bishnoikuldeep जी के प्रति लोगों का विश्वास और अपनापन पहले की तरह मजबूत है।
जिस नेता की पहचान जनता के दिलों में हो, उसे किसी पद या परिचय की आवश्यकता नहीं होती।”
जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है, और वही सबसे बड़ा जनादेश भी।
@bbhavyabishnoi@bbishnoimukesh_@mohit_hissar
@bishnoikuldeep जिस नेता की पहचान जनता के दिलों में हो, उसे किसी पद या परिचय की आवश्यकता नहीं होती।”
जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है, और वही सबसे बड़ा जनादेश भी।
कुलदीप बिश्नोई जी जैसे जननेता के साथ परिवार जैसा सुकून मिलता है
1. आदमपुर में आज अपने परिवारजनों, शुभचिंतकों और साथियों के बीच पहुँचकर उनके सुख दुःख में शिरकत की।
अपनों के बीच बिताया हर पल आत्मीयता, अपनत्व और विश्वास से भर देता है। ईश्वर से सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।
2. आदमपुर में आज अपने परिवारजनों, शुभचिंतकों और साथियों के बीच पहुँचकर उनके सुख दुःख में शिरकत की।
अपनों के बीच बिताया हर पल आत्मीयता, अपनत्व और विश्वास से भर देता है। ईश्वर से सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।
3. आदमपुर में आज अपने परिवारजनों, शुभचिंतकों और साथियों के बीच पहुँचकर उनके सुख दुःख में शिरकत की।
अपनों के बीच बिताया हर पल आत्मीयता, अपनत्व और विश्वास से भर देता है। ईश्वर से सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।
वक्त बदल सकता है, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं,
लेकिन जनता के दिलों में जो जगह बन जाती है, वह कभी नहीं बदलती।
सिरसा और पानीपत की ऐतिहासिक भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आदरणीय @bishnoikuldeep जी के प्रति लोगों का विश्वास और अपनापन पहले की तरह मजबूत है।
जिस नेता की पहचान जनता के दिलों में हो, उसे किसी पद या परिचय की आवश्यकता नहीं होती।”
जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है, और वही सबसे बड़ा जनादेश भी।
@bbhavyabishnoi@bbishnoimukesh_@mohit_hissar
1. “कहते हैं कि राजनीति में स्थायी दोस्त नहीं होते। मैं कहता हूँ, एक बार मेरे कार्यकर्ताओं से मिलिए।”
पूरे हिंदुस्तान में शायद ही कोई ऐसा नेता होगा, जिसके साथ सत्ता से तीन दशक दूर रहने के बाद भी उसके कार्यकर्ता उसी जोश, उसी निष्ठा, उसी आत्मीयता और उसी विश्वास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हों।
आज पानीपत के ऐतिहासिक स्नेह मिलन एवं जलपान कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि सच्चे रिश्ते सत्ता से नहीं, विश्वास से बनते हैं। यह केवल एक सफल कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, समर्पण, आत्मीयता और अटूट विश्वास का भव्य उत्सव था।
आज इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर मन बार-बार एक ही ओर जाता है—स्वर्गीय युगपुरुष चौधरी भजनलाल जी की ओर। मैं अत्यंत भावुक मन से यह कहना चाहता हूँ कि उन्हें हमारे बीच से विदा हुए वर्षों बीत गए, लेकिन उनका आशीर्वाद, उनका स्नेह और उनके प्रति जनता का प्रेम आज भी पहले जैसा ही जीवंत है।
हरियाणा हो, राजस्थान हो, पंजाब हो या देश का कोई भी कोना—जहाँ भी चौधरी साहब का नाम लिया जाता है, वहाँ आज भी लोगों की आँखों में सम्मान, चेहरे पर अपनापन और दिल में प्रेम दिखाई देता है। यह किसी पद या सत्ता से अर्जित सम्मान नहीं था, बल्कि जीवनभर की जनसेवा, सादगी, अपनत्व और लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की कमाई थी। ऐसे रिश्ते समय के साथ कमज़ोर नहीं होते, बल्कि और अधिक गहरे होते जाते हैं। सचमुच, इस प्रेम और विश्वास को दुनिया की कोई ताकत कभी तोड़ नहीं सकती। आज के इस स्नेह मिलन की सफलता में मैं उनका आशीर्वाद स्पष्ट रूप से अनुभव कर रहा हूँ।
मेरे कार्यकर्ता ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं, मेरी सबसे बड़ी पूँजी हैं और मेरी सबसे बड़ी पहचान हैं। आप सभी के प्रेम, समर्पण और विश्वास को मैं जीवनभर का ऋण मानता हूँ।
मेरा संकल्प है कि समय आने पर मैं अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के विश्वास, त्याग और समर्पण का ऋण उतारने का हर संभव प्रयास करूँगा। आपका विश्वास ही मुझे हर चुनौती से लड़ने का साहस देता है।
मेरा और आपका रिश्ता किसी राजनीतिक दल, पद या सत्ता का नहीं, बल्कि विश्वास, आत्मीयता और परिवार का रिश्ता है।
आप मेरे कार्यकर्ता नहीं, मेरे परिवार हैं। और परिवार कभी परिस्थितियों से नहीं बदलता। यही परिवार मेरी सबसे बड़ी शक्ति है, मेरी सबसे बड़ी पूँजी है और मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।
एक बार पुनः आज के इस ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व रूप से सफल स्नेह मिलन एवं जलपान कार्यक्रम की सफलता के लिए मैं पानीपत के अपने प्रत्येक आत्मिक पारिवारिक साथियों को दिल की गहराइयों से हार्दिक बधाई और साधुवाद देता हूँ।
आप सबने केवल एक कार्यक्रम को सफल नहीं बनाया, बल्कि यह सिद्ध कर दिया कि विश्वास, प्रेम और परिवार का रिश्ता समय और परिस्थितियों से कहीं अधिक मजबूत होता है।
आप सभी को मेरा हृदय से प्रणाम। 🙏
2. “कहते हैं कि राजनीति में स्थायी दोस्त नहीं होते। मैं कहता हूँ, एक बार मेरे कार्यकर्ताओं से मिलिए।”
पूरे हिंदुस्तान में शायद ही कोई ऐसा नेता होगा, जिसके साथ सत्ता से तीन दशक दूर रहने के बाद भी उसके कार्यकर्ता उसी जोश, उसी निष्ठा, उसी आत्मीयता और उसी विश्वास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हों।
आज पानीपत के ऐतिहासिक स्नेह मिलन एवं जलपान कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि सच्चे रिश्ते सत्ता से नहीं, विश्वास से बनते हैं। यह केवल एक सफल कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वर्षों के संघर्ष, समर्पण, आत्मीयता और अटूट विश्वास का भव्य उत्सव था।
आज इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर मन बार-बार एक ही ओर जाता है—स्वर्गीय युगपुरुष चौधरी भजनलाल जी की ओर। मैं अत्यंत भावुक मन से यह कहना चाहता हूँ कि उन्हें हमारे बीच से विदा हुए वर्षों बीत गए, लेकिन उनका आशीर्वाद, उनका स्नेह और उनके प्रति जनता का प्रेम आज भी पहले जैसा ही जीवंत है।
हरियाणा हो, राजस्थान हो, पंजाब हो या देश का कोई भी कोना—जहाँ भी चौधरी साहब का नाम लिया जाता है, वहाँ आज भी लोगों की आँखों में सम्मान, चेहरे पर अपनापन और दिल में प्रेम दिखाई देता है। यह किसी पद या सत्ता से अर्जित सम्मान नहीं था, बल्कि जीवनभर की जनसेवा, सादगी, अपनत्व और लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने की कमाई थी। ऐसे रिश्ते समय के साथ कमज़ोर नहीं होते, बल्कि और अधिक गहरे होते जाते हैं। सचमुच, इस प्रेम और विश्वास को दुनिया की कोई ताकत कभी तोड़ नहीं सकती। आज के इस स्नेह मिलन की सफलता में मैं उनका आशीर्वाद स्पष्ट रूप से अनुभव कर रहा हूँ।
मेरे कार्यकर्ता ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं, मेरी सबसे बड़ी पूँजी हैं और मेरी सबसे बड़ी पहचान हैं। आप सभी के प्रेम, समर्पण और विश्वास को मैं जीवनभर का ऋण मानता हूँ।
मेरा संकल्प है कि समय आने पर मैं अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के विश्वास, त्याग और समर्पण का ऋण उतारने का हर संभव प्रयास करूँगा। आपका विश्वास ही मुझे हर चुनौती से लड़ने का साहस देता है।
मेरा और आपका रिश्ता किसी राजनीतिक दल, पद या सत्ता का नहीं, बल्कि विश्वास, आत्मीयता और परिवार का रिश्ता है।
आप मेरे कार्यकर्ता नहीं, मेरे परिवार हैं। और परिवार कभी परिस्थितियों से नहीं बदलता। यही परिवार मेरी सबसे बड़ी शक्ति है, मेरी सबसे बड़ी पूँजी है और मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।
एक बार पुनः आज के इस ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व रूप से सफल स्नेह मिलन एवं जलपान कार्यक्रम की सफलता के लिए मैं पानीपत के अपने प्रत्येक आत्मिक पारिवारिक साथियों को दिल की गहराइयों से हार्दिक बधाई और साधुवाद देता हूँ।
आप सबने केवल एक कार्यक्रम को सफल नहीं बनाया, बल्कि यह सिद्ध कर दिया कि विश्वास, प्रेम और परिवार का रिश्ता समय और परिस्थितियों से कहीं अधिक मजबूत होता है।
आप सभी को मेरा हृदय से प्रणाम। 🙏