"बेटा 6 साल से बाड़मेर में है..."
यह सिर्फ एक माँ की आवाज़ नहीं, बल्कि वर्षों से अपने परिवार से दूर सेवा दे रहे हजारों तृतीय श्रेणी शिक्षकों के घरों की पीड़ा है।
जयपुर के शहीद स्मारक पर अब केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि उनके बूढ़े माता-पिता और परिजन भी न्याय की आस में धरने पर बैठे हैं। आखिर कब तक परिवार यूँ बिछड़े रहेंगे?
सरकार से आग्रह है कि संवेदनशीलता दिखाते हुए आ���दोलनरत शिक्षकों से सकारात्मक संवाद करे और उनकी न्यायोचित स्थानांतरण मांग का शीघ्र समाधान करे।
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वर्तमान में प्रदेश में सबसे बड़ी मांग तृतीय श्रेणी शिक्षकों के ट्रांसफर की है जिसको लेकर शहीद स्मारक पर पिछले दो दिन ��े शिक्षक साथी धरने पर ��ै, अभी तक सरकार और शिक्षकों के बीच बात नहीं बन पाई है।
इस मांग को लेकर आज 4:00 बजे से
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मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी और शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आखिर कब तक यू इन पोटलियों को लेकर घूमते रहेंगे ये शिक्षक , इनकी वाजिब मांग है उसको पूरा करो 🙏🏻
आखिर तृतीय श्रेणी शिक्षक होना ही गुनाह है क्या ?
क्यों तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता हैं?
तृतीय श्रेणी ट्रांसफर
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