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IIT मुंबई में एक स्टूडेंट ने कहा था कि IIT इंक्लूजिव नहीं है, सब तबके के लोग नहीं हैं। इतनी सी बात पर प्रो डुल्ला ने उसे 6 महीने के लिए सस्पेंड करवा दिया था!
ये सुनने के बाद भी क्या गुंजाइश रह जाती है ये जानने में कि उसने दलित छात्र के साथ क्या किया था?
नीच पोंगा पंडित हमेशा यही करते आए हैं..
क्योंकि वह गंदी नाली से के कीड़ों से भी ज्यादा गंदे हैं !!
दुनिया को शांति और प्रेम का रास्ता बताने वाले तथागत बुद्ध की मूर्ति के साथ यह दुर्व्यवहार करने वाले लोग इन दुनिया के सबसे गंदे और नीच लोग हैं
“ब्राह्मण तुम्हें भगवान के नाम पर मूर्ख बना रहे हैं। वे अंधविश्वास फैलाते हैं, खुद आराम से रहते हैं और तुम्हें अछूत बताते हैं।” - पेरियार ई.वी. रामासामी
पोंगा पंडितों की लंका लगाने वाले पिछड़े दलित को उनका अधिकार दिलाने वाले देश के मसीहा पेरियार ई.वी. रामासामी जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन 🙏🙏
तुकाराम मुंढे बोले-अस्पताल में ₹11 के प्रोडक्ट की कीमत ₹325: ₹6.75 की सिरिंज पर MRP ₹57.20; मार्जिन पर सवाल उठाए
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को सुबह करीब 11:45 मिनट दिल्ली पहुंचे.
सम्मेलन में शामिल हुए. मीटिंग की और बिना भोजन में शामिल हुए 13 सितंबर को करीब 2 बजे दिल्ली से बीजिंग के लिए रवाना हो गए.
यानी लगभग 26 घंटे भारत में रहे. चीन जाकर वो अपना कामकाज संभालेंगे. चीन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा भी शी जिनपिंग की तरह एक दम फ़ास्ट है.
भारतीय कपल जो कि चीन में काम करता है. बीमार पड़ने पर सरकारी अस्पताल गया. ओपीडी में 30 मिनट में डॉक्टर को दिखाने का नंबर आ गया. डॉक्टर ने दवा लिखने से पहले ब्लड टेस्ट प्रेस्क्राइब कर दिया.
अस्पताल में ही ब्लड रिपोर्ट 25 मिनट में आ गयी. रिपोर्ट दिखाने पर डॉक्टर ने दवा प्रेस्क्राइब कर दी. अस्पताल के मेडिकल स्टोर से पूरी दवा कम दरों में मिल गयी. लगभग 1.30 घंटे में भारतीय कपल सरकारी अस्पताल से बाहर आ गया.
भारत के सरकारी अस्पतालों में जाओ तो सुबह से शाम हो जाती है. ओपीडी में रेलवे स्टेशन की तरह भीड़ होती है. कुछ बड़े सरकारी अस्पतालों में तो रात से लाइन लगने लगती है.
संघर्ष, त्याग और समर्पण का पर्याय बन चुके हैं नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद ❤️
आज पूरे दिन बाराबंकी में संघर्ष किया, गाड़ी पर हमला हुआ, रास्तों में रोका गया, कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, प्रशासन से नोंक-झोंक हुई
फिर भी बिना थके बिना रूके चन्द्रशेखर आजाद बाराबंकी से सीधे लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहे पंचायत सहायकों के आंदोलन में पहुंचे और उन्हें हिम्मत दी
पूरे दिन में इतना समय भी नहीं मिला कि वो पेट भरकर खाना भी खा लें.... चन्द्रशेखर आजाद का यह संघर्ष मिसाल के तौर पर हमेशा याद किया जाएगा जिस प्रकार आज हम मान्यवर कांशीराम साहब व बाबासाहेब अम्बेडकर के संघर्ष को याद करते हैं!!
आरक्षण गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नही है. प्रतिनिधित्व है, समानता है, विविधता है और मुट्ठीभर जातियों का वर्चस्व रोकने की व्यवस्था है.
1902 में कोल्हापुर रियासत में ब्राह्मण समाज की आबादी 3% के आसपास थी.
कोल्हापुर रियासत के प्रशासनिक सेवा में 71 पदों में से 60 पर ब्राह्मण थे. 500 पदों में से केवल 10 पर गैर-ब्राह्मण थे.
छत्रपति शाहू जी महाराज ने 1902 में आरक्षण लागू कर दिया. 10 साल बाद यानी 1912 में कोल्हापुर के रियासत के दरबार में 95 पदों पर गैर-ब्राह्मणों की संख्या 60 हो गयी.
आदरणीय मित्रों, जहां आज आरक्षण नही है वहां क्या आपकी जाति के लोग है. जहां नही हैं वहां नियुक्ति मैरिट या लिखित परीक्षा से नही होती, बल्कि मनमर्जी से होती है.
भारत में फ़िलहाल कुल तीन तरह के पत्रकार हैं.
- एक जो सत्ता से सवाल करता है
- दूसरा जो सत्ता के तलवे चाट रहा है
- तीसरा जो बैलेंस बना कर चल रहा है
शुभांकर मिश्रा और अभिनव पांडेय ये लोग बैलेंस बना कर चलने वाले पत्रकार हैं। मामला चाहे UGC का हो या स्वतंत्र भारद्वाज का।
ये बहुत महीन खेल खेलते हैं। थोड़ा सा सरकार से सवाल भी पूछ लेंगे और थोड़ा सिस्टम को सहला भी देंगे। ये लोग एकदम बैलेंस बनाकर चलने में माहिर हैं।
आप इन्हें कैसे देखते हैं और आपके नज़र में ये कैसे पत्रकार हैं आप बताइए। बाकी पिछड़ों/दलितों के हित से जुड़े फैसले में इनका असली रूप आप सभी को दिख जाता होगा।
“जूता दिल्ली पुलिस का, डंडा दिल्ली पुलिस का। असली गुंडे हम लोग हैं।”
अपराधियों को पालने वाली सरकार है यह, गुंडों की सरकार है यह। इन्हें मालूम है कि अगर किसी का मर्डर भी कर दें, तो कुछ नहीं होगा। सरकार इन्हें बचा लेगी।
जब कोई अजीत भारती सरकारी में आरक्षण का विरोध करेगा,
किसी उमा भारती से हम प्राइवेट में आरक्षण की बात मनवा लेंगे।
इसलिए पहले दिन से मना कर रहे हैं ये खेल मत खेलो बालकों
आप जितनी बकवास करेंगे, दलित पिछड़ों को उतने हक अधिकार मिलेंगे।
ये बुढ़िया किसी अगड़ी जाति से है,
99 फीसदी उम्मीद है कि 52 ही होगी,
ये बुढ़िया UP के पूर्व मुख्यमंत्री, सबसे बड़ी पार्टी के नेता और UP के सबसे बड़े नेता @yadavakhilesh को उनकी जाति की वजह से
अहीर, बोका कह रही है,
अखिलेश यादव जी आप कितना भी सम्मेलन कर लीजिए ब्राम्हण आपको कभी वोट नहीं देगा,
आप अगर PDA फॉर्मूले से रत्ती भर भी डिगे तो आपका इंतज़ार लम्बा हो जाएगा,
PDA ही विजय का आपका फार्मूला हो सकता है,
सबसे बड़ी बात है जानते सब हैं लेकिन बोलता कोई नही है.
आदिवासी लोन लेते हैं तो पूरा भरते हैं.
दलित लोन लेते हैं तो पूरा भरते हैं.
पिछड़ा वर्ग भी लोन की हर क़िस्त भरता है.
मुसलमान भी लोन भरने में सबसे आगे हैं.
भारत में 1,68,624 बैंकों के ब्रांच हैं. लोन डिफॉल्टर की लिस्ट जारी होनी चाहिए.
सबसे ज्यादा लोन डिफॉल्टर वहीं है जो सिस्टम को मैनेज करने की ताकत रखते हैं. सिस्टम को मैनेज करने वालों का नेक्सस हैं.
यह नेक्सस कुछ जाति वर्ग का है. राष्ट्र को जानना है सीना तानकर लोन नही भरने वालों का सरनेम क्या है ?
अजीब भारती के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हो चुकी है।
अगर कायदे से कार्रवाई हो गई तो उसकी सारी लठैती ख़त्म होने वाली है।
SC/ST एक्ट, IT एक्ट समेत कई गंभीर धाराएं लगी हैं।
आरक्षण को अपमानित कर के थक गए हो तो अब जरा काम की बात की जाए.
अब चलो आंकड़ों की बात करते हैं. देश के टॉप प्राइवेट लक्ज़री अस्पताल हैं. जो सरकार की जमीनों पर कुछ शर्तों के साथ बने हैं.
1. Apollo 76+ हॉस्पिटल
2. Medanta 5 हॉस्पिटल
3. Fortis 36 हेल्थकेयर फैसिलिटी
4. Asian Heart केअर हॉस्पिटल
5. Max Super हॉस्पिटल
इन अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति कैसे होती है. इन अस्पतालों में कितने डॉक्टर OBC SC ST समाज से हैं ?
ऐसा क्या कारण है प्राइवेट अस्पतालों में बहुजन समाज के डॉक्टर नजर नही आते ?
इस सभी अस्पतालों को डाइवर्सिटी रिपोर्ट जारी करनी चाहिए. मैरिट के मिथ के नाम पर जातीय घोटाला करने की छूट नही दे सकते.