एक रेल यात्री की पीड़ा
यह दृश्य ट्रेन के किसी जनरल कोच का नहीं बल्कि मेवाड़ एक्सप्रेस (12963) के एसी कोच का है। यह दृश्य किसी एक दिन का नहीं बल्कि हर रोज़ का है। दिल्ली से उदयपुर ट्रेन से यात्रा करने वाले लोग मेवाड़ एक्सप्रेस में प्रतिदिन एक तनावपूर्ण समस्या से रूबरू होते हैं और इस समस्या के समाधान में रेल मंत्रालय की भी कोई दिलचस्पी नहीं। समस्या के सामने आरपीएफ, सभी टीटीई बेबस हैं।
समस्या शुरू होती है हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से ट्रेन चलने के आधे घंटे बाद जब बल्लभगढ़ स्टेशन आता है। यहां ट्रेन का ठहराव दो मिनट है। इस स्टेशन से हजारों की संख्या में डेली अप-डाउन करने वाले श्रमिक और कामगार इस ट्रेन में चढ़ जाते हैं। क्या जनरल कोच, क्या स्लीपर और क्या थर्ड और सेकेंड एसी कंपार्टमेंट। हर जगह घुसने के बाद यह बहुत बदतमीजी और दबंगई के साथ जहां जो जगह मिली वहां बैठ जाते हैं। शेष भीड़ गलियारों में खड़ी हो जाती है। अगर कोई यात्री इन्हें रोकने या टोकने की कोशिश करता है तो यह अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। यह सारी भीड़ एक घंटे बाद कोसीकला स्टेशन पर उतर जाती है। इस एक घंटे के दौरान यात्री शौचालय तक भी नहीं पहुंच पाता। इस दौरान यात्रियों द्वारा कई बार रेल मदद और हेल्पलाइन पर शिकायत की गई। इस शिकायत को सुनने के लिए कोसीकला स्टेशन निकलने के बाद ही टीटीई, पुलिसकर्मी पहुंचते हैं। मैंने पिछले चार सालों में कई बार यात्रा के दौरान विभिन्न टीटीई को उनके सामर्थ्य पर उलाहना देते हुए शिकायत दर्ज की। उन्होंने भी इस समस्या के समाधान में असमर्थता जताई। सबका कहना था कि बल्लभगढ़ या कोसीकला दोनों में से किसी एक स्टेशन पर इसका स्टॉपेज बंद कर दिया जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। लेकिन हर कोई यही कहता सुना कि मथुरा की सांसद के कहने पर कोसीकला स्टॉपेज दिया गया है। या तो इस स्टॉपेज को हटाया जाए या इस ट्रेन का समय एक घंटा विलंब से कर दिया जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।
यह एक घंटे की यात्रा हर यात्री के लिए बहुत तनावपूर्ण रहती है। इस दौरान न व्यक्ति शौचालय जा पता है ना खाना खा पाता है। ऐसा लगता है जैसे पूरी ट्रेन पर इन श्रमिकों का कब्जा हो गया हो। इस स्थिति में रेल के सभी कर्मचारी, पुलिसकर्मी बेबसी की स्थिति में होते हैं। रेल मंत्रालय को प्रतिदिन अप-डाउन करने वाले इन श्रमिकों के लिए अलग से डेमू- मेमू-शटल रेल चलवाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ना कि महंगा टिकट खरीद कर यात्रा करने वालों को परेशानी में डालना चाहिए।
(उदयपुर के डॉ. कुंजन आचार्य की पोस्ट। सिर्फ समस्या नहीं, समाधान भी सुझाया गया है।)
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
एक रेल यात्री की पीड़ा
यह दृश्य ट्रेन के किसी जनरल कोच का नहीं बल्कि मेवाड़ एक्सप्रेस (12963) के एसी कोच का है। यह दृश्य किसी एक दिन का नहीं बल्कि हर रोज़ का है। दिल्ली से उदयपुर ट्रेन से यात्रा करने वाले लोग मेवाड़ एक्सप्रेस में प्रतिदिन एक तनावपूर्ण समस्या से रूबरू होते हैं और इस समस्या के समाधान में रेल मंत्रालय की भी कोई दिलचस्पी नहीं। समस्या के सामने आरपीएफ, सभी टीटीई बेबस हैं।
समस्या शुरू होती है हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से ट्रेन चलने के आधे घंटे बाद जब बल्लभगढ़ स्टेशन आता है। यहां ट्रेन का ठहराव दो मिनट है। इस स्टेशन से हजारों की संख्या में डेली अप-डाउन करने वाले श्रमिक और कामगार इस ट्रेन में चढ़ जाते हैं। क्या जनरल कोच, क्या स्लीपर और क्या थर्ड और सेकेंड एसी कंपार्टमेंट। हर जगह घुसने के बाद यह बहुत बदतमीजी और दबंगई के साथ जहां जो जगह मिली वहां बैठ जाते हैं। शेष भीड़ गलियारों में खड़ी हो जाती है। अगर कोई यात्री इन्हें रोकने या टोकने की कोशिश करता है तो यह अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। यह सारी भीड़ एक घंटे बाद कोसीकला स्टेशन पर उतर जाती है। इस एक घंटे के दौरान यात्री शौचालय तक भी नहीं पहुंच पाता। इस दौरान यात्रियों द्वारा कई बार रेल मदद और हेल्पलाइन पर शिकायत की गई। इस शिकायत को सुनने के लिए कोसीकला स्टेशन निकलने के बाद ही टीटीई, पुलिसकर्मी पहुंचते हैं। मैंने पिछले चार सालों में कई बार यात्रा के दौरान विभिन्न टीटीई को उनके सामर्थ्य पर उलाहना देते हुए शिकायत दर्ज की। उन्होंने भी इस समस्या के समाधान में असमर्थता जताई। सबका कहना था कि बल्लभगढ़ या कोसीकला दोनों में से किसी एक स्टेशन पर इसका स्टॉपेज बंद कर दिया जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है। लेकिन हर कोई यही कहता सुना कि मथुरा की सांसद के कहने पर कोसीकला स्टॉपेज दिया गया है। या तो इस स्टॉपेज को हटाया जाए या इस ट्रेन का समय एक घंटा विलंब से कर दिया जाए तो इस समस्या का समाधान हो सकता है।
यह एक घंटे की यात्रा हर यात्री के लिए बहुत तनावपूर्ण रहती है। इस दौरान न व्यक्ति शौचालय जा पता है ना खाना खा पाता है। ऐसा लगता है जैसे पूरी ट्रेन पर इन श्रमिकों का कब्जा हो गया हो। इस स्थिति में रेल के सभी कर्मचारी, पुलिसकर्मी बेबसी की स्थिति में होते हैं। रेल मंत्रालय को प्रतिदिन अप-डाउन करने वाले इन श्रमिकों के लिए अलग से डेमू- मेमू-शटल रेल चलवाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ना कि महंगा टिकट खरीद कर यात्रा करने वालों को परेशानी में डालना चाहिए।
(उदयपुर के डॉ. कुंजन आचार्य की पोस्ट। सिर्फ समस्या नहीं, समाधान भी सुझाया गया है।)
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw
🚩 हनुमंत सदा सहायते 🙏❤️
जिसके सिर पर बजरंगबली का हाथ हो, उसके जीवन में डर कैसा!
संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, हनुमान जी सदा अपने भक्तों के साथ रहते हैं। 🚩
जय श्री सालासर बालाजी महाराज 🙏
बोलो पवनपुत्र हनुमान जी महाराज की जय! ❤️🚩
📍 श्री सालासर बालाजी धाम, राजस्थान
Follow 👉 Shree Salasar Balaji Mandir
#SalasarBalaji #SalasarOfficial #SalasarDham #HanumanJi #BalajiMaharaj
Courage, gut instinct aur passion hi woh cheezein hain jo ek entrepreneur ko doosron se alag banati hain. Bas zaroori hai ki aap apne andar ki uss awaaz ko pehchanein.
ऐसे मार्केट में बड़ा पैसा वो ही निवेशक बनाएगा जो इस मंदी को आख़िरी छोर तक झेल पायेगा ! 95% निवेशक आख़िरी छोर तक आते आते हथियार डाल देते है और इनमें से 99% वो होते हैं जिनको रोज़ रोज़ पोर्टफोलियो देखने की आदत होती है , शुरू की गिरावट में तो वो पूरे जोश से नया निवेश और एवरेज करते है और फिर जब गिरावट लगातार लंबे समय तक और अपने अंतिम दोर में होती है तो अपनी एवरेज के साथ वो भी होल्डिंग बेच जाते है जो उन्होंने मल्टीबैगर सोचकर पहली ख़रीद की थी , बस मार्केट यहीं से बॉटम आउट होता है जहाँ 95% निवेशक की अंतिम उम्मीद भी ख़त्म हो जाती है ! 5% वो ही लोग इस तूफ़ान में भी डट के खड़े रहते है जिन्हें अपने फंडामेंटल रिसर्च पर पक्का और मजबूत भरोसा होता है ! जी हाँ मैं भी उन 5% में से एक हूँ , जिसको अपने 39 साल के अनुभव और रिसर्च पर मजबूत और पक्का भरोसा रहता है !
लंबी अवधि के निवेशकों की रोज़ -रोज़ पोर्टफोलियो की वैल्यू देखना , शेयर बाज़ार की सबसे बड़ी मूर्खता साबित होती है !
🔱
सालासर बालाजी की मंगला आरती के दिव्य दर्शन | 29 अगस्त 2026 शनिवार ✨
पावन धरा Shree Salasar Balaji Mandir, राजस्थान से श्री सालासर बालाजी की दिव्य संध्या आरती के अलौकिक दर्शन। जब आरती की लौ जलती है और “जय बजरंगबली” की गूंज उठती है, तब हर भक्त्त का मन श्रद्धा और विश्वास से भर जाता है।
गुरुवार की इस विशेष संध्या आरती में हनुमान जी के चरणों में समर्पित प्रार्थना जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
Salasar Dham की यह दिव्यता हर भक्त को आध्यात्मिक शांति और आशीर्वाद प्रदान करती है।
🙏 कमेंट में लिखें “जय सालासर बालाजी” और इस पावन आरती को अपने प्रिवजनों के साथ शेयर करें। अधिक लाइव दर्शन और आध्यात्मिक अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।
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हमारे पूर्वांचल में कहते हैं कि बहन के आशीर्वाद से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। तभी तो कोई भी शुभ काम बहन और बेटियों के बिना पूरा नहीं माना जाता। जिस घर में माँ और बहनों का सम्मान होता है, उस घर में हमेशा सुख और समृद्धि का वास होता है।
हमारे घर में भी इस बात को हमेशा माना गया है। इसीलिए वैसे तो हम तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ा मैं ही हूँ, लेकिन जब बात आती है कि सबसे ऊपर किसका हुक़्म चलेगा... तो हमारी लाडली बहन सुमन अपने आप सबसे बड़ी बन जाती है! और हम कितने भी बड़े हो जाएँ, एक-दूसरे के साथ हमेशा बच्चे ही बने रहते हैं।
बचपन की वो खूबसूरत यादें आज भी हमारे साथ हैं। अब जब माँ और बाउजी नहीं रहे, तो लगता है कि बचपन का वो घर हम भाई-बहनों में ही बसता है। त्योहारों पर जब हम सब मिलते हैं तो फिर से उन्हीं दिनों में वापस चले जाते हैं, जब सारा परिवार एक साथ ख़ुशियाँ मनाता था।
सुमन, राखी का यह धागा हमारे इसी बंधन को और मज़बूत करे, तुम हमेशा ऐसी ही हँसती-मुस्कुराती रहो!
आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ!