महाराष्ट्र में पूर्णा नदी पर हिंगोली और परभणी ज़िलों को जोड़ने वाला एक पुल सड़क से शुरू होता है मगर ख़त्म होता है एक खेत में जाकर. आख़िर ऐसा कैसे हुआ?
रिपोर्टः श्रीकांत बंगाले
कैमराः किरण साकले, अमोल लंगर
एडिटः अरविंद पारेकर
On her punyatithi, we pay our heartfelt tributes to the Former Delhi Chief Minister Sheila Dikshit, who profoundly transformed the city.
Her visionary leadership, progressive policies, and unwavering dedication to the well-being of its citizens created a lasting legacy of inclusivity and growth.
@umakantlakhera अशोक श्रीवास्तव एक सांप्रदायिक, धूर्त और विक्षिप्त व्यक्ति है। Rss के लोगों को प्रसन्न करने के लिए ये किस सीमा तक जा सकते हैं ये प्रोग्राम एक नमूना है। प्रसार भारती स्वायत्त संस्था है, लेकिन इस तरह के लोगों ने दूरदर्शन जैसी संस्था को हरेक बुराइयों का केंद्र बना दिया है।
गोडसे की तारीफ़ करने वाली प्रोफ़ेसर को NIT कालीकट में डीन बनाया गया…
• महात्मा गांधी की पुण्य तिथि ( 2024 ) पर गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की प्रशंसा करने वाली राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान ( NIT) कालीकट की प्रोफेसर डॉ. ए.शैजा की संस्थान के डीन के रूप में नियुक्ति की गई है। डॉ. शैजा वर्तमान में NIT कालीकट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर हैं। 2024 में गांधी की पुण्यतिथि पर उन्होंने फेसबुक पर पोस्ट किया, ‘भारत को बचाने के लिए गोडसे पर गर्व है।’ डॉ. शैजा ने लिखा था, ‘हिंदू महासभा कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे, भारत में कई लोगों के नायक।’
RSS देश के शिक्षण संस्थानों पर पूर्णतः नियंत्रण के निकट है। भारत में कौन सा मीडिया संस्थान इस पर ‘बहस’ करेगा?
बीजेपी के अध्यक्ष नड्डा जी ने राज्य सभा में ख़ुराफ़ाती भरा सवाल पूछा है कि मालूम नहीं कब और क्यों संविधान से ऐतिहासिक चित्र हटा दिए गए हैं। बीजेपी इसे बाबा साहब का अपमान बता रही है।
अब बीजेपी के नेताओं को मासूम कहें या अज्ञानी, मालूम नहीं। क्योंकि चित्र तो कभी भी हटाए नहीं गए। आज भी लोक सभा सचिवालय से जो मूल संविधान की प्रति मिलती है, वो सचित्र कॉपी है। आख़िरी बार ये मूल प्रति की कॉपी 2018 में, मोदी सरकार के दौरान ही छापी गई थी।
पर हाँ नड्डा जी, ये सच है कि आपको या आपकी पार्टी के लोगों को वाक़ई नहीं पता होगा कि बिना चित्र वाली आम प्रति क्यों छापी गई। ऐसा इसलिए कि RSS तो तब संविधान का विरोध करने में व्यस्त थी। लेकिन हम कांग्रेस वालों को पता है, क्योंकि संविधान हमारा बनाया हुआ है। इसका प्रचार भी हमने ही किया है।
सच ये है कि 1950 में जब संविधान लागू हुआ, तब तक आधुनिक लिथोमेन वेब ऑफसेट प्रिंटिंग का आविष्कार ही नहीं हुआ था।
तब जो लिथोग्राफिक ऑफ़सेट मशीन चित्रों की प्रिंटिंग कर सकती थी, उस पर विश्व युद्ध के कारण प्रतिबंध था। ये मशीनें केवल सैन्य उपयोग के लिए थीं, जो नक्शे, टैंक, सैन्य उपकरण, हवाई जहाज़ के डिज़ाइन छापने के लिए इस्तेमाल होती थी।
ब्रिटिश भारत में ये मशीन सर्वे ऑफ़ इंडिया के पास थी। इस संस्थान की हाथीबड़कला ब्रांच, देहरादून में R. W. Crabtree and Sons कंपनी की Sovereign और Monarch मॉडल की मशीनें थीं, जो संविधान पर की गई महीन चित्रकारी को अच्छी तरह छाप सकती थीं।
इसीलिए, लॉ मिनिस्टर बाबा साहब अंबेडकर ने सर्वे ऑफ़ इंडिया की इस ब्रांच को संविधान की मूल प्रति की 1000 कॉपी छापने का निर्देश दिया। इन में एक कॉपी पिछले साल ₹48 लाख में बिकी है। लेकिन नड्डा जी, इन में से एक भी कॉपी आपके लोगों के पास नहीं होगी, क्योंकि तब RSS के लोग तो विरोध में थे। इसलिए निश्चित ही उन्होंने कोई कॉपी संग्रहीत नहीं की होगी।
लेकिन लॉ मिनिस्टर बाबा साहेब अंबेडकर के सामने लेकिन एक दूसरी चुनौती थी। संविधान बन तो गया था, लेकिन उसकी जानकारी लोगों तक भी पहुँचानी थी। पत्रकार, राजनेता, जज, वकील, बुद्धिजीवी सभी को नए संविधान की ज़रूरत थी। तब इंटरनेट भी नहीं था कि बाबा साहेब उस पर एक कॉपी डाल कर निश्चिंत हो जाते। महँगी लिथोग्राफ़िक प्रिंटिंग से हज़ारों कॉपी छापना न तो तुरंत संभव था, न ही ये सभी लोग वो महँगी कॉपी ख़रीद सकते थे। इसीलिए, डॉ. अम्बेडकर के मंत्रालय ने ही, उन्हीं के वक़्त में, संविधान के सस्ते text edition छापने का फ़ैसला किया, जो उस समय के आम प्रिंटिंग प्रेस में आसानी से छाप सकते थे। लोगों को संविधान की कॉपी सुलभ करने के लिए ही बिना चित्र वाली कॉपियों का चलन शुरू किया गया।
वैसे बीजेपी ने ये विवाद उठा कर शायद अच्छा ही किया है। अब लोगों को पता तो चला की नेहरू-अंबेडकर के नेतृत्व में और कांग्रेस की सोच के अनुसार जो संविधान बना है उसमें भगवान राम का चित्र भी है, बुद्ध का भी है। गुरु गोविंद सिंह का भी है, महावीर का भी है। उसमें अशोक, गुप्त राज, विक्रमादित्य, शिवाजी, अकबर के चित्र भी हैं। संविधान में रानी लक्ष्मी बाई, टीपू सुल्तान भी हैं।
और शायद बीजेपी के लोगों को जान कर झटका लगे, महात्मा गाँधी के साथ साथ नेता जी सुभाष चंद्र बोस को संविधान में जगह दे कर नेहरू-अंबेडकर ने उनकी याद को अमर बना दिया था। नोआखली दंगों में गाँधी जी के शांति कार्य भी संविधान के पन्नों का हिस्सा है।
विख्यात आर्टिस्ट नंदलाल बोस और उनकी टीम ने भारत के 12 इतिहास खंडों को संविधान के पन्नों पर उकेरा है। लिखावट प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा की है। ये इतिहास खंड हैं: मोहनजोदड़ो, वैदिक काल, महाभारत काल, महाजनपद काल, नंद काल, मौर्य काल, गुप्त काल, मध्य काल, मुगल काल, ब्रिटिश काल, आज़ादी का आंदोलन, क्रांतिकारी आंदोलन और भारत के प्राकृतिक चिह्न।
ऐसा इसलिए किया था, क्योंकि कांग्रेस के लिए भारत का सुनहरा इतिहास मोहनजोदड़ो और वैदों से शुरू हो कर वर्तमान तक आता है। RSS के तरह नहीं! ज़्यादा समझना हो तो नेहरू जी की ‘भारत एक खोज’ पुस्तक पढ़ लीजिये, जो उन्होंने जेल में लिखी थी।
बाक़ी, नीचे थ्रेड में संविधान के चित्रों का अवलोकन ज़रूर कीजिए।
1/n
@INCIndia@kharge@RahulGandhi
आज देश के प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को संवारने वाली NTSE छात्रवृत्ति तीन साल से बंद है।
मुझे भी यह स्कॉलरशिप 1978 में मिली थी और एमफिल तक साथ रही। सिर्फ़ ₹40 करोड़ में इसे जारी रखा जा सकता था, जबकि मोदी जी के ‘परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम’ पर ₹62 करोड़ खर्च हुए।
शिक्षा मंत्री से पूछिए—NTSE क्यों बंद है? #RestoreNTSE
पढ़ें देशबंधु का आलेख— अरविंद कुमार सिंह
बेलगांव गांधी और कांग्रेस
कर्नाटक का बेलगांव नगर वैसे तो हाल के दशकों में महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच जोर-आजमाइश का केंद्र बना हुआ है
https://t.co/hqtPF8O6vb
@nishikant_dubey आपको स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास की जानकारी होती तो इस तरह की टिप्पणी नहीं करते। जगह कांग्रेस ने खरीदी, स्मारक कांग्रेस ने बनाया तो उसका अध्यक्ष और कौन होता। अब उसे सरकार ने जबरिया हथिया लिया । अभी आप लोग दुष्प्रचार में लगे हैं। लेकिन इतिहास बदला नहीं जा सकता।
कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान ढांचे को मजबूती देने के लिए केंद्र ने 2291 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है। लेकिन, छोटे किसानों के साथ यह तंत्र आखिर कब खड़ा होगा?
पूरी खबर पढ़ें- https://t.co/ADc9TKNMpL
#Agriculturesector#SmallFarmers#Education@AgriGoI@icarindia
हम बटे तो ये इरफ़ान, अंसारी, आलम हमे लूट ले जाएँगे- असम के बीजेपी के मुख्यमंत्री झारखंड चुनाव में
आधिकारिक रूप से हमारा चुनाव आयोग इस तरह के सीधे सांप्रदायिक बंटवारे के आधार पर वोट मांगने के प्रयास को दंडित करने के लिए प्रतिबद्ध है!