@GurujiCom1 अरे मंत्री जी चीन बॉर्डर पहुंचे
यह तो ईरान और अमेरिका युद्ध भी रुकवा सकते हैं
कितने अच्छे उनके विचार हैं
कितने अच्छे आइडिया देते हैं
यही न्यू इंडिया है
PM आवास घेरने पहुंचे कांग्रेस नेता हिरासत में!
कन्हैया कुमार, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखविंदर सिंह सुक्खू और दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।
सिर फोड़ोगे, हिरासत में लोगे... लेकिन ये आवाज़ बंद नहीं होगी! ✊
यह लोकतांत्रिक विपक्ष है। भारत के युवा अपने विपक्ष के नेता से यही चाहते हैं।
#DharmendraPradhan #CJPProtestUpdate #NEET #DharmendraPradhan | Cockroach Janta Party | Parliament | Education Minister | Prime Minister | GenZ |
इन सुरक्षा कर्मियों को किसने कहा था इस धरना प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए खुद के डंडे से गाड़ियों के शीशे तोड़फोड़ करो ??
क्या यह आदेश गृहमंत्री अमित शाह जी को पता हैं ??
पब्लिक सेक्टर में नौकरी करने के बाद पब्लिक सेक्टर खत्म करने वाली सरकार का समर्थन करना मानसिक दिवालियापन दर्शाता है
नागरिकों के नागरिक कर्तव्य को खत्म करके हर मसले को
यह सरकार और उसके पेरेंट्स ऑर्गेनाइजेशन से जोड़कर देखते हैं
@PraveenDavar@BhupendraAgam
Alongwith @digvijaya_28 addressing a meeting of intelligentsia org by MPCC Vichar Vibhag. While the fmr MP CM recalled the Hindu tradition of Insaniyat and respect for all religions, I gave instances of cordial relations of Pt. Nehru with Patel and Netaji.
जंतर-मंतर के आमरण अनशन में नहीं जाकर कांग्रेस सही कर रही है. उसे मालूम है इसके खतरे. कल ये कांग्रेस शासित राज्यों में शुरू हो जाएगा.
ये असंवैधानिक तरीका है कि मेरी बात मानो, वरना मैं पानी टंकी से कूद जाऊंगा. खुद को आग लगा लूंगा. भूखे रहकर जान दे दूंगा.
परिवार हो या सरकार, किसी को भी ऐसी धमकियों या ब्लैकमेलिंग के सामने नहीं झुकना चाहिए.
मुझे पता नहीं सरकारें क्या सोचती है. पर मैं, निजी तौर पर, सख्त खिलाफ हूं. बाबा साहब मेरे मार्गदर्शक हैं.
बाबा साहब ने कहा है कि ये 'अराजकता' को निमंत्रण है.
एक बार ये रास्ता खुल गया तो लोकतंत्र नहीं बचेगा, और इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होगा, जिनको सब कुछ संविधान और लोकतंत्र से मिला है.
माननीय पीएम मनमोहन सिंह ने पूरे 10 साल इरोम शर्मिला को आमरण अनशन करने दिया. पर मांग नहीं मानी. नाक में नली डालकर पोषण दिया. लेकिन जिद के आगे नहीं झुकी थी सरकार.
वैसे इरोम ने 16 साल का अनशन तोड़कर विधानसभा चुनाव लड़ा और उन्हें 90 (नब्बे) वोट मिले. उनको भ्रम था कि जनता उनके साथ है.
जनता और सरकार निरंतर संवाद में रहें. जो सही हो वो मांगें माननी चाहिए. पर इसलिए नहीं कि कोई टंकी पर चढ़कर कह रहा है कि कूद जाऊंगा.
“सुन लो सत्ता के घमंड में बैठे लोगों…OBC समाज अब चुप बैठने वाला नहीं है।
@BJP4MP@BJP4India@AmitShah@drmohanoffice51@narendramodi@DrMohanYadav51@GaneshSingh_in
द्वारा पिछले सात साल से हमारे 27% आरक्षण को अदालतों और फाइलों में घुमाया जा रहा है।
कभी हाईकोर्ट… कभी सुप्रीम कोर्ट… फिर वापस हाईकोर्ट… आखिर कब तक?
10 मई 2026, भोपाल सिर्फ आंदोलन नहीं होगा —
यह हक़ और हिस्सेदारी की हुंकार होगी।
जिस समाज की आबादी सबसे ज्यादा,
उसी समाज को अधिकार देने में इतनी देरी क्यों?
हम पूछते हैं —
भर्ती रुकी क्यों?
पद होल्ड क्यों?
27% आरक्षण लागू पूरी ताकत से क्यों नहीं?
हाल ही में मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा निगम मंडल के अध्यक्षों की नियुक्तियां प्रदान की गई है
इन नियुक्तियां को देखने के बाद ऐसा महसूस होता है की कुशवाहा समाज और ओबीसी समुदाय को विशेष रूप से उपेक्षित रखा गया है
@DrMohanYadav51@BJP4OBCMorcha@NitishKumar
जबतक RJD मजबूत थी, नीतीश कुमार मजबूत थे, भाजपा जब भी आँख दिखाती थी, कूद के इधर आ जाते थे।
राजद कमजोर हुई, नीतीश कुमार खत्म ही हो गये।
लालू जी ने सिर्फ खुद 15 साल राज नहीं किया, नीतीश जी को 20 साल राज करने का रास्ता भी तैयार किया।
समाजवादी राजनीत को समझने वाले कुर्मी मित्र लोग उस दिन ज्यादा दुखी थे किसी भी राजद कार्यकर्ता से जिस दिन राजद की 25 सीट आई थी।
उनको उस दिन ही समझ में आ गया था कि चाचा अब खत्म हो चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश सरकार 13 % होल्ड पदों को अनहोल्ड कर सकती है लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है क्योंकि यह ओबीसी विरोधी RSS के द्वारा पोषित मनुवादी सरकार है ओबीसी भाइयों RSSछोड़ो
बीते 10 दिनों में एक तरफ प्रधानमंत्री को जाति के नाम पर खुलेआम अपमानित किया गया, फिर भी न FIR—न टीवी डिबेट, न कोई कार्रवाई। दूसरी तरफ अगर बहुजन समाज सड़क पर उतरे तो वही पुलिस, वही मीडिया तुरंत “कानून-व्यवस्था” का डंडा उठा लेता है।
असली मुद्दा साफ है: कैंपसों में SC-ST-OBC के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार बढ़ रहे हैं, पर बहस को नोटिफिकेशन और झूठे डर से भटका दिया गया। समाधान भी साफ है—जाति जनगणना, पारदर्शी नियम, और न्याय की गारंटी।
चिमटा चिनमिना रहा है
लगता है मनुस्मृति और बंच ऑफ़ थॉट एक साथ पढ़ लिया है।
क्या ऐसे ही लोग भारत को विश्व गुरु बनाने की सोच रहे हैं
कहां गए समरसता के पैरोंकार
@DrLaxman_Yadav@ObcMahasabha_@AdvRajendraPal
ज़रा सोचिए, सोशल मीडिया से आजीविका चलाने वाला व्यक्ति खुले मंच पर किसी मंत्री को गाली दे सकता है। ऐसी मानसिकता के लोग जब विश्वविद्यालयों में होते हैं, तो वंचित समाज के छात्रों के साथ उनके व्यवहार की कल्पना करना मुश्किल नहीं है।
उच्च शिक्षण संस्थानों मे व्याप्त जातिगत असमानता,भेदभाव, उत्पीड़न को रोकने के लिए यूजीसी इक्विटी बिल 2026 आया है जिसे promotion of equality in higher education institutions regulation 2026भी कहा जा सकता है, 15जनवरी 2026से लागू हो गया है, जिस पर समाज का श्रेष्ठि वर्ग और उनको खाद-पानी दे रहे जातिवादी तत्व सोशल मीडिया से लेकर सामाजिक धरातल पर गदर काटे हुये हैं,ध्यान दीजिये ये वही लोग हैं जो वर्णाश्रम व्यवस्था,सनातन की जय-जयकार एवं संविधान का धिक्कार करते हैं। यूजीसी के इस समतावादी कानून मे एससी एसटी तो पहले से शामिल थे, अब इसमे ओबीसी,दिव्यांग, ईडब्ल्यूएस को शामिल कर इसे समावेशी बनाने की पहल की गई है।इस तरह का विरोध बे लोग कर रहे हैं जो अनुच्छेद 18 का खुलेआम उल्लंघन करते हैं और अन्याय को परम्परा मान लिये हैं, संविधान की लाठी भी इनके छद्म श्रेष्ठताबोध का उन्मूलन नही कर पा रही, यूजीसी की ओर से संसदीय समिति एवं सुप्रीम कोर्ट मे जो डाटा पेश किये हैं उसके मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों मे 2019-20 से 2023-24 तक 118.4%शिकायतों मे वृद्धि हुई है जातिगत भेदभाव की,यानि शिकायतों की संख्या 173 से 378 तक पहुंच गई हैं, क्या ये विश्वगुरु के लिए चिंताजनक स्थिति नही है?क्या हम व्यवस्था के विषधरों के आगे रोहित वेमुला,पायल तड़वी, मुत्थू कृष्णन, सुनील देवांगन जैसे होनहार बच्चो को जिंदगी से हाथ धोते हुये देखते रहें?मुझे याद है जब मंडल आयोग की रिपोर्ट 1990 मे व्हीपी सिंह ने लागू की थी उस समय भी पिछड़ा वर्ग ने चुप्पी साध ली थी और आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है,मुट्ठीभर वर्चस्ववादी समूह के लोग अपने जातीय वर्चस्व को टूटता देख सड़कों पर उतर आये हैं और हम इस यूजीसी बिल 2026के समर्थन मे खुलकर मैदान मे नही आ रहे हैं,सनद रहे!"अगर चुप रही जबान-ए खंजर तो लहू पुकारेगा आस्तीन का"।इस बिल की खासियत ये है कि इसमे एक इक्विटी कमेटी होगी जिसमे एससी,एसटी,ओबीसी,महिला एवं दिव्यांग समूह से सदस्य होंगे,एक ईओसी (equality opportunity center)होगी,24×7शिकायत निवारण केन्द्र होगा,प्रत्येक छ माह मे बैठक कर प्रतिवेदन यूजीसी को भेजना होगा, अन्यथा उस संस्थान, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय की मान्यता,संबद्धता खत्म की जा सकेगी, फंडिंग रोकने, ग्रेडिंग निर्धारण मे इन मानकों के क्रियान्वयन को कसौटी पर कसा जायेगा।यूजीसी ने फर्जी शिकायत (fake complaint)वाला डराने वाला प्रावधान हटा दिया है ताकि पीड़ित चुप न हो और भेदभाव को अपनी नियति न मान ले। गाजियाबाद की डासना पीठ के यति नरसिंहानन्द गिरी,एवं बाबा साहब अम्बेडकर का अपमान करने वाला आनन्दस्वरूप जैसे मठाधीश भी अपना मूल काम छोड़कर यूजीसी के नये नियम का विरोध कर रहे हैं तब एससी,एसटी,ओबीसी के लोग कौन से पीले चावल का इंतजार कर रहे हैं?याद रखें जो कौम अपने हक-अधिकारों के लिये मुंह नही खोल सकती, अन्याय अत्याचार उसकी नियति बन जाती है। I SUPPORT UGC
मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा संरक्षित एडवोकेट जनरल और तुषार मेहता की टीम पिछड़े वर्ग विरोधी अभियान में शिद्दत से काम कर रही है
यहां सवाल सरकार की मंशा का है जो की इसके पैरेंट ऑर्गनाइजेशन के द्वारा निर्धारित होता है
@AdvRajendraPal@ObcMahasabha_@NitishKumar
OBC के साथ बीजेपी द्वारा हमेशा छल किया गया, 20 वर्षों की सरकार में OBC को केंद्रीय स्तर पर मिलने वाले 27% आरक्षण का लाभ न देकर सिर्फ 14% दिया गया।
2019 में कांग्रेस सरकार द्वारा 27% कानून बना दिया उसको भी 7 वर्षों से लागू नहीं किया।
“सुप्रीम कोर्ट में तुषार मेहता की दलीलें
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को तुरंत लागू कराने की दिशा में
न तो स्पष्ट हैं, न ही निर्णायक।
नतीजा वही — ओबीसी को सिर्फ़ तारीख़ पे तारीख़।”
“अगर केंद्र सरकार सच में ओबीसी आरक्षण के पक्ष में है,
तो सुप्रीम कोर्ट में उसके वकील की दलीलों में 27% आरक्षण को लागू कराने की ठोस इच्छा क्यों नहीं दिखती?”
#MP_13_प्रतिशत_ओबीसी_अनहॉल्ड_करो #OBCReservation
यह पिछड़े वर्ग का व्यक्ति है भूल गया है कि इस आर्गेनाइजेशन में केवल सुना और सुनाया जाता है बोलने का हक नहीं है
असहिष्णुता और मनुवाद का पोषण इनका नैसर्गिक गुण है
@AdvRajendraPal@ObcMahasabha_@NitishKumar@kpmaurya1
ओबीसी के होल्ड अभ्यर्थियों ने अपना दर्द जब RSS के मंच से जैसे ही OBC के अधिकार और सामाजिक न्याय की बात उठाई, उसे मंच से उतार दिया गया।
यही @RSSorg का असली चेहरा है। यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है,
बल्कि यह बताती है कि OBC, SC–ST के सवाल इन्हें असहज करते हैं। क्योंकि सामाजिक न्याय की बात होते ही वर्चस्व की राजनीति हिलने लगती है।
अगर OBC की आवाज़ उठाना अनुशासनहीनता है,
तो सवाल यह है—अनुशासन किसके लिए और किसके खिलाफ सामाजिक समरसता के नारे मंच तक ठीक हैं।लेकिन हक़, हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व की बात आते ही माइक बंद, मंच बंद, आवाज़ बंद।
यह साफ़ है—
RSS को सामाजिक न्याय नहीं, सामाजिक नियंत्रण पसंद है।उन्हें बहुजन समाज की भागीदारी नहीं,,, सिर्फ उसकी मौजूदगी चाहिए।लेकिन अब समय बदल रहा है।।OBC समाज सवाल पूछेगा,
मंच मिले या न मिले—सच बोला जाएगा।