छोटे क़स्बों की इस जुगल-जोड़ी को सफ़र के एक पड़ाव पर पहुँचने की बधाई,जिसने अपनी हिम्मत-साधना-ज़िद और जुनून को सपनों के बड़े हो जाने तक एकपल के लिए नहीं छोड़ा ! उम्मीद है कि देश ने जो प्यार-शोहरत और इज़्ज़त आप को दी है उसे आप समाज व देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों निभाकर लौटाएँगे
बिहार के पास क्या नहीं है! हल्दी छपरा गाँव, मनेर में गंगा-सोन-सरयू के पवित्र संगम पर सूर्यास्त देखना एक अद्भुत अहसास था। स्थानीय मान्यताओं और रामायण, पुराण इत्यादि के अनुसार यह संगम प्रयाग संगम से भी ज़्यादा महत्व का है। लेकिन दशकों से पर्यटन के विकास की बस बातें हैं।