असम जहां मुसलमानों से बेइंतहा नफ़रत दिखाई गई, जहां मुसलमानों को सबसे बदतरीन हालत में दिखाया गया आज वहीं के मुसलमान सैलाब में डूबे और आर्थिक लिहाज़ से बर्बाद होने वाले हिंदू गांव वालों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहें हैं..
असम में विधायक बदरुद्दीन अजमल साहब ने अभी हाल ही में 100 करोड़ का राहत का सामान देने का ऐलान किया वहीं मोहम्मद कैफ़ और हुसैन मंसूरी जैसे लोग भी लगातार वहां मदद में लगे हैं लेकिन अफ़सोस इस ख़बर के बारे में ना ही कहीं शोर है और ना बात हो रही है
आज इलाहाबाद हाई कोर्ट में जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर मोहम्मद आज़म ख़ान और उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्लाह आज़म की जमानत की मांग की जाने वाली याचिका पर सुनवाई होनी थी लेकिन जस्टिस विक्रम डी चौहान ने सुनवाई के वक़्त ख़ुद को सुनवाई से अलग कर मामले को मुख्य न्यायधीश को ट्रांसफर कर दिया।
जज साहब ने 15 जुलाई को सुनवाई की थी और अगली तारीख़ 6 अगस्त दे दी, आज़म ख़ान के वकीलों और परिजनों ने 20 दिन इंतिज़ार किया और आज अदालत पहुंचे तो जज साहब ने बिल्कुल मौके पर ख़ुद को सुनवाई से अलग कर लिया, जज साहब चाहते तो मामले को पिछली तारीख़ यानी 15 जुलाई को ही इस मामले से अलग कर सकते थे ताकि अब तक मामला की सुनवाई हो जाती, लेकिन साहब ने ऐसा नहीं किया क्योंकि मामले को खींचना भी था।
ख़ैर जज साहब की मामले से दूरी बनाने की मजबूरी जो भी रही हो लेकिन साफ़ जाहिर है कि अदालतों में सरकारों का खौफ़ है, इसलिए जज अब मामलों से दूरी बनाना ही बेहतर विकल्प समझते हैं, और यह दूरी उन्हीं केसों में बनाई जाती हैं जिनमें पहली ही सुनवाई में जमानत देने का आधार बनता हैं लेकिन दबाव के कारण जज फ़ैसले देने का भी फैसला नहीं ले पा रहे हैं, और फैसला लिया जाता है तो मामलों से दूरी बनाने का।
यह पहला मामला नहीं जब किसी जज ने आज़म ख़ान और उनके बेटे के मामले की सुनवाई से दूरी बनाई हो, इससे पहले 21 नवंबर 2025 को यतीमखाना केस में भी जो कि आज़म ख़ान से ही जुड़ा हुआ था, उसकी सुनवाई से भी जज समीर जैन ने ख़ुद को अलग कर मामले को मुख्य न्यायधीश के पास भेज दिया था।
साबित हैं जज साहब आज़म ख़ान के मामले को भांप चुके हैं जिसमें आज़म ख़ान और उनके बेटे को बरी या जल्द जमानत देने के अलावा कोई रास्ता नहीं था, लेकिन जज साहब ने जमानत न देकर ख़ुद को मामले की सुनवाई से अलग कर मुख्य न्यायधीश के पास भेजना मुनासिब समझा। अगर जज साहब को इस मामले से ख़ुद को अलग ही करना था तो अलग होने वाला फैसला कई महीनों में क्यों लिया गया? क्यों न ख़ुद को मामले की शुरुआत या जब मुख्य न्यायधीश ने अदालत में भेजा था उसी दौरान क्यों नहीं लौटाया गया? अब नागरिक अदालतों का नहीं बल्कि अदालत ही नागरिकों का समय बर्बाद करती हैं, अदालत का नागरिक समय बर्बाद करता है तो अदालत द्वारा नागरिकों पर जुर्माना और FIR तक दर्ज कर देती हैं लेकिन नागरिकों अगर अदालत ही नागरिकों का समय बर्बाद करें तो किस पर जुर्माना और किस पर FIR होनी चाहिए यह भी अदालतों को बताना चाहिए।
आओ आओ यूसुफ पठान, दीदी आप सबको माफ कर देंगी.
TMC के भूले भटके सांसद सब घर वापस आ रहे हैं.
सांसद यूसुफ पठान
सांसद खलीलुर रहमान
सांसद अबु ताहेर खान के साथ कई और सांसद भी नई पार्टी NCPI को छोड़कर दीदी के TMC में आ रहे हैं.
अमित अंकल की गजब बेइज्जती दीदी...Open news
कांवड़िये नशेड़ी हैं, कांवड़िये भंगेड़ी हैं, कांवड़िये आतंकवादी हैं। यह सब बताने के लिए @MSajidRashidi को भेजा गया है। पता है क्यों भेजा गया है? ताकि बहस का रुख ही बदल जाए, विषय बदल जाए, मुद्दा बदल जाए। कांवड़िये नशेड़ी हैं, या भंगेड़ी हैं, अगर यह बात कोई ‘साधु’ कहता तो कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यह बात ‘मौलाना’ से कहलवाई जा रही है। ताकि ‘दूसरा’ रंग दिया जा सके।
सिर्फ़ 4 घंटों में,
व्यूज़ –– 187 मिलियन
लाइक्स –– 22.8 मिलियन
रिप्लाई –– 1.5 मिलियन (88% पॉजिटिव)
RaGa पर बने एडिट्स पोस्ट करने वाले किसी भी इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर के लिए ज़बरदस्त रीच।
एक बार फिर हिंदुओं से अनुशासन सीख लीजिए भैया, मेरठ का NH 58 पूरी तरह जाम कर दिया है बंद कर दिया है क्योंकि कांवड़ियों द्वारा तेज़ आवाज़ के साथ DJ बजा डांस किया जा रहा है।
एक देश में दो कानून
एक तरफ मुसलमानो को 5 मिनिट नमाज पढ़ते पर लाते मारी जाती है
दूसरी सड़क पर नंगा नाच किया जाता है आज लगाई जाती है तांडव किया जाता है लेकिन कोई कारवाई नही होगी
मुम्बई में पुलिस वैन के सामने खड़ी होकर 20 बच्चों को पुलिस की ग़ैर क़ानूनी हिरासत से छुड़वाने वाली भारत की होनहार बेटी रिया के साथ कई सारे वो प्रदर्शनकारी साथी नेता प्रतिपक्ष राहुल गॉंधी जी से मिले जिनको सरकार डराने की कोशिश कर रही है।
@RahulGandhi
देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!
सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से भी फायरिंग की गई।
जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। #Bihar
"मैं बिहार सरकार को चेतावनी देता हूं कि यदि कल तक आंदोलन के दौरान जिन लोगों पर FIR दर्ज की गई है, उन्हें वापस नहीं लिया गया, तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।"
~तेजस्वी जी
सम्राट जी, संभव हो तो बुद्धि ठीक कर लीजिए वरना इस बार आंदोलन का गवाह बिहार बनेगा!
आज़म खान से आपकी व्यक्तिगत लड़ाई हो सकती है, लेकिन 3,000 छात्रों के भविष्य से नहीं! नक्शा नहीं है तो फाइन ले लो, पर जौहर यूनिवर्सिटी तोड़ी तो यूपी की सड़कें सूनी नहीं रहेंगी।" – नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद @BhimArmyChief की सरकार को दोटूक चेतावनी। 🔥 👇 @priyanshu__63
CJP प्रोटेस्ट के समर्थन में व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाने के आरोप में तीन मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया, मामला असम के लखीमपुर का है। गिरफ्तार युवकों के नाम असराफ़ुल इस्लाम, मंज़ूर रहमान और अब्दुल कासेम हैं। इन मुस्लिम युवकों पर आरोप है कि वे छात्रों के आंदोलन के समर्थन में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश कर रहे थे। चलो मान लेते हैं कि ये प्रोटेस्ट कि तैयारी भी कर रहे हों तो अब सवाल ये उठता है कि अगर किसी ने हिंसा नहीं की, कानून नहीं तोड़ा, और सिर्फ़ लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की तैयारी की, तो क्या उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज देना न्याय है?
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है….
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी से राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने भी छोड़ा टीएमसी का साथ।
टीएमसी पार्टी से पद छोड़ने वाली वह चौथी सांसद हैं।कोयल से पहले भी 3 सांसद पार्टी की सांसदी को को छोड़ चुके हैं।
अभी कोयल मलिक चार महीने पहले ही 6 अप्रैल को टीएमसी से राज्यसभा सांसद बनी थीं।
टीएमसी में आने से पहले कोयल मल्लिक अभिनेत्री रही हैं और उन्होंने राजनीति में कदम रखते ही राज्यसभा सांसद बन गईं।
अब ये भी टीएमसी का साथ छोड़ चुकी हैं।
माना जा रहा है कि ये भी अब बीजेपी के साथ जा सकती हैं।