लाखों की तनख्वाह, हजारों के कपड़े पहनकर बड़े चैनल के कील ठोंकू एंकर और एंकरानी भी ये पत्रकारिता नहीं कर सकते हैं। सरफ़राज ने नकली माइक से असली हकीकत दिखाई है। वो इसलिए कि जब पत्रकार आम जनता की आवाज न होकर , सत्ता के भोंपू बनते हैं तब जनता का पत्रकार बनना लाज़िमी है।
पानी के इस फव्वारे को शिव लिंग कहते हैं ।
सुनो,मेरी कौम के लोगों अपने अपने बाप दादाओं को संभाल कर रखो ये आने वाले कल में हमारे बा�� दादाओं पर भी दावा कर सकते हैं।
#Gyanvapi
ग़लत नहीं कहा था। ये पगड़ियां ब���ंटी ही गई थीं। देख लीजिए। वीडियो में एक लड़का वीडियो बनाने को मना कर रहा है। चुनावों से पहले उत्तर भारत में इस बार ये पोलराईजेशन नहीं कर सके तो दक्षिण भारत में कर डाला। वेट कीजिये पेमेंट कलेक्शन का वीडियो भी शायद दिख जाए।