"तुम जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए आवाज़ क्यों नहीं उठाते?"
यह सुनते ही गाँव के सरपंच ने लड़के को पीटना शुरू कर दिया।
क्या जनरल कैटेगरी के लोगों को अपनी आवाज़ उठाने का भी हक़ नहीं है? 💔😢💔
चित्रकूट का युवा देवा द्विवेदी अब नहीं रहा। चिता जल चुकी। पिता की आँखें सूख गईं। गाँव वाले कह रहे हैं — दो-ढाई महीने पहले फर्जी SC-ST एक्ट का केस लगा, जमानत पर छूटा, फिर भी गाँव-समाज ने जीने नहीं दिया। बेटा बार-बार कहता रहा: “पापा, मेरी गलती नहीं है।” आखिर में शर्म और दबाव इतना बढ़ा कि वो चला गया।
अब सवाल सरकार से है, सिर्फ भावुकता से नहीं:
झूठा SC-ST केस लगाने वाले पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं होती?
जमानत के बाद भी सामाजिक बहिष्कार और दबाव जारी रहे तो पुलिस और प्रशासन कहाँ थे?
18-19 साल के लड़के को “गाँव में मुँह दिखाने लायक नहीं रहा” वाली हालत तक पहुँचाने वाले सिस्टम को कौन जवाबदेह बनाएगा?
एक तरफा कानून जब हथियार बन जाए तो निर्दोष का संरक्षण कौन करेगा?
मुसलमानों ने आकर पुजा रोक दिया
हिंदू परेशान हो गए
क्योंकि यह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र हैं
मेदिनीपुर का पांसकुड़ा
मुस्लमानों के विरोध के बाद भी पुजा पाठ हुआ
क्योंकि BJP सरकार हैं, पुलिस प्रशासन मौके पर आ गई
यदि यहां भाजपा नही होती तो पुजा भी नही होता