#197
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शायर पैदा नहीं बर्फ़ में जमाएँ जाते हैं ,
ज़रूर पड़ने पर शराब में पिंगलाएँ जातें हैं
नशे की ज़िंदगी में कहीं ऐसा डूब जाते हैं,
लोग पुछते हाल और हम बस मुस्कुरा जाते हैं ॥
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#mr_mathur
#186
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आज बाज़ार में नक़ाब की होड़ देखीं ,
कहीं रंग कहीं चित्रकार की आज़माइश देखी ,
लाखों की भीड़ मे एक चेहरे की फ़रमाइश देखी ,
आँखों में पानी लिए दोस्त की उसमें परछाई देखी,
क़ीमत उस नक़ाब की क्या ही देता जनाब,
हम लौट आए खाली,हाथ उठे उसे दुआएँ दे दी॥
#mr_mathur#jounelia
#183
अँधेरी रातों मे लिखनाशौक़ नहीं मजबूरी है,
यही वो पल है जिसमें,रूह की मुझसे दूरी हैं ॥
इसी वियोग रस की गाथा को गुनगुनाता हूँ,
वरना सुना है सबसे,मुझमें कहाँ कोई ख़ूबी है ॥
#mr_mathur