सरकार ने बालिक़ाओं को साइकल तो दे दी मग़र सड़क नहीं दी। अब भला ईन पगडण्डियों पर साइकिल चलाना कैसे संभव हैं।
नोट: यह दास्ताँ हैं गुड़ामालानी तहसील के मौखावा गाँव की।
जहाँ आज़ भी गाँव का मुख्य सरकारी विद्यालय पक्की सड़क के लिए मौहताज हैं।
@Drmanjubagmar
@RajCMO@nitin_gadkari
संघर्ष के पर्याय रहे,रणनीति के शिल्पकार
हंसमुख मुखमंडल,सरल स्वभाव के धारक।
साहित्य के तपस्वी,अनुभवों के धनी प्रखर स्तंभकार हमारे प्रिय सरकारी पावणे
#श्री_बसंत_भादू जी को जन्मदिवस की अनंत कोटि शुभकामनाएँ।
ईश्वर आपको सुदीर्घ आयु,अखंड यश और
निरंतर सृजन का वरदान दें।
@Basant_Barmer
धन्यवाद, शुक्रिया, Thank You, आभार..!!🙏🙏
आप सभी सर्व समाज, 36 कौम के आत्मीय बंधुओं के कारण
#खेजड़ी_बचाओ आंदोलन आज ट्विटर पर टॉप–6 ट्रेंड में पहुंच सका।
यह केवल एक ट्रेंड नहीं यह हमारी आने वाली पीढ़ियों की सांसों की पुकार है।
खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं हमारी संस्कृति, हमारी आस्था और हमारे मरुस्थल की जीवनरेखा है।
अब यह लड़ाई केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी ज़मीन पर इतिहास बनेगी।
2 फरवरी बीकानेर चलो..!!
खेजड़ी बचाओ आंदोलन को अपनी उपस्थिति से शक्ति दो।
आपकी एक मौजूदगी
किसी बच्चे के कल की हरियाली बन सकती है।
ॐ विष्णु ॐ विष्णु
#जय_श्री_राम
#जय_मां_करणी
जय श्री वीर तेजाजी
@PRGBishnoii@ManzuDinesh@Adv_RPSingh04@Subhash_khara@isachchidanandG@ASHOKMBISHNOI@chhail_singh_36@Bhajan_jambhani
@omprakash_goyat
@jigardara@HukmaramJat17@DSaran41@thardesertphoto
2 फरवरी बीकानेर चलो..!!
सभी धर्म-प्रेमी बंधुओं से आह्वान हैं कि अब मौन नहीं आंदोलन चाहिए।
अब शब्द नहीं संकल्प चाहिए।
#खेजड़ी_बचाओ मुहिम को जन-आंदोलन का रूप देने हेतु
एक विशाल धर्म सभा का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 36 कौम के नर–नारी एक साथ खड़े होकर धरती, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का संकल्प लेंगे।
यह केवल एक सभा नहीं हैं
यह प्रकृति के पक्ष में खड़ा होने का ऐतिहासिक क्षण है।
यह अवसर है उस परंपरा को जीवित रखने का,
जिसने खेजड़ली में बलिदान देकर दुनिया को राह दिखाई।
अधिक से अधिक संख्या में पधारकर
अपने बच्चों की साँसों के लिए प्राण-वायु बनने आगे आएँ।
क्योंकि यही हमारी पहचान है
कहे अमृता निज धर्म की आण
सिर साठे रुख रहे तो भी सस्तो जाण..!!
2 फरवरी बीकानेर चलो..!!
धरती के लिए
भविष्य के लिए
जीवन के लिए।
2 फरवरी बीकानेर चलो, बीकानेर चलो
सर्व समाज के बंधुओं 🙏
अब समय आ गया है कि हम अपने आपसी गिले-शिकवे, छोटे मतभेद और स्वार्थ की दीवारों को गिरा दें।
आज यह लड़ाई किसी एक समाज की नहीं यह हमारे भविष्य की, हमारी धरती की और आने वाली पीढ़ियों की सांसों की लड़ाई है।
बिश्नोई समाज केवल एक जाति नहीं बल्कि प्रकृति की रक्षा का जीवंत संकल्प है।
सदियों पूर्व वैज्ञानिक संत गुरु महाराज जांभोजी ने जिस प्रकृति-केंद्रित दर्शन की नींव रखी
उसका उद्देश्य स्पष्ट था
वन्य जीवों की रक्षा, पेड़-पौधों का संरक्षण और धरती के साथ सह-अस्तित्व।
पिछले पाँच सौ वर्षों में विश्नोई समाज ने न जाने कितनी लड़ाइयाँ लड़ीं
हिरण के लिए, मोर के लिए और खेजड़ी के लिए।
यह कोई कथा नहीं यह बलिदान का इतिहास है जो आज भी हमारी रगों में बहता है।
1730 का खेजड़ली बलिदान
जब सत्ता की कुल्हाड़ी चली तो डर नहीं बलिदान खड़ा हुआ।
अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुषों ने खेजड़ी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
यह केवल एक घटना नहीं यह मानव इतिहास का वह अध्याय है
जहाँ पेड़ बचाने के लिए मनुष्य ने अपना सिर काट दिया।
यह विश्व का सबसे व्यापक, सबसे पवित्र, सबसे साहसी “चिपको आंदोलन” था।
आज वही खेजड़ी फिर खतरे में है।
और अगर आज हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ़ नहीं करेंगी।
अब यह संघर्ष केवल विश्नोई समाज का नहीं रहा
आज उसके साथ 36 कौम खड़ी हैं।
आज यह आवाज़ बन चुकी है धरती की, जंगल की, जीवों की।
आइए..!!
#खेजड़ी_बचाओ मुहिम को जन-आंदोलन बनाएं।
सरकार को यह स्पष्ट संदेश दें
प्रकृति पर अत्याचार अब सहन नहीं किया जाएगा।
याद रखिए
जब खेजड़ी कटती है तो केवल एक पेड़ नहीं गिरता
एक सभ्यता कराहती है, एक भविष्य घायल होता है।
अब या तो हम इतिहास बनेंगे
या इतिहास हमें कटघरे में खड़ा करेगा।
खेजड़ी बचेगी तो जीवन बचेगा।
प्रकृति बचेगी तो मानवता बचेगी।
सतीश विश्नोई ✍️✍️
@RajCMO@Sanjay4India1@PMOIndia
जरा सोचिए जब आस्था भी सवालों के बोझ से टूट जाए तो क्या होगा..??
धार्मिक मंचों से सच्चाई, अच्छाई और सद्मार्ग की सीख देने वाली
लाखों लोगों को ईश्वर भक्ति का पाठ पढ़ाने वाली
मनुष्य जीवन का सार समझाने वाली #साध्वी_प्रेम_बाईसा आज स्वयं जीवन से हार गईं..!!
यह केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है
यह हमारी संवेदनहीन व्यवस्था पर लगा एक प्रश्नचिन्ह है..??
जिन वचनों से उन्होंने अनगिनत टूटे मनों को संबल दिया
जिन प्रवचनों से लोगों को आत्मिक शांति मिली
आज वही साध्वी स्वयं भीतर से बिखर गईं।
क्यों..??
क्योंकि समाज ने उन्हें सुनने से पहले दोषी ठहरा दिया।
उनके निधन के बाद वायरल हुआ एक स्क्रीनशॉट
हमारे सामूहिक चरित्र पर कठोर टिप्पणी है।
जहाँ उन्होंने लिखा
मैंने हमेशा सनातन धर्म के ध्वज को ऊँचा किया लेकिन जब मेरे चरित्र पर लांछन लगाए गए तो न साधु-संतों ने मेरा पक्ष लिया न शंकराचार्यों ने मेरी अग्नि परीक्षा स्वीकार की।
अब मैं इस जगत सराय को अलविदा कह रही हूँ
शायद इसके बाद मुझे न्याय मिल सकें मेरे चरित्र का दाग मिट सके..!!
यह केवल एक पीड़ा नहीं यह उस स्त्री की चीख है
जिसे न्याय से पहले ही समाज ने कठघरे में खड़ा कर दिया।
फेक वीडियो बनाकर
झूठे आरोप गढ़कर
चरित्र पर प्रहार कर
हमने उसे भीतर ही भीतर मार दिया और फिर कहते हैं ईश्वर की इच्छा होगी।
नहीं यह ईश्वर की इच्छा नहीं
यह हमारी सामाजिक क्रूरता का परिणाम है।
आज सवाल केवल साध्वी प्रेम बाईसा की मृत्यु का नहीं है आज सवाल उस सोच का है
जो बिना सच्चाई जाने, बिना सुने, बिना परखे
पत्थर उठा लेती है।
धर्म यदि करुणा नहीं सिखाता तो वह केवल आडंबर है।
आस्था यदि संवेदना नहीं जगाती तो वह खोखली है।
साध्वी प्रेम बाईसा चली गईं लेकिन उनके पीछे छोड़ गईं एक ऐसा आईना
जिसमें समाज को अपना विकृत चेहरा देखना होगा।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
और हमें इतना विवेक दें कि अगली बार किसी निर्दोष को मरने से पहले हम उसे सुन सकें…
समझ सकें और बचा सकें।
सतीश विश्नोई ✍️✍️
🚨 #BREAKING |
2026 की पहली हवाई दुर्घटना
महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान क्रैश में डिप्टी CM अजित पवार समेत चार की मौत..!!🥹
PTI के हवाले से खबर ✅
#Maharashtra | #AjitPawar
यह होती है जीवन की असली कमाई..!!
बाक़ी धन-दौलत तो हर कोई कमा लेता है लेकिन असल मायने यह रखता है कि आपने अपने जीवन में दिल कितने कमाए..??
लाखों की संख्या में लोग उमड़ पड़े थे।
पूरा #बागोड़ा जैसे थम-सा गया था
बाज़ार बंद थे, गलियाँ सूनी थीं किसी के घर चूल्हा नहीं जला और हर आँख में आँसू थे
मानो आँसुओं की एक अदृश्य नदी बह रही हो।
यह सन्नाटा किसी भय का नहीं था यह सन्नाटा था एक अपने के बिछड़ जाने का।
#देवासी समाज की एक शख़्सियत #मेसाराम_देवासी जिन्होंने पद, प्रतिष्ठा या वैभव से नहीं बल्कि अपने व्यवहार, सादगी और प्रेम से लोगों के दिलों में जगह बनाई।
कुछ लोग जीवन में नाम कमाते हैं
कुछ लोग धन कमाते हैं लेकिन विरले ही होते हैं वे लोग जो हर दिल में अपनी याद कमाते हैं।
मेसा राम देवासी उन्हीं विरलों में से थे।
आज जब वे नहीं हैं तो उनकी कमी नहीं
उनकी मौजूदगी का एहसास हर जगह है
हर नम आँख में हर खामोश गली में,
हर उस दिल में जिसने कभी उनका स्नेह पाया था।
शरीर नश्वर है पर प्रेम अमर होता है और जिसने प्रेम बोया हो वह कभी मरता नहीं हैं।
वह लोगों की यादों में उनकी दुआओं में और उनकी सांसों में जीवित रहता है।
दिवंगत आत्मा को कोटिश नमन 🙏🥹
ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे 💐
और उनके परिवार व समाज को
इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
क्योंकि सच यही है कि जीवन की सबसे बड़ी पूँजी धन नहीं लोगों का प्रेम होता है।
आजकल हमारे देश में मेहनत से ज़्यादा महत्व मोबाइल कैमरे को मिल गया है।
जिसके पास कैमरा है वही जज है और जिसके पास इंटरनेट है वही न्यायाधीश..!!
सोशल मीडिया की अदालत में अब डिग्री नहीं देखी जाती ड्यूटी नहीं देखी जाती सिर्फ एक फ्रेम देखा जाता है और उसी एक फ्रेम से पूरा चरित्र बना दिया जाता है।
इसी अदालत में आज बाड़मेर जिला कलेक्टर IAS "टीना डाबी"भी पेश कर दी गईं।
टीना डाबी..!!
जो किस्मत की नहीं कड़ी मेहनत की पैदाइश हैं।
जो संयोग नहीं संघर्ष की मिसाल हैं।
लेडी श्रीराम कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से
स्नातक होना और फिर मात्र 22 वर्ष की आयु में
देश की सर्वाधिक कठिन परीक्षा
#UPSC में प्रथम प्रयास में प्रथम स्थान प्राप्त करना उनकी विलक्षण प्रतिभा को दिखाता हैं।
टीना डाबी प्रशिक्षण काल के दौरान भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति से स्वर्ण पदक प्राप्त कर चुकी हैं।
और फिर सीमांत ज़िले बाड़मेर में जहाँ रेत ही सबसे बड़ा सच है वहाँ उन्होंने बारिश को उम्मीद में बदल दिया।
वर्षा जल संरक्षण को एक आंदोलन का स्वरूप देते हुए सूखे की भूमि पर जीवन की बुनियाद रखी।
इसी अभिनव और जनकल्याणकारी प्रयास के लिए एक बार फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा
राष्ट्रीय सम्मान और दो करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।
लेकिन अफ़सोस…
आज उन्हें ट्रॉल किया जा रहा है ध्वजारोहण के दौरान एक पल के लिए सलामी की चूक के कारण..!!
द खटक के रिपोर्टर अशोक शेरा के अनुसार
ध्वजारोहण के समय स्थिति यह थी कि मीडिया बंधु और कई अधिकारी एक तरफ खड़े थे और लगातार आवाज़ दे रहे थे
मैडम इधर देखिए...इधर देखिए…
अब भला बताइए जिस ओर से कैमरे हों और पाँच लोग एक साथ आवाज़ दें तो कोई भी इंसान पहले उसी तरफ ही देखेगा।
यह कोई राष्ट्रद्रोह नहीं मानवीय स्वभाव है।
#टीना_डाबी ने भी वही किया
पहले मीडिया की ओर मुड़ीं और जैसे ही औपचारिकता समझ में आई तुरंत सही दिशा में घूमकर पूरा मार्च विधिवत पूरा किया।
बस इतनी सी बात लेकिन हमारे सोशल मीडिया के स्वघोषित देशभक्तों ने इसे मुद्दा बना दिया और मुद्दे को हथियार..!!
क्योंकि कुछ लोगों को काबिलियत से नहीं पहचान से परेशानी होती है।
उन्हें अफ़सर से नहीं एक दलित बेटी की उड़ान से डर लगता है।
यह ट्रोलिंग नहीं असहजता है उस समाज की
जो आज भी चाहता है कि प्रतिभा कुछ घरों तक सीमित रहे।
टीना डाबी गलती नहीं टीना डाबी आईना हैं जो दिखा देती हैं कि मेहनत का कोई जाति प्रमाणपत्र नहीं होता और मेधा किसी खानदान की बपौती नहीं होती।
आज जो उन्हें घेर रहे हैं वे कल किसी और को घेरेंगे क्योंकि शोर की उम्र छोटी होती है और काम की उम्र लंबी।
टीना डाबी को इन ट्रोलर्स से डरने की ज़रूरत नहीं हैं क्योंकि जो लोग फ्रेम में जीते हैं वो इतिहास नहीं लिखते।
और जो लोग रेत में पानी उतार देते हैं उनकी सलामी की दिशा इतिहास खुद तय करता है।
स्तंभकार सतीश विश्नोई की कलम से ✍️
@dabi_tina@ashokshera94@TheKhatak
दिलों को जीतने से चलती हैं सरदारियाँ
यूँ थोड़े ही सरों को काटने से राज किए जाते हैं…!! ♥️🫶
ढलती रात ठंडी हवाओं में भी तलबगारों का समुंदर उमड़ा है
हर निगाह अपने लाडले की
एक झलक भर की प्यास लिए खड़ी है।
अब आप इसी मंज़र से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि #केके_विश्नोई नाम की शख़्सियत
लोगों के दिलों में किस कदर रची-बसी हुई है।
मारवाड़ की सियासत को नया सूत्रधार
नया तेवर,नया चेहरा मिल चुका है।
केके विश्नोई अब महज़ नाम नहीं एक मुकम्मल पहचान बन चुके हैं।
अमूमन ऐसा जनसैलाब किसी फिल्मी सितारे, किसी खिलाड़ी या फिर किसी कौमी नेता के लिए देखा जाता है या फिर जातीय सीमाओं में सिमटे किसी ताक़तवर चेहरे के लिए।
मगर तस्वीरों में उभरता यह विराट हुजूम
गुड़ामालानी के विधायक राज्य सरकार के मंत्री
केके विश्नोई के नाम पर उमड़ा है।
बिना किसी भेद, बिना किसी दीवार के।
#बालोतरा जिले के पुनर्गठन के बाद धोरीमन्ना–गुड़ामालानी को बालोतरा में सम्मिलित कराने के पश्चात यह उनका पहला जन-संवाद था।
अपनों से अपने आँगन में...
#जोधपुर से चली यह यात्रा
डोली टोल, कल्याणपुर, बालोतरा,
सिणधरी, पायला कल्ला, नगर टोल
से होती हुई गुड़ामालानी पहुँची।
जहाँ हर मोड़ पर बुलडोज़र से पुष्पवर्षा,
साफ़ों से सम्मान और आँखों में आशीर्वाद था मानो कोई बेटा नेता नहीं
पूरे थार का अभिमान लौट आया हो।
#धोरीमन्ना पहुँचने का समय था चार बजे मगर मोहब्बत की भीड़ ने उन्हें रात साढ़े नौ बजे तक थामे रखा।
करीब पंद्रह हज़ार दिल एक ही नाम की धड़कन बने खड़े थे।
थार की रेत पर ऐसा मंजर इतिहास में विरला ही मिलता है।
यह भीड़ नहीं थी यह भरोसे की इबारत थी।
केके विश्नोई आज महज़ जनप्रतिनिधि नहीं जनभावनाओं के स्थायी निवासी हैं।
जो सत्ता के सिंहासन पर नहीं सीधे लोगों के दिलों में अपना घर बना चुके हैं।
#धन्यवाद_केके_विश्नोई
सतीश विश्नोई ✍️
@kkvishnoibjp