मेरे एक सीनियर हैं। घर से करीब 800 किलोमीटर दूर एक शहर में नौकरी करते हैं। सैलरी लाख रुपए महीने से ज्यादा है। लेकिन चावल, आटा, दाल, मसाले सबकुछ घर से ही ले जाते हैं। कई बार तो इसे ले जाने में बड़ी मसक्कत होती है, क्योंकि बोरी का वजन करीब 40-50 किलो हो जाता था।
मैंने एक बार कहा- सर आप ये सब घर से क्यों ले जाते हैं, जहां रहते हैं वही ले लिया करिए। पैसों का बहुत फर्क तो पड़ना नहीं है। इसके जवाब में वह कहते हैं- राजेश, घर पर मां अकेली रहती हैं, जब वह फोन करती हैं तो यही पूछती हैं कि चावल है, दाल है, या फिर क्या कुछ नहीं है। उन्हें हमारी नौकरी से पहले हमारे खाने की फिक्र रहती है।
सर आगे कहते हैं, वह हमारे लिए कुछ करना चाहती हैं। सोचती हैं कि कैसे मदद कर पाएं। इसलिए जब हम कह देते हैं कि आटा खत्म है तब वह घर में रखे गेंहू को निकालकर अच्छे से धुलती हैं, धूप में सुखाती हैं। फिर उसे चक्की पर पिसवाने जाती हैं। चक्की वाले से यह भी कहती हैं कि अच्छे से पीसना। इन सब कामों में उनका 3-4 दिन चला जाता है। इस दौरान उनकी खुशी को मैंने महसूस किया है।
पैसे के बदले हम राशन तो खरीद लेंगे लेकिन घर से लाने पर मां को जो सुकून मिलता है, वह उन्हें नहीं मिलेगा। कुछ चीजें अपनों के सुकून के लिए करनी चाहिए।
यह सब सुनकर लगता है कि अभी दुनिया में असल उपलब्धि सुकून ही है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम
पहली लाइव रिकॉर्डिंग
1. कृपया इस थ्रेड को ध्यान से पढ़ें और इसे दोस्तों और परिवार के बीच साझा करें, ताकि समाज में जागरूकता फैलाई जा सके और सभी को इस डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचाया जा सके।
बहुत बार लगता है इतनी आबादी वाला देश गुलाम कैसे बना लेकिन सही बना क्योंकि हम जब मोबाइल और रील के गुलाम होकर मानवता भूल सकते है तो कुछ भी संभव है यदि आप आज़ादी को हक समझकर कुछ भी करे तो ऐसी आजादी गलत है भारत को बचाना है तो इन युवाओं को इनसे बचाना होगा अन्यथा आपका अतीत चाहे कितना ही गौरवशाली क्यों ना रहा हो हमारे बर्बादियों की कहानी आने वाले पीढ़ियां सुनेगी
#reel
मेरे 10th क्लास में सबसे कम 53% by Grace आए थे बड़ी मुश्किल से पास हुआ था मुझे लगता है कि जिंदगी में कभी भी बदलाव लाया जा सकता है यदि आपकी लाइफ में चुनौती और आगे बढ़ाने की ज़िद हो तो
आने वाला समय परसेंटेज का नहीं यह होगा की बच्चा भावनात्मक रूप से कितना मजबूत है और वह प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना कैसे करता है... अपने बच्चों को यह सिखाएं की सफ़लता का मतलब मस्ती के साथ आगे बढ़ना भी होता है
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