❎बड़ी कार्रवाई ,
❎कार्रवाई तेज है,
❎फाइलें खंगाली जा रही हैं,
दो महीने से सिर्फ एक ही खोखली स्क्रिप्ट सुनाई दे रही है ,
अगर जांच इतनी ही तेज थी, तो असली मास्टरमाइंड अब तक किस पाताल में छुपा है?
साफ है कि ये एजेंसियां सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़कर खानापूर्ति कर रही हैं।
ये CID को छह महीने तो क्या 6 साल और दे दो, तब भी छोटी मछलियों को ही मोहरा बनाएंगे।
बड़े मगरमच्छों को छूने की औकात किसी में नहीं है, क्योंकि उन्हें सत्ता और रसूख का खुला संरक्षण मिला हुआ है।
इसलिए बड़ी कार्रवाई, जांच तेज का इस ढोंग को बंद करो!
JSSC-CGL गड़बड़ी मामले में CID की कार्रवाई तेज, सचिव से पूछताछ, आयोग कार्यालय में खंगाले रिकॉर्ड
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच कर रही CID ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. शुक्रवार को CID की विशेष जांच टीम नामकुम स्थित JSSC कार्यालय पहुंची. टीम ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की और परीक्षा से जुड़े कई दस्तावेजों की जांच की.
#cid #jssc #jssccgl #jharkhand #ranchinews
जो सोचते हैं कि साज़िशों और गीदड़ भभकियों से @Tigerjairam के तेवर बदल जाएंगे, वो बहुत बड़े वहम में हैं।
सोने के जेवर की चमक और टाइगर के तेवर इतिहास लिखते आए हैं और लिखते रहेंगे। जिसे तकलीफ है रास्ता बदल ले, क्योंकि दहाड़ अब और तेज़ होगी
युवा राज्य की युवा बेचैनियां...
उमंग, उत्साह क्या रहा होगा, जब लम्बे संघर्ष के बाद एक सपना साकार हो। वो सपना जो एक साथ कई लोगों ने देखा था। कईयों ने अपनी जवानी खपा दी। जेल गए, प्रताड़ना सही। संघर्षों का लंबा काल, अंधेरे टनल से गुजरने जैसा रहा...
फिर एक सुबह एक राज्य बना। नदियों की धार उस सुबह नई सी लगी। स्वर्णरेखा का जल स्वर्ण में तब्दील होने के सपने संजोए था, दामोदर अठखेलियाँ ले रही थी। बिजली के तारों में करंट नया था, सड़कें अपने विस्तार के लिए आतुर थे, गांव गांव तक पहुंचने की ख्वाहिश रही।
दूसरे साल में पहला सपना बिखरा। पुलिस में बहाली निकली, रोजगार के लिए डोमिसाइल नीति पर पूरा राज्य दो धड़ों में बंट गया। खून खराबे हुए। इसी बीच राजनीतिक उथलपुथल की काली इमारत खड़ी हुई। विभाग की चाहत में भ्रष्टाचार के सपने संजोए मंत्रियों ने मुख्यमंत्री तक की कुर्सी हिला दी। किसी की तमन्नाएं हिलोरे मार कर बोली– मेरे पैरों में घुंघरू पहना दे, तो फिर मेरी चाल देख ले...
इसी दौरान जेपीएससी के जरिए बहालियों से उम्मीद जगी। राजनीतिक उथल पुथल के बीच भ्रष्टाचार की बदनामियों के किस्से देश भर में चर्चा में आए। दुबई, थाईलैंड, बैंकॉक के निवेश की खबरें चाईबासा से लेकर संथाल के दूर गांव तक पहुंचती। राजनेता भ्रष्टाचार से जेब भरते रहे। तब भी युवाओं के सपने उजाले की थीं। लेकिन जेपीएससी की परीक्षाओं की पोल खुली तो पता चला नेताओं, अफसरों ने अपने करीबियों, नजदीकियों के लिए सीटें खरीद ली। योग्य नौकरियों से बंचित हो गए, अयोग्य सरकारी दफ्तरों में कुर्सी पर सफेद तौलियां चढ़ाकर बैठे। युवाओं के उजले का सपना भ्रष्टाचारियों के तशरीफ के नीचे सफेद तौलिए के रूप में कुचलता रहा।
राज्य किशोर हुआ था, पहली बार राजनीतिक स्थिरता का वरदान मिला। युवाओं में उम्मीद जगी। सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे। लेकिन राज्य फिर सीएनटी नियमों के बदलाव और विवादित पत्थलगड़ी की आग में जल उठा। बदली परिस्थितियों में सरकार बदली। फिर उम्मीदों की बारिश के बीच कोयला बालू की तस्करी, घोटाले को लेकर एजेंसियों सक्रिय हुई। सरकार फिर अनिश्चितता के मुहाने पर आ खड़ा हुआ। राजनीति, युवाओं के सपनों पर हावी रही, भावनाओं के उबाल से सत्ता मजबूत हुई। सत्ताधारी मजबूत हुए। लेकिन अब बेचैनी ज्यादा बढ़ी, जब फिर नौकरियां बेच दी गईं। हर छोटी, बड़ी परीक्षा में भ्रष्टाचार हुआ। अयोग्य फिर कुर्सियों पर सफेद तौलियां बिछा चुके थे, लेकिन इस बार इन अयोग्य के साथ कई योग्य भी पीसे।
अब सभी बेचैन हैं। बेचैनियों का सिलसिला जारी है।
@TrafficRanchi ,वायरलेस अलर्ट के बावजूद पुलिस ने चोरी की बाइक पकड़ी, लेकिन कथित तौर पर ₹9,000 का चालान काटकर उसे जाने दिया! वहीं दूसरी तरफ 1 दिन में 3,874 चालान काटे गए। सवाल उठता है कि प्राथमिकता अपराध रोकना है या सिर्फ चालान का आंकड़ा बढ़ाना?
यही नहीं, सोशल मीडिया पर महिला पुलिसकर्मी का ₹400 की कथित घूस लेते हुए वीडियो वायरल होना बेहद चिंताजनक है।
जब पूरा ध्यान सिर्फ राजस्व पर होगा, तो ऐसी तस्वीरें सामने आना लाजमी है।
@yourBabulal@JharkhandCMO@khurpenchh
@JioCare@reliancejio More than 8 hours have passed since I shared all details in DM as requested by Shrikant. No update, no callback, and no ground visit has been initiated yet for Khatanga Village. Why is Jio ignoring a severe network issue highlighted to @TRAI & @DoT_India ? Respond immediately!
Official deadline OVER (03 Sep, 9:27 AM)! In an absolute display of monopoly & arrogance, @JioCare@reliancejio team has deceptively CLOSED my complaint SR00003FIZNH without any ground visit or solution . Just because you have the ONLY tower in Khatanga Village, you cannot hold customers hostage with pathetic 4G service. Demand a strict audit and immediate penalty! @TRAI@DoT_India@JM_Scindia@jagograhakjago@AshwiniVaishnaw
झारखंड का दुर्भाग्य देखिए कि पिछले 6-7 सालों में जितने भी बड़े घोटाले हुए, उनमें मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM के सीधे तौर पर संलिप्त होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
साहिबगंज में ₹1200 करोड़ से अधिक के घोटाले में मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि मुख्य अभियुक्त हैं। शराब घोटाले में मुख्यमंत्री के सचिव रहे विनय चौबे मुख्य सूत्रधार हैं। JSSC-CGL में नौकरी बेचने के मामले में मुख्यमंत्री के मित्र और मुख्यमंत्री आवास से जुड़े लोगों की संलिप्तता के आरोप हैं। जमीन घोटाले में तो मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया तक हो चुकी है। पद का दुरुपयोग कर खनन लीज लेने के मामले में चुनाव आयोग अपना मंतव्य दे चुका है। बालू, पत्थर, कोयला, लौह अयस्क से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग और नियुक्तियों तक भ्रष्टाचार की खुली छूट दे रखी है।
तो सोचिए, जब सारे घोटालों के तार सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचे तो उनके खिलाफ ACB और CID जैसी राज्य की एजेंसियां कैसे निष्पक्ष जांच कर सकती हैं? जब बिल्ली ही दूध की रखवाली करेगी, तो दूध सुरक्षित कैसे रहेगा? यही वजह है कि शराब घोटाले में ACB चार्जशीट दाखिल नहीं करती और नियुक्ति घोटाले में CID जांच की दिशा बदल देती है।
ऐसे गंभीर मामलों में निष्पक्षता और जनता का भरोसा सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से CBI जांच जरूरी है।
@PMOIndia@HMOIndia@ANI@PTI_News@ians_india
@JioCare@TRAI@DoT_India@JM_Scindia Shrikant, your team deceptively CLOSED this complaint (SR00003FIZNH) last night without any ground visit! Now seeing the tags of Regulators, you are pretending to check on Priority. Khatanga Village does not need hollow assurances anymore, we demand an immediate 5G tower upgrade on the ground. Send your technical RF team to our village right now! @AshwiniVaishnaw
क्या गजब का खेल खेला है भाई!
JPSC जैसी संस्था की 10 परीक्षाओं का काम बिना एग्रीमेंट एक कंपनी को सौंप दिया गया और ऊपर से टेंडर प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल!
अब सवाल सिर्फ गड़बड़ी का नहीं है… सवाल उस संरक्षण का है जिसके दम पर इतना बड़ा खेल इतनी बेखौफी से खेला गया।
बिना सत्ता के गलियारों में बैठे किसी ताकतवर हाथ के सहारे इतनी बड़ी व्यवस्था को अपनी उंगलियों पर नचाना क्या इतना आसान है?
@HemantSorenJMM@yourBabulal
छात्रों की पीठ के पीछे छिपकर राजनीति कर रही भाजपा, सीधे मैदान में उतरकर मुकाबला करे :
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं के मुद्दे पर भाजपा के आंदोलन और 48 घंटे का अल्टीमेटम राजनीतिक नौटंकी। भाजपा की मौजूदा और पूर्व की गतिविधियों से यह पूरी तरह जगजाहिर हो चुका है कि पार्टी छात्रों को भ्रम में डालकर अपना राजनीतिक हित साधती रही है। भाजपा नेताओं को छात्रों के भविष्य की चिंता है तो उन्हें छात्रों की पीठ के पीछे से राजनीति करने के बजाय सीधे राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के मैदान में उतरना चाहिए।
भाजपा प्रदेश के नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब सीबीआई जांच का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब मुख्य सचिव पर दबाव बनाकर वे आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं। न्यायालय में विचाराधीन मामले में इस तरह राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश भाजपा की मंशा पर सवाल खड़े करती है। भाजपा को केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग में महारत हासिल है, यह कौन नहीं जानता है।
माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक निर्णय लिये हैं। सरकार ने पूरे मामले में जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीआईडी लगातार कार्रवाई कर रही है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में कथित धांधली से जुड़े लोगों पर शिकंजा कस रहा है। इसी कार्रवाई से भाजपा घबराई हुई है।
भाजपा अब सीबीआई जांच की मांग की आड़ में उन लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिनके तार कथित परीक्षा धांधली से जुड़े हो सकते हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि उसे राज्य की जांच एजेंसी की कार्रवाई पर भरोसा क्यों नहीं है और आखिर ऐसी कौन-सी जल्दबाजी है कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद वह सरकार पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही है। भाजपा को डर है कि उसका कनेक्शन जगजाहिर ना हो जाए।
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश भी बर्दाश्त नहीं होगी। भाजपा को छात्रों की भावनाओं से खेलना और उनकी पीठ के पीछे से राजनीति करना बंद करना चाहिए।
राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो भाजपा सीधे मैदान में आए, कानूनी लड़ाई लड़नी है तो कानून के रास्ते पर चले। छुप-छुपकर राजनीति करने वालों का चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। झारखंड की जनता यह समझ चुकी है कि भाजपा को छात्रों के भविष्य से ज्यादा अपनी राजनीतिक जमीन की चिंता है।
@JmmJharkhand
यही JPSC ,JSSC CGL , यही CID, यही राज्य और यही सरकार थी ना?
फिर उस समय CID ने किसके कहने पर क्लीनचिट का झुनझुना पकड़ा दिया था?
आज बोल रहे हो जो दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी।
अबे पहले ये बताओ, पिछली जांच में तुम्हारी गां***#@ में दम नहीं था या जांच करने का ईमान नहीं था?
अगर आज की जांच सही है तो पहली जांच किस चक्कर में हुई थी?
और अगर पहली जांच सही थी तो आज का गिरफ्तारी का ड्रामा किस लिए?