चित्तौड़गढ़ पुलिस के होनहार सहायक पुलिस निरीक्षक श्री सूरज कुमार बैरवा को मदर टेरेसा ह्यूमन राइट्स अवार्ड 2025 से किया गया सम्मानित,अपनी बेहतरीन कार्यशैली ओर शानदार पुलिसिंग से सूरज कुमार रहते है चर्चा में ।
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पुलिस की पीड़ाओं से किसी को मतलब नहीं...
क्या आपको पता है? जोधपुर में रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक बड़ी संख्या में पुलिस के सीआई और जवान नाकाबंदी में लगे हुए थे। फिर सुबह पांच बजे से आठ बजे तक एक और नाकाबंदी। अब दो घंटे में ये सभी पुलिस वाले नहा धोकर, नाश्ता पानी करके 10:30 बजे मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में व्यवहार सुधारने, साॅफ्ट स्किल सीखने जाएंगे। यह कार्यक्रम करीब एक बजे तक संपन्न करेंगे और दो बजे पुलिस कमिश्नर महोदय क्राइम मीटिंग लेंगे, उसकी तैयारी करके मीटिंग में बैठेंगे। चार बजे जैसे ही क्राइम मीटिंग खत्म होगी तो फिर से पांच बजे शुरू होने वाली नाकाबंदी के लिए निकल पड़ेंगे। इस बीच कोई नेता फोन भी करेगा, कोई पत्रकार डिटेल्स भी लेगा, कोई फरियादी भी आ जाएगा, कहीं कोई घटना भी हो सकती है।
अब बताइए आप, पुलिस वालों के पास सांस लेने तक की फुर्सत नहीं है। आराम की कोई गुंजाइश ही नहीं है। परिवार को तो भूल ही जाएं, खुद को व्यवस्थित रखना भी जब चुनौती हो तो क्या ख़ाक व्यवहार सुधार पाएंगे और क्या स्ट्रेस मैनेज कर पाएंगे?
इन चीजों पर कोई बात नहीं करना चाहता लेकिन पुलिस से बहुत ही ज्यादा उम्मीदें। हाई कोर्ट को थोड़ा सा इधर भी ध्यान देना चाहिए।