मनुवादियों का धन्यवाद, जिन्होंने सोए हुए बहुजन समाज को जगा दिया।
अब बहुजन समाज सिर्फ आरक्षण बचाने की नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र में आरक्षण बढ़ाने और कॉलेजियम सिस्टम को खत्म कर न्यायपालिका में पारदर्शी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर चुका है।
बाबा साहब ने जब हिंदू कोड बिल लिखा
तो सबसे पहले महिलाओं ने ही उसका विरोध किया था क्योंकि उन महिलाओं को खुद नहीं पता था के उनके अधिकार क्या है
वही लड़की अपनी अस्मिता को खुद जला रही है
लेकिन कुछ दिन बाद दिखेगा यही लड़की अपने अधिकारों की भीख मांगती हुई दिखाई देगी 😡
अजीत भारती नाम का यह जातिवादी प्राणी अगर एससी एसटी एक्ट के तहत सलाखों के पीछे नहीं गया तो हमें यह मान लेना चाहिए कि यह कानून बीजेपी ने खत्म कर दिया है।
ISRO साइंटिस्ट सैलरी— ₹56,100
DRDO साइंटिस्ट सैलरी— ₹56,100
अग्निवीर जवान की सैलरी— ₹21,000
सरकारी डॉक्टर सैलरी— ₹80,000
IAS अफसर सैलरी— ₹56,100
लेकिन सुधीर चौधरी को प्रति माह लगभग 1.3 करोड़ रुपए सैलरी मिलती है सिर्फ सरकार की चाटुकारिता करने के लिए।
भारतीय के मेहनत का TAX का पैसा कुछ इस तरह से बर्बाद किया जा रहा है।
जाति बनाने में भी बहुत मज़ा आया था.
जाति के नाम पर दंभ भरने में भी मज़ा आता है.
जाति के माध्यम से NFS करने में भी मज़ा आता है.
जाति के आधार पर शोषण करने में भी मज़ा आता हैं.
जाति के आधार पर मंदिर/मीडिया/न्यायपालिका में लाभ लेने में भी मज़ा आता है.
इसीलिए जाति हटाना जरूरी है।
आरक्षण था,
आरक्षण है,
आरक्षण रहेगा,
इस देश में कोई माई का लाल इसे हटा नहीं सकता है.
जातीय जनगणना भी होकर रहेगा.
पिछड़ों/दलितों का आरक्षण भी बढ़ेगा.
निजी क्षेत्रों में भी एक दिन आरक्षण लागू होगा।
आरक्षण फिल्म का यह दृश्य आज उन लोगों को जरूर देखना चाहिए, जो आरक्षण हटाओ आंदोलन चला रहे हैं। आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सदियों के सामाजिक भेदभाव और असमानता के खिलाफ प्रतिनिधित्व और अवसर सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है। इतिहास को समझे बिना आरक्षण का विरोध करना सामाजिक न्याय की वास्तविकता से आंखें मूंदना है।
संतोष मिश्रा छोटी-छोटी बच्चियों के साथ गंदी गंदी वीडियो देखना चाहते हैं।
मनोज इन बच्चियों से स्कूल साफ करवाना चाहते हैं।
ये गुस्सा ये आक्रोश बता रहा है कि हमारे जमाने के आज्ञाकारी बच्चे नहीं हैं।
ग़लत होता देखते हैं तो विद्रोह कर देते हैं🔥✊