@ajeetbharti@YouTube@YouTubeIndia@YouTubeCreators@ecammtweets Please use an Ethernet cable instead of WiFi, if not tried already. YouTube's recovery after packet drops has been questionable for some time. If it still fails, then it is either your ISP or YouTube's flaw.
Today might have seen the biggest physics discovery of my lifetime. I don't think people fully grasp the implications of an ambient temperature / pressure superconductor. Here's how it could totally change our lives.
मेरा प्रथम परिचय नागराज से हुआ था सुमन सौरभ में आये ‘नागराज का दुश्मन’ के ऐड से या शायद नंदन में दिखे कालदूत के ऐड से, ठीक से याद नहीं दोनों में से पहली घटना कौन सी है. ये याद है कि मैंने पायल डेली नीड्स वाले को ‘लहू के प्यासे’ पढ़ते देखा था शायद उसके बैक कवर पर ऐड था जिसके कूपन को काट कर भेजने से कुछ गिफ्ट मिलने की संभावना थी. ये हरे रंग का नाग मानव कुछ बिल्कुल ही अलग सा दिख रहा था मगर कॉमिक इसकी एक न पढ़ी थी. 1989 या 90 में जन्मदिन पर मिली नंदन में कालदूत से इसकी टक्कर के विषय में भी पता चला था. लब्बोलुआब ये कि हमें पता था नागराज नामक एक बला है दुनिया में, मगर पढ़ नहीं पाये थे। बाकी क्रॉनोलॉजी के चक्कर में पड़ियेगा तो आनंद से वंचित रह जाईयेगा.
स्कूल के रिक्शे में पाँच दिन लकड़ी की पटिया पर बैठ कर तपस्या करने के बाद हफ्ते में एक दिन गद्दी पर विराजमान हो सकने की डेमोक्रेटिक प्रथा थी. शनिवार का दिन था, पूरे हफ्ते लकड़ी पर तशरीफ की सिंकाई के बाद आज वो दिन आ गया था जब अपन बादशाह बन कर गद्दीनशीन होनेवाले थे. चॉक घिसड़ के कैनवास जूतों को चकचका कर जैसे ही हम रिक्शे में बैठे तो देखते हैं पटिया पर बैठे छोकरे प्रलयंकारी मणि नाम की कॉमिक पढ़ रहे हैं. नागराज की.
अपना हाल ऐसा जिसे देख कर अंग्रेज़ कह गये हैं - कौतुहल ने बिल्ली मार दी… ललचाई नज़रों से कॉमिक के कवर को कई दफ़ा ताड़ चुकने के बाद, हृदय पर पत्थर धर कर कॉमिक-स्वामी को अपनी गद्दी सौंप कर रास्ते भर के लिये कॉमिक पढ़ने का सौदा तय कर लिया. हम कॉमिक पढ़ते चले गये, मगर ये क्या कहानी जबर किंतु उसमें नागराज मियाँ नज़र ही नहीं आ रहे। अपना हाल काश्मीरी पुलाव में काश्मीर ढूँढने गये शख़्स के जैसा हो गया, कि ये नागराज है किधर - बत्तीसवें पेज के अँतिम पैनल में नागराज ने हाजिरी लगाई तब तक स्कूल आ चुका था। हमारी गद्दी लुट चुकी थी और हम खुद को ढाढस बँधा रहे थे कि चलो नागराज नहीं ना सही कहानी अधूरी तो अधूरी सही, मगर बढ़िया थी। लुटे हुये जुआरी खुद को ऐसे ही ढाढस बँधाते हैं।
मगर नागराज की कहानियों का नशा अब हमें लग चुका था। सन्डे होते ही गोल बाज़ार की दशमेश लाईब्रेरी का रुख किया गया। अठन्नी उन्हें भेंट चढ़ा कर प्रलयंकारी नागराज उठाई गई - आम तौर पर गुरबत के दिनों में भागवाली कॉमिक्स होने पर दूसरा भाग ले कर उसमें पहले भाग का रिकैप पढ़ लेने से दो कॉमिक्स वाली फील ले लेना समझदारी की पहली निशानी माना जाता था।
बस जी फिर तो ढूंढ - ढूँढ कर कोबरा घाटी, खूनी खोज, खूनी यात्रा, नागराज का इंसाफ जैसी ज़बर्दस्त कॉमिक्स पढ़ी गईं। मुलिक सर के पेण्टेड कवर्स को दर्जनों बार ताड़ा गया। फिर आया नागदंत के साथ मिली स्केल को वर्षों तक सुरक्षित रखा गया। नागराज का ओवरकोट उसकी बेल्ट में कैसे समाता है, वो चड्डी के ऊपर बेल्ट क्यों पहनता है जैसे टुच्चे सवालों में न पड़ते हुये हम फ्लोरिडा से सिल्विया तक और विसर्पी से सौडांगी तक, हमेशा ये सोच-सोच के कन्फ्यूजियाते रहे कि मुलिक सर किसे ज़्यादा खूबसूरत बनाते हैं।
नागराज के विशेषांकों की भी अच्छी खासी फेहरिस्त रही। नगीना का जाल की एक सेकण्ड हैण्ड कॉपी बड़ी मुश्किल से खरीदी थी, जिसका हाल इतना जर्जर था कि नागराज द्वारा तबाह किंकोसि का अड्डा उसके सामने ताज महल लगता। जितने की कॉमिक नहीं थी उतने की सेलो टेप अगले कुछ सालों तक पल पल बिखरती उस किताब को संभालने में लग गई।
हम टीनेज में कदम रख ही रहे थे कि नागराज फैन क्लब की उद्घोषणा हुई, और एण्ट्री फार्म जो था वो कहानी के पिछले पेज पर छप गया गलती से। अब कहानी फाड़ नहीं सकते और फॉर्म भरना ही है जैसा धरमसंकट जो आया तो किराये पर खज़ाना ला कर उसमें से वो पेज तड़ी कर लिया गया, (अपना खज़ाना कौन खराब करता है) दस रुपये की अकूत धनराशी में इस फैन क्लब के मेम्बर जो हम बने, फिर वो साथ कभी न छूटा। क्लब अब शायद नहीं है, मगर अपन अब भी फैन हैं।
लिखने को तो मैं लिखता चला जाऊँ, मगर कमोबेश सबकी कहानी एक सी है, जिस किराये वाले से खज़ाना ला कर वो मेम्बरशिप फॉर्म वाला पेज उड़ा दिया गया था उसे तहे दिल से सॉरी।
#सच्चे_किस्से_कॉमिक्स_के
@GyanTherapy Don't go for custom cooling solution and loops. AIOs are better for your use-case. Try watching videos by @JayzTwoCents for wise insights on this.
For the first time we have evidence that the Higgs boson decays into a Z boson and a photon.
A phenomenal achievement!
Τhis very rare decay is a crucial test of electroweak symmetry breaking and if the Higgs was a little bit lighter we would have never seen it
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सुनील शेट्टी एक म्यूज़िकल महानायक
पाप कल्चर के जानकारों का मानना है कि पुराणों में कुल जमा सात तरीके के पापों का वर्णन है। मगर कुछ एकदम भीषण लेवल के पापहब प्रिमियम मेम्बरों की मानें तो इस लिस्ट में दो जघन्य पापों का ज़िक्र डेडलाईन के चलते छूट गया था। इन पापों के वर्णन और श्रवण कर लेने मात्र से, मानवों को नर्क के तनिष्क बागची चेम्बर में डाल दिया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार ऐसे लोगों को इस चेम्बर में स्थित नेहा कक्कड़ सीट पर बिठा के हम्मा हम्मा और मसक्कली के रिमिक्स कोड़े बरसा-बरसा के कान फाड़ देने का प्रावधान है। पहला महापाप है बार बार नकारने के बावजूद यू ट्यूब द्वारा सभी को जबरीया प्रिमियम सब्सक्रिप्शन पेलने की कोशिश और दूसरे पाप का वर्णन करते हुये वेदों में जो जघन्य से करीब सात सौ ग्राम ज़्यादा भारी पाप माना गया है, वो है - सुनिल शेट्टी जैसे महान कलाकार को सिर्फ एक्शन हीरो मान लेना।
अवेंजर्स पूर्व पिछली सदी में जब सुनिल शेट्टी नामक अ-हल्क-नीय नायक सिल्वर स्क्रीन पर उदित हुआ, तो विलेनों का नारायण नारायण हो गया। टाईपकास्ट अस्र का शिकार हुये इस महानायक को एकदम से एक्शन हीरो मानने की भूल करने वाले चुग़द सुगम संगीत में सुनिल शेट्टी घराने का योगदान ही भूल गये। बाबा सहगल कालीन सुपरहिट मुकाबला और फिलिप्स टॉप टेन जैसे काउण्टडाऊन शोज़ में पारो के जलवों और कजरे की धार-मोतियों के हार बिना आ धमकी अपनी बे पर फिदा सुनिल शेट्टी जो एक बार घुसे, तो उसके बाद वो अगले दस बारह साल तक करिस्मा की झाँझरिया वगैरह छनकाते हुये वहीं टिके रहे।
अपने फेवरेट सुनिल शेट्टी गीतों को उपरोक्त सेन्टेन्स में न देख कर डिसअपॉइण्ट होते प्रबुद्ध लफाड़ीगण कृपया हाय हुक्कु हाय हुक्कु हाय हाय न मचायें। न ही कमेण्ट सेक्शन में इस महान गीत में हाय हुक्कु की आवृत्ति कितनी बार हुई जैसे सवाल करके खुद को आर्यभट्ट का चाचा समझने की कोशिश करें। आप सच में गणित में इतने ही तेज़ होते तो लॉ ऑफ प्रोबैब्लिटी का इस्तेमाल करके ऑनलाईन लूडो में लक आज़मा रहे होते।
मौसम का पहला बढ़िया आम सूतते हुई लिखी इन पँक्तियों तक आते आते पापी मन रवीना टण्डनमयी हुआ जाता है। रवीना द्वारा हाथ हिला के बोले गये हाय हाऊ आर यू… हाय हाऊ आर यू और हाथ मिला कर कहे गये हाऊ डू यू डू… हाऊ डू यू डू का वर्णन करते सुनील शेट्टी अपनी साईज़ से तीन गुना बड़ा कोट पहनकर बड़े भाईयों द्वारा छोड़े गये ढीले कपड़ों में सुसज्जित मुहल्ले के छोटे भाईयों को रेप्रेजेण्ट करते हुये अभूलनीय हैं। हेल्मेटधारियों के साथ हुये इस नृत्य में रोड सेफ्टी का जो सामाजिक संदेश दिया गया है, उसकी चर्चा न करते हुये हम ऐसे बिहेव करेंगे कि इस गाने का कभी रिमेक हुआ ही नहीं, क्योंकि उस भसड़ को गाना माना जाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
सुन्दरा - सुन्दरा पर करिस्मा हो या हेल्लो हेल्लो बोल के में टीना, सुनील शेट्टी ने कभी फरक नहीं किया। ढीली शर्ट और छाती के बालों की लहलहाती फसल दिखाते सुनील ने अपनी कतई लिमिटेड नृत्य कला का प्रदर्शन करने के पहले कभी नहीं सोचा कि नाचा कहाँ जाये? बँद मिल हो या डॉकयार्ड, ऊटी का हिल स्टेशन हो या रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म, सच्चे शेक्सपीरीयन सुनील शेट्टी "ऑल वर्ल्ड’ज़ अ स्टेज" मान कर कहीं भी नाच सकते थे।
प्रातः स्मरणीया सोनाली बेन्द्रे से आँखों में बसे हो तुम, तुम्हें दिल में बसा लूँगा कह कर उस दौर के हर मुहल्ले में मौजूद पौने तीन सुनील शेट्टियों के दिल की बात कहते सुनिल शेट्टी की जेन्युइनीयत को भला कौन टक्कर दे सकता है? जीता था जिसके लिये, होता करे अजय देवगन का गाना मगर असल सिंपिंग तो शेट्टी साब की है उसमें।
सुगम संगीत के महासागर में कट्टी - बट्टी और तू लड़की पों पों पों जैसे अविस्मरणीय गीतों का योगदान देनेवाले सुनील शेट्टी को आप कैसे सिर्फ एक एक्शन हीरो मान सकते हैं? कैसे? कैसे? कैसे????
जैसे गीली चीनी उँगलियों पर चिपकती है वैसे ही सुनील शेट्टी के गानों की मीठी यादें हमारे बचपन से चिपकी हुई है। सुनील ने नाम की स्पेलिंग चेन्ज क्या की, अपना बचपन ही खत्म हो गया। धड़कन के गानों के बीच अब भी उनकी आवाज़ उस बीते हुये टाईम की दहलीज है जिसे लाँघ के अपन जवान होने चल पड़े थे।
शाहरूख, आमिर, सलमान, गोविंदा, अक्षय, अजय और यदा कदा दिख जानेवाले कई चाकलेटी हीरोज़ की भीड़ में सुनिल शेट्टी के गाने हम भूल जायें ये हो नहीं सकता और बिना ऐड के यूट्यूब पर ये गाने सुन लें, ये यूट्यूब होने नहीं देगा।
ये सब लिखते हुये, ऐ जाते हुये लम्हों सुनने का मन कर गया… तो चलूँ… तो चलूँ…