जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठीं नेहा को आज 18 दिन पूरे हो गए हैं और आज जब डॉक्टर ने उनका टेस्ट किया और उसके बाद जो कह रही हैं वो चिंता बढ़ाने वाला है...सरकार इतनी असंवेदनशील कैसे हो सकती है❓
नेताओं के काफिले पर करोड़ों खर्च हो सकते हैं,
लेकिन खिलाड़ियों के जूते , किट , पोल, ट्रेनिंग, डाइट और बेसिक सपोर्ट पर सिस्टम की जेब खाली हो जाती है।
फिर मंचों से भाषण दिया जाता है कि
“हम खेलों को बढ़ावा दे रहे हैं।”
असलियत ये है कि इस देश में खिलाड़ी अपने दम पर लड़ता है ,
और नेता उसकी जीत पर फोटो खिंचवाने सबसे आगे खड़ा मिलता है।
सिर्फ़ ये मुद्दा नहीं उठाया था बल्कि एक तरीका भी बताया था कैंसर की दवाइयों को लेकर ।
सरकार TMH मुंबई से बात करे और हर राज्य में TMH फार्मेसी स्टोर खोले जहाँ पर उच्च कोटि की कैंसर की दवाईयां कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा सके ।
फिर ना किसी डॉक्टर को दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर संशय रहेगा और ना किसी मरीज को कीमतों को लेकर परेशानी ।
@HemantSorenJMM@IrfanAnsariMLA
मैं दूर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी से पूछना चाहता हूँ कि......
सिम मेरा, मोबाइल मेरा, नंबर भी मेरा…!
फिर ये कहां का इंसाफ है कि इनकमिंग कॉल पर भी ताला लगा दिया जाए?
बैलेंस खत्म हुआ तो आउटगोइंग बंद हो जाए, ये तो समझ में आता है, क्योंकि एक सेवा मैने ले रखी है।
लेकिन इनकमिंग कॉल भी बंद कर देना, क्या ये सही है?
कॉल तो सामने वाला कर रहा है, उसका पैसा कट रहा है…!!
फिर मेरे नंबर पर “ताला” क्यों❓
क्या अब मोबाइल रखना भी “मासिक टैक्स” देने जैसा हो गया है?
रिचार्ज करो तो नंबर जिंदा, नहीं तो पूरी तरह बंद!
गांव के मजदूर, छोटे दुकानदार और छात्र....
जिनके लिए मोबाइल सिर्फ जरूरत है, शौक नहीं, उनके लिए यह नियम किसी सजा से कम नहीं है।
पहले कहा जाता था, “लाइफटाइम इनकमिंग फ्री”
अब हाल ये है कि रिचार्ज नहीं तो पहचान भी खत्म!
सोचिए…
अगर किसी गरीब के पास पैसे नहीं हैं,
तो क्या उसका नंबर बंद कर देना ही समाधान है?
क्या उससे उसका संपर्क छीन लेना सही है?
मोबाइल आज सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी पहचान और जिंदगी की लाइन बन चुका है।
बैंक से लेकर नौकरी तक, सब कुछ इसी नंबर से जुड़ा है।
फिर भी अगर इनकमिंग कॉल पर भी ताला लगाया जा रहा है,
तो सवाल उठना लाज़मी है…!
क्या यह सिर्फ बिजनेस है…❓
या फिर धीरे-धीरे लोगों को मजबूर करके
हर महीने पैसे निकलवाने का तरीका?
सोचिए… और बताइए!
क्या आप भी इसे सही मानते हैं❓
या यह आम आदमी की मजबूरी का फायदा उठाना है?
अगर आप सहमत हैं तो खुलकर आवाज उठाइए, वरना तो जैसा चल रहा है चल ही रहा है।
@JM_Scindia@DoPTGoI@narendramodi@AmitShah
"इलाज नहीं हो रहा, फिर किस काम की सरकार है ये"
"मोदी होते तो हम यहां होते"
"मर जाएंगे तब इलाज होगा"
तो ये तस्वीर है 2026 की !
पिछले 10-20 सालों में हमने क्या किया है? अगर हॉस्पिटल में हम पर्याप्त बेड तैयार करने में फेल रहे हैं तो कम से कम हम लोगों के लिए पर्याप्त वेटिंग रूम भी क्यों नहीं बना पाए हैं ?
बीमार लोग, सड़क पर इलाज का इंतजार करेंगे? और इंतजार में कुछ और बीमारी से ग्रसित हो जाएंगे?
वजह क्या है ? मान लो जमीन पर ही सोना है, इलाज के इंतजार में... तो क्या हम इन्हें साफ-सुथरी जमीन भी नहीं दे सकते?
और कहते हैं, हम विकसित भारत बनने जा रहे हैं ?
कोई भी देश रातोंरात एक से 100 पर नहीं पहुंचता... पहले एक से 10 पर पहुंचेंगे, फिर 20, फिर 30 पॉइंट पर... लेकिन क्या हम आगे बढ़ भी रहे हैं?
अगर हां तो इस बच्चे के लिए हमने क्या किया?
क्या स्वास्थ्य कहीं से हमारी सरकारों की प्राथमिकता में दिखाई देती है?
देश के प्रधानमंत्री, महीने में कितनी बार, हेल्थ या एजुकेशन को बेहतर करने पर बात करते हैं ?
संसद जब चलता है तो कितने दिन विपक्ष के नेता, हेल्थ या एजुकेशन का मुद्दा उठाते हैं ?
हम और आप, आमलोग, एक साथ आकर, कितनी बार सरकार को इस पर घेरते हैं....
क्या बिना हेल्थ सिस्टम ठीक किए, बिना एजुकेशन सिस्टम ठीक किए, कोई देश विकसित बन जाएगा...
लोग मरते रहें और GDP बढ़ती रहे तो क्या हम 2047 में अचानक विकसित हो जाएंगे?
आपको क्या लगता है, solution किधर से निकलेगा?
#Goodbye2025#HappyNewYear2026
इतना ही करना है, 2026 में आगे बढ़ने के लिए
✔ जिम जाएँ
✔️हेल्थी खाये
✔ ड्रामा से दूर रहें
✔ पैसे कमाएँ
✔ अच्छे दोस्तों के साथ रहे
✔️ अपनी स्किल्स/स्टडी में निवेश करें
✔️ समाज को थोड़ा समय दे
✔ कम बोलें
✔ ज्यादा फोकस करें
✔ ईश्वर को हमेशा याद रखें
✔️बीती हुई बातों को उखाड़ना बंद करें
✔ और… खुद के बारे में हमेशा अच्छा सोचें।
बस इतना ही – बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा।
#GoodMorning #lifelessons #Motivation
सही डॉक्टर का चुनाव कैसे करें:
1.अगर किसी भी क्लिनिक या अस्पताल का प्रचार कोई social media influencer कर रहा हो तो वहाँ कभी न जाएँ।
याद रखें, मार्केटिंग के एक-एक पैसे का बोझ मरीजों पर ही पड़ता है।
अगर किसी भी क्लिनिक को प्रचार के लिए influencer की ज़रूरत पड़ रही है तो वहाँ डॉक्टरों का स्तर न्यूनतम होगा।
2.ज़्यादातर Google रिव्यू फेक रहते हैं। उस पर आँख बंद कर भरोसा न करें।
3.मरीज को क्या बीमारी है, वो बीमारी क्यों हुई, इलाज के क्या-क्या उपाय हैं, इलाज न कराने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं —
ये सारी जानकारी अगर डॉक्टर न दें या न दे पाएँ तो second opinion लीजिए।
4.किसी भी डॉक्टर का अगर अपना फार्मेसी है तो वो चाहेंगे कि आप वहाँ से दवाई लें।
ये चाहने में कोई दिक्कत नहीं।
लेकिन “दवाई यहीं मिलेगी” या “दवा यहीं से लेनी पड़ेगी” — अगर वो ये कहते हैं तो इसमें दिक्कत है।
फिर डॉक्टर बदल लीजिए।
इसी तरह अगर कोई डॉक्टर कहे कि बस उनके यहाँ की लैब की रिपोर्ट ही मान्य होगी तो ऐसे डॉक्टर से बचें।
5.इलाज की गारंटी देने वालों से दूर रहिए।
ज़्यादातर वे गड़बड़ निकलते हैं।
6.Second opinion लेने की बात पर अगर कोई डॉक्टर भड़क उठे तो वो डॉक्टर ठीक नहीं।
7.ज़्यादातर समय, ख़ासकर ICU में गंभीर मरीज के बारे में लोग अक्सर डॉक्टर से सवाल करते हैं कि मरीज़ कब तक ठीक हो जाएँगे।
इस सवाल का जवाब किसी डॉक्टर के पास नहीं होता। वो भविष्यवक्ता नहीं हैं कि भविष्यवाणी करें।
मरीज़ की स्थिति कैसी है और जो इलाज चल रहा है उससे स्थिति में क्या बदलाव आ रहा है —
अगर डॉक्टर ये अच्छे से बता रहे हैं तो ठीक है।
8.डॉक्टर की डिग्री ज़रूर देखें।
डिग्री अच्छे से उनके पर्चे पर लिखी होनी चाहिए।
9.इलाज के खर्च को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए।
10.अगर डॉक्टर कोई जाँच या दवा लिखते हैं तो ज़रूर पूछें कि वो जाँच किस लिए लिखी जा रही है।
अच्छे डॉक्टर ज़रूर बताएँगे कि किस जाँच या किस दवा का क्या उद्देश्य है।
ये सारी चीज़ें प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर लागू होती हैं।
सरकारी अस्पतालों में समय के अभाव के कारण डॉक्टर ज़्यादा समय नहीं दे पाते,
लेकिन जो बुनियादी चीज़ें हैं वो उन्हें भी देनी चाहिए।
भविष्य में जब भी संघर्ष, लगन, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की बात होगी-भारत की पैरा चैंपियन तीरंदाज शीतल देवी का नाम ज़रूर लिया जाएगा।
उन्हें जेद्दा में होने वाले एशिया कप स्टेज-3 में एबल-बॉडी श्रेणी के लिए चुना गया है - यानि शीतल देवी अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस टूर्नामन में उन खिलाड़ियों के साथ खेलेंगी जिनके शरीर में किसी भी तरह की शारीरिक चुनौती नहीं है। और इसी के साथ वे ऐसा करने वाली पहली भारतीय पैरा आर्चर बन गई हैं।
अनगिनत लोगों के लिए वो सचमुच बड़ी प्रेरणा हैं। उनके जज़्बे के सामने नतमस्तक।
Dussehra calls us to:
• Recognize and conquer inner weaknesses
• Ignite spiritual light
• Practice sell- awareness & meditation
• Share peace and goodness with the world.
#happydussehra2025