बहुजन समाज पार्टी और बहुजन समाज के लोग इस 14 अप्रैल पर आदरणीया बहनजी की इस बात पर गंभीरता से ध्यान दें क्योंकि अगले साल चुनाव है तो 14 अप्रैल से बहुत बड़ा संदेश जाएगा।
सभी ग्राम समितियों को साइड रख बहुजन समाज पार्टी के नाम से प्रशासन से प्रोग्राम की परमिशन लें।
#भीम_जयंती
1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं ख़ासकर यूपी में पाँचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की ज़रूरत पड़ती।
3. वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है।
4. कुल मिलाकर, श्री अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है।
5. किन्तु श्री अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे श्री आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है।
6. इतना ही नहीं बल्कि श्री आकाश आनन्द द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था।
7. जबकि इससे पहले वे बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ व श्री आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है।
8. ऐसे हालात में श्री आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि श्री आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं?
9. इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है।
10. अन्त में यही कहना है कि बी.एस.पी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब में विधानसभा का आमचुनाव अब बहुत नज़दीक है और ये तीनों ही राज्य, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’बहुजन समाज’ को ’शोषित से शासक वर्ग’ बनने हेतु उनके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के कारवाँ को आगे बढ़ाने के लिये बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट के लिये अति-महत्वूपर्ण ही नहीं बल्कि बहुत विशेष भी हैं, जिसको ध्यान में रखकर ही बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी, पार्टी के समर्थक एवं शुभचिन्तक सभी लोग पूरे तन, मन, धन अर्थात हर प्रकार की कुर्बानी देकर पूरे जी-जान से यहाँ सत्ता प्राप्ति का अच्छा रिज़ल्ट लाने की मुहिम/मिशन में डटेे हुये हैं।
2. ऐसे समय में जबकि ख़ासकर विरोधी पार्टियों तथा जातिवादी तत्वों आदि से ’बहुजन समाज’, बी.एस.पी. पार्टी व ’बहुजन मूवमेन्ट’ को, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के समय जैसा ही ख़ासकर आरक्षण आदि को लेकर कड़े चैलेन्जों का सामना है, देश की सर्वमान्य अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. को सर्वसमाज के सभी लोगों से सहयोग की अपील है और इस क्रम में ’बहुजन समाज’ के हर अंगों में से ख़ासकर दलित समाज के लोगों को निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिये जो इसमें बाधा उत्पन्न करे और इतिहास उन्हें माफ ना कर पाये।
3. इसीलिये बी.एस.पी. की शीर्ष नेतृत्व इन बातों का ख़ास ध्यान देते हुये भूले-भटके हुये लोगों को उनके अचार-व्यवहार आदि को ध्यान में रखकर पार्टी में शामिल कर रहा है, और जो लोग इसकी राह में थोड़ा भी रुकावट बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई आदि भी की जा रही है, जिसका चर्चित उदाहरण हैं बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद भी रहे श्री अशोक सिद्धार्थ।
4. पार्टी ने इनको सुधरने का एक नहीं बल्कि कई बार मौक़ा दिया, लेकिन बी.एस.पी. के मिशन से अधिक इन्होंने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ व महत्वकांक्षा आदि को ज़्यादा महत्व दिया, जिसका ख़ामियाज़ा इनके साथ-साथ इनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी भुगतना पड़ा है।
5. कुल मिलाकर इन्होंने अपने निजी स्वार्थ में श्री आकाश आनन्द व बी.एस.पी. मूवमेन्ट की भी कभी सही से परवाह नहीं की है, जबकि इसके लिये श्री अशोक सिद्धार्थ को औरों से कहीं अधिक बढ़चढ़ कर त्याग-तपस्या व कुर्बानी की मिसाल पार्टी व सामाज के सामने देनी चाहिये थी, किन्तु ऐसा ना होकर ठीक इसके उलटा ही होता रहा है।
6. ऐसे में बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट के हित के साथ-साथ ख़ुद उनके परिवार एवं अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के भविष्य को ध्यान में रखकर श्री अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौक़ा है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में श्री आकाश आनन्द का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी फिर पार्टी उनको उनकी ज़िम्मेदारियाँ वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम राय है।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब में विधानसभा का आमचुनाव अब बहुत नज़दीक है और ये तीनों ही राज्य, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के ’बहुजन समाज’ को ’शोषित से शासक वर्ग’ बनने हेतु उनके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के कारवाँ को आगे बढ़ाने के लिये बी.एस.पी. पार्टी व बहुजन मूवमेन्ट के लिये अति-महत्वूपर्ण ही नहीं बल्कि बहुत विशेष भी हैं, जिसको ध्यान में रखकर ही बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी, पार्टी के समर्थक एवं शुभचिन्तक सभी लोग पूरे तन, मन, धन अर्थात हर प्रकार की कुर्बानी देकर पूरे जी-जान से यहाँ सत्ता प्राप्ति का अच्छा रिज़ल्ट लाने की मुहिम/मिशन में डटेे हुये हैं।
2. ऐसे समय में जबकि ख़ासकर विरोधी पार्टियों तथा जातिवादी तत्वों आदि से ’बहुजन समाज’, बी.एस.पी. पार्टी व ’बहुजन मूवमेन्ट’ को, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के समय जैसा ही ख़ासकर आरक्षण आदि को लेकर कड़े चैलेन्जों का सामना है, देश की सर्वमान्य अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. को सर्वसमाज के सभी लोगों से सहयोग की अपील है और इस क्रम में ’बहुजन समाज’ के हर अंगों में से ख़ासकर दलित समाज के लोगों को निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिये जो इसमें बाधा उत्पन्न करे और इतिहास उन्हें माफ ना कर पाये।
3. इसीलिये बी.एस.पी. की शीर्ष नेतृत्व इन बातों का ख़ास ध्यान देते हुये भूले-भटके हुये लोगों को उनके अचार-व्यवहार आदि को ध्यान में रखकर पार्टी में शामिल कर रहा है, और जो लोग इसकी राह में थोड़ा भी रुकावट बनने की कोशिश कर रहे हैं, उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई आदि भी की जा रही है, जिसका चर्चित उदाहरण हैं बी.एस.पी. के राज्यसभा सांसद भी रहे श्री अशोक सिद्धार्थ।
4. पार्टी ने इनको सुधरने का एक नहीं बल्कि कई बार मौक़ा दिया, लेकिन बी.एस.पी. के मिशन से अधिक इन्होंने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ व महत्वकांक्षा आदि को ज़्यादा महत्व दिया, जिसका ख़ामियाज़ा इनके साथ-साथ इनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी भुगतना पड़ा है।
5. कुल मिलाकर इन्होंने अपने निजी स्वार्थ में श्री आकाश आनन्द व बी.एस.पी. मूवमेन्ट की भी कभी सही से परवाह नहीं की है, जबकि इसके लिये श्री अशोक सिद्धार्थ को औरों से कहीं अधिक बढ़चढ़ कर त्याग-तपस्या व कुर्बानी की मिसाल पार्टी व सामाज के सामने देनी चाहिये थी, किन्तु ऐसा ना होकर ठीक इसके उलटा ही होता रहा है।
6. ऐसे में बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट के हित के साथ-साथ ख़ुद उनके परिवार एवं अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के भविष्य को ध्यान में रखकर श्री अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौक़ा है कि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को त्याग कर व निजी स्वार्थ आदि से ऊपर उठकर राजनीति से पूरी तरह से संन्यास ले लें। तब ऐसी स्थिति में श्री आकाश आनन्द का फ्री होकर पार्टी में काम करना संभव होगा और तभी फिर पार्टी उनको उनकी ज़िम्मेदारियाँ वापस देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी, ताकि वे पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें, ऐसी पार्टी में आम राय है।
उत्तर प्रदेश के बरेली में 4 करोड़ रुपए से बनी पानी टंकी नदी में समा गई !!
> नदी से थोड़ा दूर ही दूर टंकी बनाई गई थी, बाढ़ में वो दूरी भी खत्म हो गई।
> 70% घरों में टोटियां लग चुकी थी, पाइप लाइन बिछ गई थी।
मेरी सभी सम्मानित साथियों से अपील है कि अपनी ऊर्जा नकारात्मक बातों पर खर्च न करें।
हमारा एकमात्र लक्ष्य आदरणीया बहनजी के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनाना है।
#जयभीम जय भारत जय बसपा
1. दक्षिण दिल्ली के पाँच मंज़िला पीजी हास्टल के ढहने से 5 लोगों की हुई मौत तथा मध्य प्रदेश के सागर ज़िला में भी ज़हरीली शराब पीने से 18 लोगों की कल हुई मौत व लगभग 190 बीमार लोगों के अस्पताल में इलाज के लिये दाख़िल होने की घटना एवं यूपी व बिहार आदि राज्यों में बाढ़ के कारण जान-माल की तबाही की ख़बरें अति-दुखद व चिन्तनीय।
2. इन घटनाओं से यह साबित होता है कि शासन-प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारियों को सही से नहीं निभा रहा है, जिस कारण जनहित व जनकल्याण के सम्बंध में सरकारों को चुस्त-दुरुस्त होने की सख़्त ज़रूरत है। इस प्रकार से अधिकारियों की घातक होती जा रही लापरवाही, उदासीनता व भ्रष्टाचार आदि पर भी सरकारों को सख़्ती से लगाम लगाने की ज़रूरत।
राजनीतिक मैच्योरिटी का मतलब दलितों को समझ में इतना ही आता है कि जय भीम बोल दिया या नाम के पीछे अम्बेड़कर, गौतम या बौद्ध जोड़ लिया। दो छटांक से ज्यादा बुद्धि नहीं है ज्यादातर दलित समाज के तथाकथित मैच्योरिटी से लबालब दलितों मे, उनको डॉ अम्बेड़कर के विजन मे और मनुवादी विजन में इतना ही फर्क समझ आता है कि भाजपा से तो अच्छी कांग्रेस है जबकि वैचारिकी में दोनो की 2-3% से ज्यादा फर्क नही है। गाँधी खुलकर बाबा साहेब के समानता समता वाले दर्शन के खिलाफ थे, गाँधी जातियों के हिसाब से काम कर बंटवारा चाहते थे। गाँधी ने पृथक निर्वाचन कानून को अपनी आमरण अनशन की जिद्द से रुकवाकर बाबा साहेब डॉ अम्बेड़कर को पुना पैक्ट समझौता करने के लिए मजबूर किया था लेकिन ये फैसला दलितों के हित मे पृथ्क निर्वाचन कानून से मिलने वाले आत्मबल और अधिकारों की अपेक्षा कुछ भी नहीं था । बाबा साहेब ने भी इस समझौते के बारे में कहा था कि सन्तरे का जुस गाँधी पी गया और छिलके हमारे समाज के मुँह पर मार दिए, छिलके से जितना रस मिल रहा है वो पुना पैक्ट का परिणाम है वरना पृथक निर्वाचन कानून के बाद जो स्थिति बनती, उससे दलित आदिवासियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक हालात अब से बहुत बेहतर होते।
कांग्रेस हो या भाजपा या कोई अन्य दल हो, विपक्ष मे रहकर सभी का दलित आदिवासी प्रेम उभारे मार रहा होता है लेकिन सत्ता में रहकर सबसे ज्यादा हक पिछले 8 दशको मे दलित आदिवासियों के वोटो के सहारे दलित आदिवासियों के ही खाये गए है और ये दलित आदिवासियों के वोटो के कारण ही खिलवायें गए हैं। पता करो पहले कि पिछले 8 दशकों मे कांग्रेस के कितने CM शपथ ले चुके हैं, भाजपा के कितने CM शपथ ले चुके हैं, कितने लोगो ने पिछले 8 दशको मे 5 -5 साल CM पद भोगा है और इनमें कितने दलित आदिवासी समाज से है जिनको 5 साल CM पद मिला है।
सही कहुँ तो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दलाल नेताओं द्वारा दलित समाज के वोटो का फायदा स्वतंत्र दलित राजनीति को खत्म करवाने में ही हुआ है। #highlights #followers #everyone #दिलबाग_सिंह Copy By एन. दिलबाग सिंह जी
1. देश में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिससे लोगों को यह लग रहा है कि सीजेपी का जेन-जी (Gen-Z) अर्थात देश के युवाओं और बेरोज़गारों आदि की ज्वलन्त समस्याओं को लेकर इनका यह आन्दोलन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा हाईजैक कर लेने से युवाओं व छात्रों आदि को जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान जो इनको बड़े-बड़े सपने दिखाये गये थे, वे अब स्वतंत्र कम व राजनीतिक ज़्यादा होकर गंभीर शंकाओं में घिर गये हैं।
2. किन्तु ख़ासकर जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) की ज़रूरी माँगों को लेकर बी.एस.पी. को पूरी सहानुभूति व इसके प्रति चिन्ता भी हमेशा रही है और आगे उनके सहयोग के लिये बी.एस.पी. के सभी स्टेट यूनिटों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने राज्य व क्षेत्र में सम्बंधित अधिकारियों से मिलकर उनकी समस्याओं के शान्तिपूर्ण तरीक़े से समाधान के लिये ज़रूर तत्पर रहें।
3. लेकिन बी.एस.पी. के अनुशासन के अनुसार पार्टी के लोग धरना, प्रदर्शन व आन्दोलन आदि नहीं करें और अपनी तन, मन, धन की शक्ति एवं ऊर्जा को चुनाव के लिये सुरक्षित रखें, ताकि करोड़ों दलितों व अन्य उपेक्षितों के सच्चे मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सपनों को साकार करने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की अपनी सरकार बनाकर जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) सहित सर्वसमाज की सभी दुख-तकलीफों आदि का स्थायी समाधान निकल सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यूपी में चार बार रही सरकारों में करके भी दिखाया गया है।
4. इसके साथ ही, जेन-जी (Gen-Z) के जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान पुलिस अगर समय से उचित कार्रवाई करती तो श्री संजय आज़ाद जैसी गंभीर घटना नहीं होती, किन्तु अब इस प्रकरण के अभियुक्तों के खिलाफ सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिये वरना फिर बी.एस.पी भी ऐसे मामलों में कोई पीछे नहीं रहेगी।
यूपी के ज़िला हापुड़ के थाना हापुर नगर के अन्तर्गत दो समुदायों में हुई आपसी रंजिश व झड़प में घायल हुये दलित समाज के लोगों में से एक व्यक्ति की आज हुई मौत अति-दुखद। सरकार आरोपियों को क़ानूनी सज़ा के साथ-साथ पीड़ित परिवार की भी सहायता ज़रूर करे तो यह उचित होगा। वैसे भी आपसी रंजिशों का ख़ून-ख़राबा में बदल जाना अति-निन्दनीय एवं चिन्तनीय तथा ऐसी घटनाओं को सरकारी हस्तक्षेप आदि से हर हाल में रोका जाना चाहिये ताकि विवाद संघर्ष तक ना पहुँच पाये।
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2. वैसे भी एक संवैधानिक सेक्युलर सरकार द्वारा सभी धर्मों के मानने वालों एवं उनके धार्मिक स्थलों आदि का एक समान आदर-सम्मान व उनकी सुरक्षा करने का उत्तरदायित्व बनता है। इस्लाम मज़हब में मस्जिदें हर दिन इबादत बल्कि दिन में कई बार जमात के साथ नमाज़ पढ़ने का मुख्य व अभिन्न अंग हैं, जिसको ध्यान में रखकर व भारतीय परम्परा के अनुसार सम्मान देना देश व व्यापक जनहित में ज़रूरी है।
3. इसके साथ ही, बिना नियम-क़ानून का समुचित अनुपालन किये हुये किसी भी अभियुक्त का मकान ध्वस्त करके उसके पूरे परिवार को सामूहिक तौर पर सज़ा देकर बेघर बार कर देने की कार्रवाईयों से भी लोग काफी विचलित हैं। ऐसे में बी.एस.पी सरकार की तरह का ’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’ का व्यवहार ज़रूरी है।
4. अतः केवल सरकार ही नहीं बल्कि माननीय न्यायालय भी इस ओर समुचित ध्यान दें तो यह उचित होगा। लेकिन ऐसे हालात में सभी लोग सौहार्दपूर्ण वातावरण भी ज़रूर बना कर रखें, पार्टी की यह भी अपील है।
1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगाई, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना करे।
2. वैसे इसके सम्बंध में सरकार के आसमान छूते दावे को प्रथम दृष्टया मान लिया जाये तो यह अच्छी बात होगी, किन्तु अगर यह जुगाड़ के आँकड़े हैं तो यह चिन्ता की बात ज़रूर है। इसीलिये जनता में उम्मीद जगाने हेतु सरकार को विश्वसनीय ढंग से यह ज़रूर बताना चाहिये कि इस उच्च विकास दर का क्या लाभ देश की करोड़ों ग़रीब मेहनतकश जनता को मिला है और आगे में इसका क्या लाभ होगा।
3. इतना ही नहीं बल्कि यह मुद्दा आमजनहित से जुड़ा होने के कारण विकास के आँकड़े व दावे दोधारी तलवार की तरह हैं। इसीलिये उन्हें ज़मीनी हक़ीक़त से भी ज़्यादातर आँका जाता है अर्थात् विकास वही सही व उपयोगी जो जनता को भाये यानी जनता के जीवन में समतामूलक परिवर्तन लाये और लोग ख़ुश व खुशहाल बनें।
4. अतः जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े व दावे आदि अपनी जगह है, लेकिन विकास की असल हक़दार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता को भी इसका लाभ मिलना और उसे इसका महसूस होना भी देश व जनहित में ज़रूरी है, वरना यहाँ के लगभग 140 करोड़ लोग ’धनवान सरकार की ग़रीब जनता’ होने का बोझ लगातार ढोती रहेगी। देश का विकास तभी ’अच्छे दिन’ वाला होगा जब यहाँ की करोड़ों बहुजन मेहनतकश जनता ग़रीबी, बेरोज़गारी व भ्रष्टाचार आदि से मुक्त आत्म-सम्मान का थोड़ा सुखी जीवन जीने योग्य बनेगी।
5. इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का दोगुना तक मानदेय बढ़ाने तथा 20 लाख लागों को सुरक्षा कवर आदि यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना के माध्यम से देने के फैसले से कहीं बेहतर होता लोगों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी देना, ताकि यह व्यवस्था अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं शोषण आदि की जंजाल से मुक्त हो।
आज मेरा एक सच्चाई बोलने का मन है।
मैं देश के तमाम राज्यों में अपनी गाड़ियों से यात्राएं कर चुका हूँ। देश के लगभग 20 राज्यों में उनकी सड़कों, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर चल चुका हूँ।
इन सबका एक्सपीरियंस लेने के बाद मैं कह सकता हूँ कि
मायावती जी के द्वारा बनाया गया Yamuna Expressway भी देश की सर्वश्रेष्ठ एक्सप्रेसवे की लिस्ट में आता है।
यमुना Express Way बाकी अन्य Express Way जो आज बन रहे हैं उनसे कई गुना बेटर है। इस एक्सप्रेस वे की मजबूती नेक्स्ट लेवल है। यही नहीं आज अगर आप इसपर जाओ तो
इस एक्सप्रेस वे की खूबसूरती, किनारे हरियाली अन्य एक्सप्रेस वे की तुलना में कहीं बेहतर दिखेगी।