पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी जी ने एक अच्छी बात कही थी - "It is the Opposition’s duty to oppose, expose and if possible depose."
हमारे संविधान विरोधी नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी मंत्रिमंडल को यह बात नागवार गुजरती है। उनको लगता है कि यह तो देशविरोधी है।
देश और लोकतंत्र की रक्षा करने वाले लोग यही बात कहेंगे कि वे इस सिस्टम को बदलना चाहते हैं।
राजनाथ सिंह को बताना चाहिए कब ऐसा आंदोलन हुआ, जब विपक्ष ने मांग की है कि इस सरकार को 5 नहीं 10 साल दे दिया जाए। जब हम विपक्ष में थे या फिर ये Opposition में.. तब भी ऐसा कभी नहीं हुआ।
जब भी विपक्ष सड़कों पर आता है तो oppose करने आता है, Expose करने आता है और depose करने आता है। आपको चुनाव हराने आता है। यह हमारी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी भी है।
अगर आपको इन बातों से आपत्ति है तो संविधान बदल कर दिखा दें।
कहिए आंदोलन करना और सरकार बदलने की मंशा रखना गैरकानूनी और देशद्रोह है। हमें मालूम है कि इनका मुख्य मकसद संविधान बदलना ही है।
: AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के अध्यक्ष @Pawankhera जी
📍 दिल्ली
राष्ट्रपति महोदया,
19 साल की अंकिता भंडारी ने एक VIP के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई। चार साल बाद भी CBI की धीमी जांच के चलते यह सवाल बना हुआ है कि वो VIP कौन था।
अंकिता के परिवार समेत कई लोग मानते हैं कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उनकी सिक्किम के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति से मैं स्तब्ध हूं। राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं हो सकती।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने साबित किया है कि महिलाओं की सुरक्षा की उन्हें बिल्कुल परवाह ही नहीं है।
मैं आपसे अपील करता हूं कि सरकार को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार न देने की सलाह दें।
अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए।
Mr Rubio has summoned his employee to Mumbai.
Modi ji, your officials in the External Affairs Ministry are confused about what's going on.
You might want to explain.
Unless, of course, you want me to.
दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है - जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।
जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। महिला पत्रकारों के कैमरे छीने गए, उन्हें घसीटा गया। एक पत्रकार की शिकायत पर FIR तक दर्ज नहीं हुई।
कुछ हफ्तों पहले शाहीन और नफ़ीसा ने साकेत थाने के अंदर अपने साथ हुई हिंसा और बदसलूकी की आपबीती सुनाई है। सोचिए, थाने के अंदर - वो जगह जहां महिलाएं शिकायत लेकर जाती हैं।
जिन पर महिलाओं की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, वही आज उनके लिए ख़तरा बन रहे हैं। और दिल्ली पुलिस किसके अधीन है - यह पूरा देश जानता है।
साकेत थाने का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई हो। शाहीन, नफ़ीसा और जिनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने हिंसा और बदतमीज़ी की है उनको न्याय मिले।
अमित शाह जी - आप और आपकी पुलिस महिलाओं से डरती क्यों है?
Students थे. Terrorists नहीं. फिर AK-47 और Pellet Guns क्यों?
Youth Congress protested outside the BJP headquarters in Delhi today.
Amit Shah, the country deserves an answer: Who ordered AK-47s and pellet guns to be used against students?
@AssamTweeter@BMCInsider_@Saurabh_MLAgk Yes, the 300k concurrent claims do not match official YouTube metrics for the stream. Actual concurrent stayed in the low tens of thousands, with total views far below what a real peak of that size would produce.
The person who said “Congress ki vidhwa “, “50 crore ki girlfriend”, “jersey cow”, “ didi o didi”, used the might of his administration to target and intimidate a 15 year old minor girl.