NEET पेपर लीक सिर्फ गड़बड़ी नहीं है, बल्कि देश के करीब 22 लाख छात्रों के साथ किया गया विश्वासघात है।
इसी के खिलाफ सीकर में NSUI अध्यक्ष @VinodJakharIN जी के नेतृत्व में युवा साथियों ने विरोध प्रदर्शन कर छात्रों की आवाज बुलंद की।
पेपर लीक माफियाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत, उनके सपनों को रौंद दिया और इसमें BJP साझेदार रही। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को देश माफ नहीं करेगा।
📍 राजस्थान
@Cockroachisback
Bhaiyon aur Cockroaches,
Mera ek suggestion hai movement ko aur strong banane ke liye:Rallies ka naya format banao:Sirf speeches nahi, proper group discussions ho
→ NEET Paper Leak & Education Corruption→ Crony Capitalism aur Job ki kami→
Throughout all day I have struggled to log onto my Instagram account. Now I have been suspended. It is a small prize to pay for press freedom, but I’ve never experienced it before.
@RahulGandhi Hello, would you be available for a phone interview Tuesday Norwegian time. It would be interesting to hear how you view the visit to Norway.
When there is nothing to hide, there is nothing to fear.
What happens to India’s image when the world sees a compromised PM panic and run from a few questions?
एक भयंकर आर्थिक तूफ़ान सर पर है।
12 साल में मोदी जी ने जो ढाँचा खड़ा किया - वह सिर्फ़ अडानी और अंबानी के लिए था।
और, अब वही ढाँचा भरभराकर ढहने वाला है।
चोट उन्हें नहीं लगेगी - उनके पास निकलने के रास्ते हैं।
चोट आपको लगेगी - युवाओं को, ग़रीबों को, मध्यमवर्ग को, किसानों को, मज़दूरों को, छोटे व्यापारियों को - जो कभी इस ढाँचे का हिस्सा थे ही नहीं।
अपने आसपास देखिए। क्या आप उस ढाँचे का हिस्सा हैं - या उस तूफ़ान का शिकार?
At this event today. Just for your information: I had no problems entering here today and was not expecting to have it either. Business as usual here in Norway.
"Deep Grok chat: Elon an alien like Men in Black—tiny creature in suit controlling body? 😂 Body lang sus, but 100% human says Grok. Cover-up? @elonmusk spill! 👽 @grok thx! #ElonMusk"
When the poor receive subsidies to survive, it’s called “revdi” and “freebies”.
When Adani and Ambani receive land at throwaway prices, tax exemptions, and lakhs of crores in loan write-offs - it’s called development.
The poor are shamed. The powerful are celebrated.
I am open to a conversation about freebies - but let’s be honest and account for both sides of the equation.
मोदी जी, आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात मैं आपको बताता हूं।
Epstein files में आपका, आपके मंत्री और आपके मित्र का साथ में नाम आना, ऐसे घिनौने अपराधी के साथ आपका नाम जुड़ा होना - ये शर्म की बात है।
आपने अमेरिका के साथ जो Trade deal की है, जिसमें आपने देश को बेच दिया - ये शर्म की बात है।
हमारे देश का डेटा दे दिया।
किसानों को खत्म कर दिया।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री बर्बाद कर दिया - ये शर्म की बात है।
पूरा देश जानता है, अडानी पर अमेरिका में चल रहे केस ने आपकी रातों की नींद उड़ा रखी है - क्योंकि वो BJP और आपके फाइनेंशियल आर्किटेक्चर पर केस है। 14 महीनों से उसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई - ये शर्म की बात है।
मोदी जी, आप अपने मित्रों अनिल अंबानी, अडानी और अपने लिए जो उचित समझें, वो कीजिए।
मैं और कांग्रेस पार्टी के बब्बर शेर देश की रक्षा करते रहेंगे - एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।
18% टैरिफ बनाम 0% - आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं। और, किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।
बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है - शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें।
भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया - “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी।”
आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई?
और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल?
अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा।
और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।
भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।
एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स - दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती।
लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।
#FarmersFirst 🇮🇳
हर आम भारतीय की ज़िंदगी आज ऐसी ही नर्क की यातना बन गई है।
सिस्टम सत्ता के सामने बिक चुका है। सब एक-दूसरे की पीठ थपथपाते हैं और मिलकर जनता को रौंदते हैं।
देश में लालच की महामारी फैल चुकी है, शहरी सड़न जिसका सबसे डरावना चेहरा है।
हमारा समाज इसलिए मर रहा है क्योंकि हमने इस सड़न को “New Normal” मान लिया है - सुन्न, निशब्द, बेपरवाह।
जवाबदेही की मांग करो, वरना यह सड़न हर दरवाज़े तक पहुंचेगी।
#TINA
Video Credit: @sharadsharma1