विवाह से पहले लड़कों के मन में यह जानने की इच्छा होती है कि उनकी होने वाली पत्नी घर में रहेगी अथवा कार्य कर कमाने वाली होगी
कुन्डली मिलान के समय इस नियम का भी ध्यान रखें
यदि पुरषों की जन्म कुंडली में शनि ग्रह शुक्र ग्रह से संबंधित हो तो पत्नी कार्य करने वाली होती है
गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज कलबुर्गी की छत का बहुत बड़ा हिस्सा चलती क्लास में लड़कियों पर गिरा जिससे 5 लड़कियां घायल हो गई
और चूंकि ये मामला कांग्रेस शासित प्रदेश का है इसीलिए एकदम शांति है
आप कल्पना करिए अगर किसी बीजेपी शासित राज्य में इस तरह छात्राओं के ऊपर छत का हिस्सा गिरा होता तो कितना हंगामा मच गया होता
एक लड़का अपने कॉलेज के Notes PDF में बदल रहा था?
टेबल पर 20-25 पेज रखे थे और वह वही पुराना तरीका इस्तेमाल कर रहा था।
एक पेज Scan करो, Crop करो, Save करो, फिर दूसरा पेज Scan करो।
ऊपर से फोन में अलग से Scanner App भी इंस्टॉल था।
तभी उसका दोस्त आया और बोला -
"अभी भी Scanner App इस्तेमाल कर रहा है?"
लड़के ने कहा -
"हाँ भाई, और क्या करूं?"
दोस्त हंसते हुए बोला -
"Google ने तो अब कई Scanner Apps का खेल ही खत्म कर दिया है।"
उसने Google Drive खोला और Camera Scan वाला Feature दिखाया।
फिर एक-एक करके कई Pages सामने रख दिए।
Google AI ने खुद ही सभी Pages को Scan करके एक ही Document में जोड़ना शुरू कर दिया।
न बार-बार Crop करना पड़ा।
न हर Page को अलग Save करना पड़ा।
यहाँ तक कि दो तरफ वाले Documents को भी अलग-अलग Pages में पहचान लिया।
फिर Scan करते समय गलती से लड़के का हाथ फोटो में आ गया।
उसे लगा अब दोबारा Scan करना पड़ेगा।
लेकिन Clean Up Feature ने कुछ ही सेकंड में फोटो से हाथ हटा दिया।
तभी दोस्त ने एक और बात कही।
"लोग अक्सर छोटी-सी Scanning के लिए अलग-अलग Apps डाउनलोड कर लेते हैं।"
"लेकिन कई Apps सिर्फ Scan ही नहीं करते, कुछ Permissions और Usage Data भी Collect करते हैं।"
उसने कहा -
"जब वही काम Google Drive जैसे पहले से मौजूद Tool से हो सकता है, तो कई बार अलग App रखने की जरूरत ही नहीं पड़ती।"
"फोन में कम Apps होंगे तो Storage भी बचेगी और बेवजह की Permissions भी कम देनी पड़ेंगी।"
लड़का बोला -
"मतलब अब Notes Scan करने के लिए अलग App रखने की भी जरूरत नहीं है?"
दोस्त हंसकर बोला -
"कम से कम बहुत से लोगों के लिए तो नहीं।"
उस दिन लड़के को एहसास हुआ कि कई बार हम जिस काम के लिए अलग App डाउनलोड करते हैं, उसका Feature पहले से ही फोन में मौजूद होता है।
और बोनस में Storage भी बचती है, Data Privacy भी थोड़ी बेहतर रहती है।
आज जंतर मंतर पर एक व्यक्ति उमर खालिद के समर्थन में नारे लगा रहा था
फिर एक लड़की ने जब उससे पूछा कि आप उमर खालिद का समर्थन क्यों कर रहे हैं
तब उस व्यक्ति ने बदतमीजी से जवाब दिया की उमर खालीद ने क्या तुम्हारी इज्जत लूटी थी
ऐसे व्यक्ति को तो वहीं पटक पटक कर कूटना चाहिए था
इसीलिए अगर आप किसी दुकान में खरीदारी करने जा रहे हैं तो तसल्ली हो जाइए की दुकान किसका है
राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
यहां के चिड़ावा शहर के तहसील रोड स्थित एक रेडीमेड कपड़ा शोरूम में महिलाओं की निजता से खिलवाड़ किया गया है। आरोप है कि शोरूम संचालक का बेटा शाहरुख खान चेंजिंग रूम में किए गए एक छेद के जरिए कपड़े बदल रही महिलाओं के वीडियो मोबाइल में रिकॉर्ड करता था। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब कपड़े ट्रायल कर रही एक महिला को वीडियो बनाते समय मोबाइल की घंटी बजने की आवाज सुनाई दी। सूचना मिलते ही चिड़ावा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी शाहरुख पुत्र शेर मोहम्मद, निवासी पुरानी बस्ती चिड़ावा को हिरासत में लेकर थाने ले गई। महिला की लिखित रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को डिटेन कर लिया गया। घटना की खबर शहर में फैलते ही विभिन्न हिंदू संगठनों और व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग शोरूम के बाहर एकत्रित हुए और नारेबाजी करते हुए रास्ता जाम कर दिया।
तृणमूल कांग्रेस के नेता और बदोरिया नगर पालिका के चेयरमैन दीपांकर भट्टाचार्य के खेत पर सूचना के आधार पर पुलिस ने छापा मारा
तो कई बोरे नोटों के बंडल वहां पर छुपाए मिले
मतलब अखिलेश यादव चाहते हैं कि जिम के अंदर हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण हिंदू लड़कियों के वीडियो बनाकर उनके साथ बलात्कार मुस्लिम लोग करते रहे जिनको यह लोग सेक्सटार्सन ब्लैकमेलिंग और बलात्कार का अड्डा बना दे
और जब पुलिस गिरफ्तार करें तो पुलिस इनके द्वारा चलाई गई गोली से चुपचाप मर जाए पुलिस आत्मरक्षा में ऐसे दरिंदों पर गोली ना चलाएं
अखिलेश यादव को जिस फरीद के एनकाउंटर पर पीड़ा हुई है उसे फरीद के मोबाइल से 30 हिंदू लड़कियों महिलाओं के बलात्कार के क्लिप मिले थे जो उसके जिम में आती थी
15 साल तक कोलकाता मेट्रो का काम रुका रहा
फिर मैं इस पर थोड़ा रिसर्च किया कि आखिर किस कारण से यह काम रुका रहा
तो कारण एकमात्र था कि अगर यह मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा होता तो इसका उद्घाटन नरेंद्र मोदी करते और ममता बनर्जी यह नहीं चाहती थी
क्योंकि यह केंद्र सरकार बनवा रही है जी हां रेल विकास निगम लिमिटेड जो कोलकाता मेट्रो के अरेंज लाइन का काम कर रही थी उसे एक बाईपास के ऊपर से एक बाय डक्ट बनाना था लेकिन उसके लिए 15 दिन ट्रैफिक रोकना जरूरी था
15 साल पहले आरवीएनएल ने स्थानीय प्रशासन को पत्र भेजा की 15 दिन के लिए ट्रैफिक रोक दीजिए तृणमूल कांग्रेस सरकार ने ट्रैफिक नहीं होगा
फिर 4 पत्र और भेजे गए ट्रैफिक नहीं रोका गया
उसके बाद आरबीएनएल को हाई कोर्ट जाना पड़ा हाई कोर्ट में तुरंत पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि ट्रैफिक रोका जाए ताकि मेट्रो का काम पूरा हो
लेकिन ममता बनर्जी की जिद्द देखिए ममता बनर्जी ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि 15 दिन ट्रैफिक रोकना जरूरी है तो ममता बनर्जी ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर कर दिया
और सबसे बड़ी आश्चर्य की इस खबर को किसी मीडिया ने कभी चलाया भी नहीं कि पश्चिम बंगाल में सिर्फ मोदी उद्घाटन ना कर सके उसके लिए क्या गंदा खेल खेला जा रहा है
उसके ही राज्य के लाखों लोग ट्रैफिक जाम में फंसकर अपना वक्त बर्बाद करते रहे लेकिन ममता बनर्जी के लिए अपना घमंड सबसे जरूरी था
उसके बाद चुनाव आए और यह मुद्दा चुनाव में भी खूब उछला
फिर नीच ममता सरकार चली गई और जो प्रोजेक्ट पिछले 15 साल से रुका था वह मात्र 15 दिन में पूरा हो गया
इसीलिए मैं कहता हूं भारत का विपक्ष देश के विकास का सबसे बड़ा दुश्मन है
अदालतों की क्या जरूरत है दुनिया के किसी भी मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति को साफ-साफ नजर आएगा यह कितना भव्य विशाल मंदिर हुआ करता था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति महमूद बेगड़ा ने तोड़कर मस्जिद बना दिया
यह कुछ गुजरात के सिद्धपुर का बेहद पवित्र रूद्र महालय शिव मंदिर हुआ करता था
जाधव नाम का यह शख्स 10वीं की परीक्षा देने के बाद अपने गांव में ब्रह्मपुत्र नदी के बारिश से भीगे रेतीले किनारे पर घूम रहा था क्योंकि बाढ़ का पानी कम हो गया था।
तभी उसकी नजर करीब 100 मरे हुए सांपों के एक विशाल झुंड पर पड़ी। इसके बाद उसने आगे बढ़कर देखा कि नदी का पूरा किनारा मरे हुए जानवरों से भरा हुआ था और एक श्मशान जैसा लग रहा था।
मृत प्राणियों के शवों के कारण खड़े होने की जगह नहीं थी। इस दर्दनाक सामूहिक निर्दोष मौत के दृश्य ने किशोर जाधव के मन को झकझोर कर रख दिया।
हजारों बेजान जानवरों की बेजान, चौड़ी खुली आंखों ने जाधव को कई रातों तक सोने नहीं दिया। एक चर्चा के दौरान गांव के एक शख्स ने व्याकुल जाधव से कहा कि जब पेड़-पौधे नहीं उग रहे हैं तो बाढ़ से बचने के लिए नदी के रेतीले किनारे जानवरों को शरण कहां मिलेगी?
जंगल के बिना उन्हें भोजन कैसे मिलेगा? यह बात जाधव के दिल को छू गई और उन्होंने जानवरों को बचाने के लिए पेड़ लगाने की कसम खाई।
16 साल के जाधव 50 बीज और 25 बांस के पेड़ लेकर नदी के रेतीले किनारे पर पौधे लगाने पहुंचे।
यह घटना आज से 35 साल पुरानी है।
वह दिन था और आज भी दिन है। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि इन 35 वर्षों में जाधव ने बिना किसी सरकारी मदद के 1360 एकड़ भूमि पर घना जंगल बना दिया है।
क्या हम विश्वास कर सकते हैं कि एक अकेले आदमी ने उस जंगल को लगाया
5 बंगाल टाइगर, 100 से अधिक हिरण, जंगली सूअर, 150 जंगली हाथियों का झुंड, गैंडा और कई अन्य जंगली जानवर सांपों सहित शांति से घूम रहे हैं, जिन्हें इस अद्भुत कर्मयोगी ने इस जंगल का गौरव बनाया है।
जंगल का रकबा बढ़ाने के लिए मैं सुबह 9 बजे से 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर नदी पार करती, दूसरी तरफ एक पेड़ लगाती और फिर शाम को फिर से नदी पार करती और फिर साइकिल चलाती थी।
5 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद घर लौटेंगे।
उनके द्वारा लगाए गए इस जंगल में कटहल, गुलमोहर, अनानास, बांस, साल, सागौन, सीताफल, आम, बरगद, शहतूत, जामुन, आड़ू और कई औषधीय पौधे हैं।
आश्चर्य और दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि इस असंभव कार्य को पूरा करने वाले इस साधक को पांच साल पहले तक देश में अज्ञात था।
एक्शन का ये योद्धा अपने बनाए जंगल में पौधों से भरा बैग लेकर अपनी साइकिल पर असम के जंगल में अकेले अपनी धुन पर काम कर रहा था। वो पहली बार साल 2010 में देश की नजरों में तब आए थे जब एक वाइल्ड फोटोग्राफर
"जीतू कलिता" ने उन पर एक वृत्तचित्र फिल्म "द मोलाई फॉरेस्ट" बनाई
इस फिल्म को देश के नामी विश्वविद्यालयों में दिखाया गया था। दूसरी फिल्म आरती श्रीवास्तव की "फॉरेस्टिंग लाइफ" थी जिसमें जाधव के जीवन के अछूते पहलुओं और समस्याओं को दिखाया गया था।
तीसरी फिल्म "फॉरेस्ट मैन" को भी विदेशी फिल्म समारोहों में काफी सराहा गया था।
एक अकेले व्यक्ति ने पर्यावरण की रक्षा के लिए वन विभाग की मदद के बिना, बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के ऐसा किया।
इतने पिछड़े इलाके से आने के कारण उनके पास पहचान पत्र के रूप में "राशन कार्ड" भी नहीं था, उन्होंने हजारों एकड़ में फैला एक पूरा जंगल बना दिया।
जो लोग उन्हें जानते थे उन्होंने उनके काम का सम्मान किया और उनके नाम पर इस जंगल का नाम रखा।
असम का यह जंगल
इसे "मिशिंग जंगल" कहा जाता है।
(जाधव असम की मिशिंग जनजाति से हैं)। उन्होंने जीविकोपार्जन के लिए गायों को पाला है। शेरों द्वारा उनके घरेलू जानवरों को खाने के बाद भी, जो उनकी आजीविका का साधन थे, जंगली जानवरों के प्रति उनकी करुणा कम नहीं हुई। उनका मानना है और वे कहते हैं कि शेरों ने मुझे नुकसान पहुंचाया क्योंकि वे नहीं जानते कि अपनी भूख मिटाने के लिए खेती कैसे करें।
तुम जंगलों को नष्ट कर दो, वे तुम्हें नष्ट कर देंगे।
जाधव को एक साल पहले देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था, जो अभी भी असम में एक कमरे की बांस की झोपड़ी में रहते हैं और अपनी पुरानी दिनचर्या में तल्लीन हैं।
सरकार के तमाम प्रयासों और वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपए के पौधे खरीदने के बावजूद पर्यावरण और वन विभाग उस मुकाम को हासिल नहीं कर सका जो किसी एक व्यक्ति की इच्छाशक्ति से हासिल किया गया था। वह पौधों से भरे बैग और कुदाल के साथ जंगल की पगडंडियों पर साइकिल चलाकर एक निस्वार्थ उपासक के रूप में अपनी साधना में लीन है।
तो यह कहा जा सकता है कि कभी-कभी "एक ग्राम न केवल भट्टी को तोड़ सकता है बल्कि उसे चकनाचूर भी कर सकता है।
हजारों सलामी और सलाम।
सादर। #viralreelsシ #viralreels #foryouシ #treding #post #viral #
ये आदमी सुजीत बोस है
ये एक दशक पहले कलकत्ता की सड़कों पर
ककड़ी पपीता केला आदि मिक्स कर के स्वादिष्ट चाट
ताजा हरे पत्ते से बने दौना में बनाकर बेचता था
भाग्य की प्रवलता देखिये
एक दिन ममता बनर्जी से गाड़ी किसी काम से इसके
ढेले के पास रुकी तो इसने बड़े आग्रहों से अपनी बनी
फ्रूटचाट का पत्ता ममता को दिया,
वो खुश हो गई और
इसे बंगले पर बुलाया.
बस उसी दिन इसका भाग्य चमक गया और
कुछ दिनों में ये TMC सरकार का मंत्री बन गया
आज ये दस हजार करोड़ से अधिक का मालिक है
इसकी बेटी की शादी पर कलकत्ता के प्रसिद्ध होटल
मैरियट को दो सप्ताहों के लिए फुल बुक किया गया था
करोड़ों रुपए की ज्वैलरी तो विदेशी मंगाई गई थी
मतलब दहेज़ में रिकॉर्ड तोड़ जेवरात दीये गए थे
आज भी इसका पूरा परिवार नौकर आदि सामूहिक
रूप से एक माह के लिए विदेश जाते हैं
और "श्रीभूमि" के सबसे मंहगे क्लब "पूजा क्लब"
का आज भी चेयरमैन ये ही बना हुआ है.
खैर
आज इसके पापों का घड़ा भर गया है
बंगाल नगर पालिका भर्ती घोटाले में आज इसे
गिरफ़्तार कर लिया गया है
मेरे कहने का मतलब यह है कि
कांग्रेस पार्टी ने टू जी स्पेक्ट्रम,फोर जी कॉमनवेल्थ
गमला गोभी और ना जाने कौन कौन से घोटालों में
साठ लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की लूट की थी
साईकिल से स्कूल जाने वाला मुलायम परिवार आज निजी प्लेन से सब्ज़ी लेने जाता है.
सिर्फ
मोदी सरकार को छोड़कर
अब तक कोई भी सरकार रही उसने भ्रष्टाचार करके
देश की जनता जनार्दन की गाढ़ी कमाई लूटा ही है
लेकिन
मोदीजी जैसे बेदाग़, ईमानदार, देशभक्त, सनातनी
परम शिवभक्त का कपड़े पहनने का शौक़ भी इन
भ्रष्ट कुत्तों को अखरता है.
दुःख तब ज़्यादा होता है जब कुछ अच्छे लोग भी इन
भ्रष्ट पार्टियों की झूठी बातों में आकर हां में हां
मिलाने लग जाते हैं.
"सुजीत बोस"
तो ममता बनर्जी का आदमी है
इसलिए उसका भ्रष्टाचार कोई मायने नहीं रखता
बस मोदी नई ड्रेस क्यों पहनता है ?
सुजीत बोस, अखिलेश यादव और लालू यादव की हिस्ट्री
पढ़के अंदाज़ा लगाइए कि इन्होंने देश को कितनी
बेदर्दी से लूटा है....!!
लखनऊ के डालीगंज में मनकामेश्वर मंदिर के ठीक सामने एक छोटी सी दुकान थी — "मोहन इलेक्ट्रिकल्स"। शटर पर आधा मिटा हुआ बोर्ड, अंदर तारों के बंडल, पुराने पंखे, और एक छोटा सा शिवलिंग जो मोहन ने खुद सीमेंट से बनाया था।
मोहन तिवारी, अड़तीस साल। बारह साल तक शहर भर में वायरिंग का काम किया। नोटबंदी में कैश फँसा, फिर जीएसटी में बिल नहीं बना पाया, फिर लॉकडाउन में दुकान छह महीने बंद रही। जब खोली तो ग्राहक ऑनलाइन मिस्त्री बुलाने लगे। कर्ज़ साढ़े चार लाख — सामान वाले का, ब्याज वाले का, घर का किराया तीन महीने का बाकी।
पत्नी रीता ने एक दिन कहा, "दुकान बेच दो, गाँव चलते हैं।" मोहन ने कुछ नहीं कहा, शटर गिराया, और सामने मंदिर चला गया।
पहली प्रार्थना
मनकामेश्वर में भीड़ नहीं थी। पुजारी ने जल चढ़ाया, मोहन ने आँख बंद की। माँगने को बहुत कुछ था — पैसा, काम, इज्जत। पर मुँह से निकला सिर्फ —
"ॐ नमः शिवाय।"
वह रोज़ जाने लगा। सुबह दुकान खोलने से पहले एक लोटा जल, पाँच मिनट बैठना, फिर वही पाँच अक्षर। न मन्नत, न नारियल। बस बैठना।
सातवें दिन पुजारी बोला, "मोहन, शिव से धन मत माँग। शिव से रास्ता माँग। धन तो लक्ष्मी देती है, पर लक्ष्मी उसी घर जाती है जहाँ शिव पहले से बैठे हों — मतलब जहाँ सफाई हो, सच हो, समय हो।"
मोहन ने पूछा, "रास्ता कैसे मिलेगा?" पुजारी हँसा, "जब रोज़ बैठोगे तो दिखेगा।"
रास्ता दिखा
दसवें दिन मोहन दुकान साफ कर रहा था। शिवलिंग पर जल चढ़ा कर जब बैठा, तो नजर पुराने इन्वर्टर के डिब्बों पर पड़ी। लॉकडाउन में लोग इन्वर्टर ले गए थे, बैटरी खराब हो कर लौट आई थीं। दस बैटरियाँ कोने में धूल खा रही थीं।
उसी समय एक पुराना ग्राहक — मिश्रा जी, जिनके स्कूल में उसने वायरिंग की थी — बैटरी ठीक कराने आया। मोहन ने कहा, "नई नहीं, री-कंडीशन कर देता हूँ।" उसने यूट्यूब देखा, तेजाब बदला, चार्ज किया। बैटरी चल पड़ी। मिश्रा जी ने 800 रुपये दिए और कहा, "स्कूल में सोलर लगवाना है, कोई जानकार है?"
मोहन को सोलर का 'स' नहीं आता था। घर आ कर उसने रीता से कहा, "शिव जी ने रास्ता दिखाया है।" रात भर उसने वीडियो देखे। सुबह मंदिर गया, जल चढ़ाया, बोला, "ॐ नमः शिवाय, हाथ में हुनर दे दो।"
अगले हफ्ते उसने मिश्रा जी के स्कूल की छत पर दो किलोवाट का छोटा सोलर लगाया — खुद सीख कर, खुद चढ़ कर। काम में तीन दिन लगे, मुनाफा अठारह हजार।
वह पैसा उसने कर्ज़ में नहीं दिया। उसने एक बोर्ड बनवाया — "मोहन सोलर एंड इलेक्ट्रिकल्स — शिव कृपा से।"
कृपा का मतलब
छह महीने में कहानी बदली नहीं, दिशा बदली।
मोहन ने हर सुबह का नियम नहीं तोड़ा — 6 बजे मंदिर, जल, पाँच मिनट जाप। उस पाँच मिनट में वह दिन का हिसाब मन में बनाता। कौन सा फोन करना है, किससे उधार माँगना नहीं, किसे ईमानदारी से 'नहीं' कहना है।
शिव कृपा से उसे तीन चीज़ें मिलीं, नोट नहीं —
सफाई। दुकान चमकने लगी। ग्राहक भरोसा करने लगे।
सच। वह अब झूठा वादा नहीं करता था — "कल हो जाएगा" नहीं, "परसों शाम तक"। लोग इंतज़ार करने लगे।
संगत। मंदिर में एक रिटायर्ड इंजीनियर मिले, उन्होंने उसे सरकारी टेंडर भरना सिखाया।
पहला टेंडर — नगर निगम की पाँच स्ट्रीट लाइट्स। छोटा काम, पर नाम आया। दूसरा — प्राइमरी स्कूलों में पंखे। तीसरा — दस घरों की रूफटॉप सोलर।
एक साल बाद मोहन ने कर्ज़ का आखिरी पैसा दिया। उसी दिन वह मंदिर गया, शिवलिंग पर दूध नहीं, जल चढ़ाया, और बोला, "धन नहीं माँगा था, रास्ता माँगा था।"
पुजारी ने पूछा, "अब क्या चाहिए?" मोहन बोला, "वही — ॐ नमः शिवाय।"
आज
आज मोहन की दुकान बड़ी नहीं हुई है, पर बोर्ड बदल गया है। अब उसके पास दो लड़के काम सीखते हैं। वह हर नए काम से पहले उन्हें मंदिर ले जाता है, कहता है, "पहले हाथ जोड़ो, फिर पेचकस उठाओ।"
रीता अब हिसाब रखती है। पिछले महीने उन्होंने पहली बार पहाड़ों की यात्रा की — केदारनाथ। वहाँ भीड़ में मोहन ने आँख बंद की, और वही पाँच अक्षर बोले।
लोग पूछते हैं, "शिव की कृपा से धन कैसे मिला?" वह हँस कर कहता है —
"शिव ने तिजोरी नहीं खोली, उन्होंने मेरी आँखें खोलीं। जब रोज़ 'नमः' बोलता हूँ तो अहंकार घटता है। अहंकार घटता है तो ग्राहक की बात सुनता हूँ। जब 'शिवाय' बोलता हूँ तो मन स्थिर होता है, तो काम में गलती नहीं होती।
जहाँ अहंकार नहीं, गलती नहीं, वहीं लक्ष्मी खुद चल कर आती है।"
शेयर ना कर पाओ तो सोशल मीडिया छोड़ देना
हम ने दिल्ली के हर पुलिस स्टेशन पर एक अधिवक्ता महानगर सेवक के रूप में नियुक्त किया है
महानगर सेवकों की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया
1. सड़क गली और सार्वजनिक पार्कों में नमाज़ पढ़ने वाली कमेटियों के ख़िलाफ़ हम कोर्ट केस फाइल कर के पब्लिक लैंड ख़ाली करेंगे.
2. स्कूल मंदिरों की 100 मीटर के दायरे में अवैध कच्चे पक्के मांस की दुकानों की शिकायत दर्ज और कार्यवाही नहीं होने पर कोर्ट जाएंगे.
3. मस्जिदो के लाउडस्पीकर कोर्ट की गाइडलाइंस के विरुद्ध जाने पर मस्जिद कमेटी पर कोर्ट केस फाइल करेंगे.
4. पैदल चलने वाले फ़ुटपाथों पर ज्यादातर नारियल पानी की दुकान लगाने के नाम पर स्थायी क़ब्ज़ा है उन पर कोर्ट केस फाइल करेंगे.
जागरूक नागरिकों से अपील है आप शिकायतकर्ता बने
समाज से अपील हम हमे सहयोग देने वालो का आप सहयोग करें. @SanjeevSanskrit@swati_gs
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यह अंगूरबाला है
1998 के पंचायत चुनाव में यह भाजपा की पोलिंग एजेंट बनी थी तब तृणमूल कांग्रेस के दरिंदों ने उनके ऊपर अमानुषित अत्याचार किया था
फिर यह दुर्गा मां के सामने जाकर प्रतिज्ञा ली कि जब तक बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में रहेगी मैं चप्पल नहीं पहनूंगी
और यह 1998 से 2026 तक नंगे पैर ही रहती थी
कल बड़े धूमधाम से एक सार्वजनिक समारोह में इन्हें चप्पल पहनाया गया
होटल के मालिक की उस वक़्त आँखें खुली की खुली रह गईं और विश्वास नहीं हुआ ........जब उसने इतनी सारी लड़कियों को देवी के वेश में देखा।
दरअसल एक स्कूल में नाटक में भाग लेने वाली कुछ छात्राएं प्रोग्राम खत्म होते ही एक होटल
में उसी ड्रेस में पहुंच गईं।
होटल मालिक ने तुरंत मुस्कुराकर कहा ये तो मेरा सौभाग्य है,
जो कि पहली बार इतनी सारी साक्षात् देवियों का आगमन मेरे होटल में हुआ है।
मालिक ने कहा बिना कोई पैसे लिए आज इन्हें वो सब खिलाओ जो होटल में मौजूद हो और इनकी इच्छा हो।
छात्राओं की मानों लॉटरी लग गई।
होटल के मालिक ने माता रानी के रूप का सम्मान किया,और माता रानी सचमुच प्रसन्न हो गई ..........जैसा को तस्वीर में दिख रहा है कि यह लड़कियां इस सम्मान से कितनी खुश है........
एक लड़के ने सोचा कि अगर नींबू पानी बेचूं तो कितना कमा सकता हूँ?
पहले दिन उसने घर पर ग्लास तैयार किए और निकल पड़ा – “नींबू पानी… नींबू पानी?”
शुरू में उसे लगा कोई नहीं खरीदेगा, लेकिन धीरे धीरे लोग रुकने लगे?
उसने एक ग्लास ₹20 रखा और 2 घंटे में 50 से ज्यादा ग्लास बेच दिए?
मतलब करीब ₹1000 की सेल?
खर्च देखा तो नींबू, चीनी और बर्फ मिलाकर ₹300-400 लगे?
यानि पहले दिन ही ₹600-700 बच गए?
अगले दिन उसने एक जगह स्टैंड लगाकर बेचना शुरू किया और छोटा सा बोर्ड भी लगा दिया?
अब भरोसा बढ़ा और 3 घंटे में 100+ ग्लास बिक गए?
सेल करीब ₹2000 और खर्च ₹700-800?
यानि ₹1200 के आसपास बचत?
फिर तीसरे दिन उसने थोड़ा अपग्रेड किया - ₹20 वाला ग्लास और ₹30 वाला बड़ा ग्लास दोनों रख दिए?
लोगों ने खुद बड़े ग्लास लेने शुरू कर दिए?
3-4 घंटे में 150+ ग्लास बिके और सेल ₹3000-3500 तक पहुंच गई?
खर्च बढ़कर ₹1200-1300 हुआ लेकिन बचत करीब ₹2000 तक हो गई?
अब उसे समझ आया कि छोटा सा काम भी सही तरीके से किया जाए तो बड़ा बन सकता है?
और सबसे मजेदार बात लोग अब उसे पहचानने लगे – “अरे वही नींबू पानी वाला आ गया?”
अब वो सोच रहा है इसमें और वैरायटी जोड़ दे जैसे पुदीना या सोडा ताकि कमाई और बढ़ सके?