धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।
तस्माद् धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥
अर्थ: जो धर्म को नष्ट करता है, उसका धर्म द्वारा नाश किया जाता है। जो धर्म की रक्षा करता है, उसकी रक्षा धर्म करता है। इसलिए कभी धर्म का नाश नहीं करना चाहिए। @astrologernitisha #viral#धर्म
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
अर्थ: जब-जब धर्म का पतन होता है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं (श्रीकृष्ण) स्वयं को सृजित करता हूँ (अवतार लेता हूँ)। @धर्म @स्नातन #viral#realty @एस्ट्रोलोजर्निटिशा
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।
अर्थ: जो धर्म को नष्ट करता है, वह स्वयं नष्ट हो जाता है। जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।
@धर्म #स्नातन @एस्ट्रोलोजर्निटिशा
अस्थिरं जीवितं लोके ह्यस्थिरे धनयौवने।
अस्थिराः पुत्रदाराश्च धर्मः कीर्तिर्द्वयं स्थिरम्॥
अर्थ: इस संसार में जीवन, धन, यौवन, पत्नी-बच्चे सब अस्थायी हैं। केवल धर्म और कीर्ति (यश) ही स्थिर (शाश्वत) हैं। @nitishamalhotra#viral
सुखार्थं सर्वभूतानां मताः सर्वाः प्रवृत्तयः।
सुखं नास्ति विना धर्मं तस्मात् धर्मपरो भव॥
अर्थ: सभी प्राणी सुख चाहते हैं, लेकिन धर्म के बिना सुख नहीं है। इसलिए, धर्म का आचरण करें। @dharm