आज दिल्ली के होटल ली मेरेडियन में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी और प्रिय लेखक प्रसून जोशी जी द्वारा साहित्य का नवांकुर सम्मान दिया गया।
ये सम्मान मेरा नहीं बल्कि चाँदपुर की चंदा के समस्त पाठकों का सम्मान है।
आप सबकी शुभकामनाएं बनीं रहें 🙏
दुनिया में ढाई हज़ार रामसर स्थल हैं..इनमें एक बलिया का होना निश्चित तौर पर हम बलिया बालों के लिए गर्व की बात है..वरना अब तक यहाँ जीजा जी लोग अपनी साली को घुमाने ही लाते थे और भक्क जीजा जी इहाँ का बा सुनकर वापस लौट जाते थे..उम्मीद है यहाँ कुछ मूलभूत चीजें बदलेंगी..ख़ासकर युवा पीढ़ी जानेगी की बलिया सिर्फ़ बागी नहीं थोड़ा आद्र भी है. ❤️🙏
A century as far as Ramsar sites are concerned!
Glad that the Jai Prakash Narayan Bird Sanctuary (Surha Tal) in Ballia, Uttar Pradesh has been designated as India’s 100th Ramsar site. This wetland is rich in avifaunal biodiversity, attracting several migratory and resident birds.
India’s unwavering commitment to protecting our natural surroundings and wetlands in particular is clearly reflected in this feat.
Over the years, efforts to conserve and rejuvenate wetlands have been strengthened through greater community participation, science, innovation and awareness initiatives. These endeavours are helping preserve biodiversity, secure ecological balance and create a greener future for coming generations.
पिछले दिनों खबर आई कि जापान ने पूर्वांचल के आम लेने से इंकार कर दिया है..कई टन आम के आर्डर कैंसिल हो गए..कारण ये था कि आम को सड़ने से बचाने के लिए जिस रसायन का प्रयोग किया जा रहा था.वो बेहद हानिकारक था
इधर भारत का खाद्य सुरक्षा विभाग इतना तेजस्वी है कि आए दिन नकली पनीर,नकली मिठाई,डिटर्जेंट से बने नकली दूध,नकली तेल की खबर छपवाकर अपनी ड्यूटी पूरा कर लेता है और सो जाता है.
वो तो धन्य हैं भारत के लोग..जो जापान से आगे हैं…इनका किडनी-गुर्दा और हृदय इतना मजबूत हो चुका है कि इन रसायनों से कोई फर्क ही नहीं पड़ता.
यहाँ जिस डिब्बे पर शुद्ध और असली लिखा होता है..वही सबसे ज़्यादा मिलावटी और अशुद्ध पाया जाता है.
पता नहीं बाजार में मिल रहे खाने-पीने के जहर पर कब किसी राजनीतिक पार्टी का ध्यान जाएगा..कब कोई पार्टी कोई एक्टिविस्ट इनके ख़िलाफ़ मोर्चा खोलेगा..🙃
@old_cricketer मैं एक बार जीवन में कानपुर गया हूँ..शाम को एक दोस्त से पूछा कि कोई जगह घुमा दो भाई, वो बेचारा गंगा बैराज लेकर चला गया…और कहा देखो..मैं उसका मुँह देखने लगा कि ससुर मैं अस्सी घाट का निवासी हूँ, मुझे दिखाना हो तो कुछ और दिखाओ. उसने कहा फ़िलहाल तो अभी यही देखने लायक है. 😂
आज दिल्ली के होटल ली मेरेडियन में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी और प्रिय लेखक प्रसून जोशी जी द्वारा साहित्य का नवांकुर सम्मान दिया गया।
ये सम्मान मेरा नहीं बल्कि चाँदपुर की चंदा के समस्त पाठकों का सम्मान है।
आप सबकी शुभकामनाएं बनीं रहें 🙏
कभी गांव के पास लीची का बगीचा हुआ करता था.. जिसे देखके लगता कि थोड़ा-बहुत मुजफ़्फ़रपुर तो अपने गाँव में भी है। जैस ही किसी रिश्तेदार की कृपा से पाँच-दस रुपया इकट्ठा होता, हम लीची खाने पहुँच जाते।
ठीक वहीं पर कुछ आम के पेड़ इतने विशाल थे कि दिन-दहाड़े पीपल और बरगद को मात देते थे.
तब आंधी का आना..आम का चूना भी ईश्वर का दिया गया सबसे बड़ा उपहार लगता था.
आज वक़्त बदला है..बगीचे में बैठने वाले लड़को का ध्यान आम पर नहीं, इंस्टा की रील में आँधी बनकर नाचती कन्या की कमर पर है.
देखते ही देखते वो सारे पुराने आम सरेआम ढह चुके हैं. लीची का बगीचा भी खत्म हो चुका..महुआ भी नाराज हो चुका. जामुन की डांढ हर साल थोड़ी छोटी हो जाती है..l.
इन लगातार ढहते पुराने पेड़ों का असली मालिक कौन है, इसको लेकर झगड़ा-बवाल थाना-कचहरी भी हो गया.
इसी बीच देखता हूँ कि उन पुराने पेड़ों की जगह जगह पाँच-पाँच फिट के आम-जामुन-महुआ और लीची आ गए हैं.
बागवानी के एक्सपर्ट बताते हैं कि ये जल्दी बड़े हो जाते हैं..दो साल के अंदर ही फलो से लद जाते हैं..लीची ऐसी कि तीन साल का बच्चा भी तोड़ ले..जामुन के पेड़ ऐसे कि आदमी चाहे तो उँगली से एक-एक जामुन गिन ले.
इन आधुनिक पेड़ों को देखकर लगता है कि इन पेड़ों ने भी इंसानो की नकल करना शुरू कर दिया है..ये सब भी हड़बड़ी का शिकार हो चुके हैं. इनके ऊपर भी प्रोडक्टिविटी का दबाब है..किसी ने इनको भी टास्क दिया है कि बेटा जल्दी-जल्दी फल देना है..
शायद इनसे कोई बताना भूल गया है कि पेड़ का काम बस फल देना ही नहीं, छाँव देना भी है. किसी बेसहारे को ठाँव देना भी है..किसी मौसी,बुआ और दीदी के गीतों का झूला बनना भी है..और अन्ततः मनुष्य की स्मृतियों को प्रकृति से जोड़ना भी है.
लेकिन अफ़सोस इसे इंसानों संगत कहें या विडंबना..
आधुनिक पेड़ न ही लंबे समय तक छाँव देने लायक बचे हैं और न ही पीढ़ियों तक फल देने लायक..!
न ही दादी-नानी के उन कहानियों के लायक़, जिन कहानियों में हर पेड़ पर एक भूत रहता था. जिस भूत से हम बच्चे डरते थे..
🙃
अतुल
(ठेले पर चिंतन)
भागवत के आधार पर कुछ लोग ख़ारिज करते हैं राधा का अस्तित्व… कुछ विद्वान कहते हैं कि शुकदेव जी ने सांकेतिक रूप से ज़िक्र किया है, राधा के सम्मान में राधा का नाम नहीं लिया है..लेकिन इसके बावजूद हज़ारों सालों से कोई काल्पनिक चरित्र इतने व्यापक स्तर पर मनुष्य की चेतना में बास नहीं कर सकता..स्वामी हरिदास तो राधा और कृष्ण दोनों को एक मानते थे.
@ChhatrasalSingh महराज जयदेव का गीत गोविंद पूरा राधा कृष्ण प्रसंग ही है, पद्मपुराण में भी जिक्र है, कृष्णभक्ति परंपरा में विट्ठल वाले बाल कृष्ण की पूजा करते हैं उनको छोड़कर सब राधा को मानते हैं
जैसे ही विराट कोहली और अनुष्का प्रेमानंद जी महाराज के यहाँ चले जाते हैं..कुछ लोग जल उठते हैं.
आज किसी ने लिखा है कि ये मार्केट में नए-नए बाबा आए हैं और विराट इनके ब्रांड एंबेसडर बनाए गए है.
भाई, प्रेमानंद जी महाराज कोई नया-नया पंथ नहीं चला रहे हैं..वो जिस हित हरिवंश की राधावल्लभ परम्परा से आते हैं, उसका जन्म ही बारहवी-तेरहवीं शताब्दी में हुआ था. तब न विराट कोहली थे, न अनुष्का और न ही मैं और आप..कल कोई नहीं रहेगा, तो भी वो परम्परा चलती ही रहेगी.
किसी की आलोचना करिए लेकिन निंदा मत करने लग जाइये..विराट ने प्रोफेशनल जीवन और आध्यात्मिक जीवन में कितना संतुलन बनाया है ये सीखने लायक है.
#ViratKohli
शिक्षक की पहचान उसके अध्ययन और अध्यापन से होनी चाहिए थी..अफ़सोस कि उनकी पहचान उनके अफेयर्स और एक्स्ट्रा मैरिटल रिश्तों से हो रही है..अगर यही हाल रहा तो कुछ दिन में मार्वेल वालों को “BPSC टीचर इन मल्टीयूनिवर्स ऑफ़ मैडनेस” बनाना पड़ेगा. 🙈
बिहार : बैंक से लोन लेकर कराया लिंग परिवर्तन, फिर फुफेरी बहन से रचाई शादी, जमुई में प्यार के लिए बदली पहचान, फिर फुफेरी बहन से रचाई शादी। जमुई में BPSC शिक्षिका राखी ने बैंक से लोन लेकर लिंग परिवर्तन कराया और राहुल बनने के बाद अपनी फुफेरी बहन से विवाह कर लिया। यह अनोखी शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। #Jamui #BiharNews #LoveStory #BPSC #BreakingNews
किसी का सास से झगड़ा हुआ है. कोई अपने बॉस से परेशान है. किसी को राजनीति से दिक्कत है, किसी को मौसम से. किसी का बाबू अपनी सोना से मान ही नहीं रहा. कोई अपनी होने वाली बाबू को गरिया रहा…इसी चिल्ल-पों के बीच जब भोजपुरी गाने सुनाई दे जातें हैं, तब समझ आता है कि सिर्फ हम ही नहीं आए हैं, समूचा गाँव ही मुंबई उठकर आ गया है. 😌